जशपुरनगर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी ने स्वास्थ्य विभाग की कमर तोड़ दी है। सरकारी चिकित्सालय,गंभीर बीमारी से जुझ रहे मरीजों के लिए सिर्फ रेफर करने वाले केन्द्र बन कर रह गए हैं। सबसे अधिक परेशानी सड़क दुर्घटना,ह्दयाघात और ब्रेन स्ट्रोक जैसे गंभीर और अकस्मात होने वाली बीमारी के मरीजों को होती है। इन मरीजों की जान बचाने के लिए एक एक पल कीमती होता है। लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण,स्वजनों को अपने प्रियजनों की जान बचाने के लिए पड़ोसी राज्य झारखंड और ओडिशा के साथ अंबिकापुर की दौड़ लगानी पड़ती है। इसमें भी बदहाल सड़क और एंबुलेंस व्यवस्था कई बार बड़े विवादों का कारण बन चुकी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों यह जानलेवा कमी के आगे प्रशासनिक तंत्र भी फिलहाल बेबस नजर आ रहा है। विभाग को ढूढ़े विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं मिल रहें हैं। राजनीतिक नेतृत्व भी मौके बे मौके सियासत कर,इसे ठंडे बस्ते में डालता नजर आ रहा है। जिले में चिकित्सा व्यवस्था की बदहाल स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 12 पद रिक्त पड़े हुए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा रंजित टोप्पो ने बताया कि जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 16 और चिकित्सा अधिकारी के 20 पद स्वीकृत हैं। इनमें से चिकित्सा अधिकारी के सभी पद भरे हुए हैं,लेकिन विशेष चिकित्सक सिर्फ 4 ही पदस्थ हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि आदिवासी बाहुल्य जशपुर जिले का सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों को किस स्तर की चिकित्सा सेवा मिल रही होगी। यही हाल,जिले के 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों का भी है। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के अनुसार इन केन्द्रों के लिए राज्य सरकार ने विशेषज्ञ चिकित्सकों के 38 पद स्वीकृत किए हैं,लेकिन सिर्फ 7 पद ही भरे हुए हैं,31 पद रिक्त हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चिकित्साधिकारियों के भरोसे संचालित हो रहें हैं। इन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के चिकित्साधिकारियों के 30 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनके विरूद्व 26 चिकित्सक कार्यरत हैं।

विभाग को नहीं मिल रहें हैं विशेषज्ञ चिकित्सक -

सीएमएचओ डा रंजित टोप्पो ने नईदुनिया को बताया कि जिला चिकित्सालय सहित सभी सरकारी अस्पतालों में रिक्त पड़े हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों के पदों को भरने के लिए बीते माह विभाग की ओर से विज्ञापन जारी किया गया था। लेकिन,इन विज्ञापन के विरूद्व एक भी आवेदन विभाग को नहीं मिला। उन्होनें बताया कि नियमित चिकित्सकों की भर्ती शासन स्तर से होती है। इसके लिए विभाग की ओर से लगातार पत्राचार किया जाएगा। उन्होनें बताया कि शासन द्वारा निर्धारित नियम व प्रक्रिया का पालन करते हुए,संविदा नियुक्ति के लिए फिर से विज्ञापन जारी किया जा सकता है।

पड़ोसी राज्यों पर बढ़ी निर्भरता -

प्रदेश सरकार ने इलाज की सुविधा बढ़ाने के नाम पर जिला चिकित्सालय सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भौतिक संसाधनों का अंबार लगा दिया है। खासकर कोरोनाकाल के दौरान बिस्तर,आक्सीजन,आईसीयू बेड में तेजी से वृद्वि हुई है। लेकिन मानव संसाधन अब भी सिरे से नदारद हैं। नतीजा,गंभीर मरीजों को जान बचाने के लिए पड़ोसी राज्य ओडिशा और झारखंड की ओर दौड़ लगाना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय जशपुर रांची की दूरी 180 किलोमीटर और ओडिशा के राउरकेला व झारसुगड़ा भी लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दूर स्थित है। जाहिर है,गंभीर मरीजों को इन अस्पतालों तक पहुंचने की दूरी तय करना आसान नहीं होता है। इसकी बड़ी कीमत,मरीजों व उनके स्वजनों को चुकानी पड़ रही है। बावजूद इसके,जिले की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था किसी भी राजनीतिक दल के एजेंडें के प्राथमिक सूची में नजर नहीं आती है।

एक नजर आंकड़ों पर -

जिले में कुल सरकारी अस्पताल - 13

कुल स्वीकृत विशेषज्ञ चिकित्सक - 64

विशेषज्ञ चिकित्सक के रिक्त पद - 38

कुल स्वीकृत चिकित्साधिकारी - 36

चिकित्साधिकारियों के रिक्त पद - 04

द्यजिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए शासन स्तर से पत्राचार किया जा रहा है। संविदा नियुक्ति के लिए एक बार विज्ञापन जारी किया गया था,लेकिन इसके विरूद्व कोई आवेदन नहीं मिल पाने के कारण,नियुक्ति नहीं की जा सकी।द्य

डा रंजित टोप्पो,सीएमएचओ,जशपुर।

Posted By: Nai Dunia News Network

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