तपकरा। नईदुनिया न्यूज। जिले में सड़कों की बद से बदतर होती स्थिति से अब लोग इस ओर आने से कतराने लगे हैं। कटनी गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग का पत्थलगांव से कुनकुरी के सलियाटोली तक 62 किलोमीटर का अधर में लटका हुआ निर्माण पूरे जिले के दूसरे सड़कों पर भारी पड़ रहा है। सड़कों पर इनकी भार वहन क्षमता से अधिक वाहनों के दौड़ने से सारी सड़के गड्ढे में तब्दील होती जा रही है। दो साल पहले तक कुनकुरी से तपकरा,कोतबा और बागबहार तक जाने वाली सड़कों की गिनती जिले की सबसे अच्छी सड़कों में हुआ करती थी। कुनकुरी से तपकरा के बीच सड़कों में लगे हुए गुलमोहर के पेड़ में पᆬूल के दौरान इस सड़क का सौंदर्य और भी निखर आया करता था। सोशल मीडिया में वाहन चालकों की सेल्पᆬी की बाढ़ आ जाया करती थी। लेकिन लगातार भारी वाहनों के दौड़ने की वजह से यह सड़क पूरी तरह से गड्ढे में तब्दील हो चुकी है। सबसे अधिक खराब स्थित तपकरा नगर की है। यहां वन विभाग और गुप्ता मेडिकल के पास गड्ढे खतरनाक स्तर तक गहरे हो चुके हैं। इन गड्ढों को भरने के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा बालू का प्रयोग किए जाने से स्थिति और भी खराब हो गई है। इन दिनों हो रही झमाझम बारिश की वजह से बालू के सड़क में बिखर जाने से ये गड्ढे और खतरनाक हो चुके हैं। इस सड़क पर इन दिनों अंबिकापुर से ओडिसा की ओर जाने वाले भारी वाहनों के साथ,राष्ट्रीय राजमार्ग के भारी वाहन भी दौड़ रहे हैं। पत्थलगांव से कुनकुरी के बीच जर्जर हो चुके राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाने से बचने के लिए वाहन चालक घरघोड़ा से लैलूंगा, बागबहार, कोतबा, तपकरा, कुनकुरी होते हुए जशपुर और चरईडांड़ होते हुए अंबिकापुर की ओर जा रहे हैं। नतीजा इन सभी सड़कों की हालत बिगड़ने लगी है। साल भर से दो साल के बीच करोड़ों की लागत से निर्मित इन सड़कों की बदतर हालत देख कर कोई अनुमान भी लगा सकता है कि इनका निर्माण हाल ही में किया गया है। तपकरा से कुनकुरी के बीच सड़क की सबसे खराब हालत तपकरा से हल्दीमुंडा के बीच की है। इस बीच से सड़क लगभग गायब हो चुकी है। बड़े बड़े गड्ढों में हिचकोले खाते हुए सड़क से हो कर गुजरना राहगीरों की मजबूरी बन चुकी है।

गड्ढों को भरने बड़े पत्थरों का कर रहे इस्तेमाल

बारिश के दौरान इन गड्ढों को भरने के लिए लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर बड़े पत्थरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन पत्थरों को गड्ढे में डालने के के बाद इस पर बालू डाला जा रहा है। जिससे गड्ढे बेहद खतरनाक हो गए हैं। खास कर दो पहिया वाहन चालकों के लिए ये जान लेवा साबित हो रहे हैं। गड्ढों में डाले गए इन बडे पत्थरों से वाहनों के असंतुलित होने का खतरा तो बना ही हुआ है,साथ ही रेत से भी वाहन को संतुलित करने में चालकों को परेशानी उठाना पड़ रहा है। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाने से बस,ट्रक व भारी वाहनों में पट्टा टूटने और टायर पंचर होने की घटना अब सामान्य हो चुकी है।

जर्जर हुआ उतियाल नदी का पुल

तपकरा नगर की सीमा पर स्थित उतियाल नदी को नगर का प्रवेश द्वार कहा जाता है। इस नदी पर तकरीबन सात साल पहले प्रदेश सरकार ने पुल का निर्माण कराया था। लेकिन इसका एप्रोच रोड अब तक सही तरीके से नहीं बन सका है। पुल के दोनों छोर में एप्रोच सड़क बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। बड़े-बड़े गड्ढे उभर आने से सभी वाहन चालकों को परेशानी और खतरे से जूझना पड़ रहा है। इन गड्ढों में असंतुलित हो कर वाहनों के नदी में गिरने की आशंका बनी रहती है। इन गड्ढों में भी विभाग द्वारा बड़े साइज के पत्थर और बालू की भराई की जा रही है।

कई पुल भी हुए क्षतिग्रस्त

तपकरा और कुनकुरी के बीच की सड़क में स्थित कई पुल और पुलिया बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इस सड़क पर दौड़ रहे भारी वाहनों से इन जर्जर पुल के किसी भी समय धाराशायी होने का खतरा मंडरा रहा है। बावजूद इसके अब तक प्रशासन ने इन पर भारी वाहनों के परिचालन को प्रतिबंधित नहीं किया है। जानकारी के अनुसार स्टेट हाईवे सड़क का दर्जा मिलने की वजह से प्रशासन को यह कदम उठाने में तकनीकी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पिᆬलहाल इस सड़क पर दो पुल का निर्माण सुस्त रफ्तार से किया जा रहा है। सबसे बदतर स्थिति कसजोरा पुल का है। यह पुल पिछले कई सालों से अधूरा है। रियासतकालीन यह ऐतिहासिक सड़क बुरी तरह से जर्जर हो चुका है। द्रुत गति से इसका पुर्ननिर्माण ना होने पर तपकरा के टापू में तब्दील होने की आशंका जताई जा रही है। क्योकि तपकरा से कुनकुरी की ओर जाने वाली सड़क के साथ तपकरा-पᆬरसाबहार, तपकरा ओडिसा की सड़क भी बेहद जर्जर हो चुकी है।

--------