जशपुरनगर,नईदुनिया प्रतिनिधि। जशपुर की साइकिल रेसर बेटी एलिजाबेथ बेक का चयन गुजरात में आयोजित राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के लिए हुआ है। लेकिन आर्थिक समस्या से जूझ रही एलिजाबेथ के पास गुजरात जाने के लिए रुपये नहीं हैं। व्यक्तिगत स्पर्धा होने के कारण जिम्मेदार अधिकारी नियमों का हवाला देकर सहायता करने में असमर्थतता जता रहे हैं।

एलिजाबेथ जिला मुख्यालय जशपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर बगीचा ब्लाक के ग्राम महादेवडांड़ में रहती हैं। उसके पिता हेरमोन बेक किसान हैं। वे पिछले एक दशक से साइकिल रेस प्रतियोगिता में शामिल हो रही हैं। एक सप्ताह एलिजाबेथ को राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में चयनित होने की सूचना मिली। उससे काफी उत्साहित हो गई। दोगुने उत्साह के साथ प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल प्राप्त करने तैयारी कर रही हैं। एलिजाबेथ के पिता हेरमन ने बताया कि उसे बचपन से ही साइकिलिंग का शौक था। एलिजाबेथ ने घर में अपने पिता के साइकिल से साइकिलिंग की शुरुआत की। बाद में इसे ही अपना करियर बनाने के लिए स्कूल की पढ़ाई के बाद एलिजाबेथ अंबिकापुर गई थी। यहां महाविद्यालय में अध्ययन के दौरान वह साइकिल रेस में भाग लेने की तैयारी शुरू की।

आवश्यक डाइट की पूर्ति के लिए एलिजाबेथ ने अध्ययन के साथ एक नीजि क्लीनिक में काम करना शुरू किया। इस बीच 2015 में एलिजाबेथ ने सरगुजा के मैनपाठ कार्निवाल में आयोजित साइकिल प्रतियोगिता में भाग ली। इस प्रतियोगिता में सामान्य साइकिल से एलिजाबेथ ने प्रथम स्थान प्राप्त कर सबको हैरान कर दिया था। एलिजाबेथ की इस प्रदर्शन से प्रभावित हो कर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने उसे लगभग एक लाख रुपये की रेसर साइकिल भेंट की। रेसर साइकिल मिलने के बाद एलिजाबेथ ने अपने प्रदर्शन को निखारते हुए कई और प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की। अब गुजरात में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के लिए उसका चयन हो गया है।

आर्थिक तंगी बना रोड़ा

गुजरात में 27 सितबंर से 10 अक्टूबर तक आयोजित 36वीं राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में शामिल होने के रास्ते में आर्थिक तंगी एलिजाबेथ के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। उसके हाथ में बस और रेल के किराए के लिए रुपये नहीं हैं। परिवार की भी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है जो अपनी चैंपियन बेटी की सहायता कर सके। इसलिए वह सहायता की उम्मीद लगाए सरकारी कार्यालयों का चक्कर काट रही है। लेकिन, व्यक्तिगत स्पर्धा में चयन होने का हवाला देकर अधिकारी सरकारी सहायता देने मे हाथ खड़े कर रहे हैं। सरकारी सहायता न मिलता देख जशपुर की इस प्रतिभावन खिलाड़ी की सहायता के लिए स्वयंसेवी संगठन सामने आ रहे हैं।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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