जशपुरनगर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शहर के नजदीक स्थित ग्राम नीमगांव में स्थित जल संसाधन विभाग का तालाब पक्षी विहार के रूप में विकसित करने की योजना अधर में लटक गई है। तालाब के आसपास के रहवासियों द्वारा इस योजना को लेकर किए जा रहे विरोध को देखते हुए फिलहाल वन विभाग ने इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। प्रशासन की इस योजना में ठंड के दिनों में यहां आने वाले विदेशी मेहमान पक्षियों को संरक्षित करने के साथ अन्य पक्षियों के लिए सुरक्षित आशियाना बनाने के साथ ही पर्यटकों को लुभाने में भी यह योजना महत्वपूर्ण माना जा रहा था। लेकिन योजना के शुरूआती चरण में ही उठ रहे विरोध के स्वर ने इस योजना के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।

नीमगांव डेम के नाम से प्रसिद्ध इस तालाब में प्रवासी पक्षी हर साल यहां पहुंचकर जलाशय की शोभा बढ़ाते हैं। शहर से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर नीमगांव में ये पंछी हिमालय क्षेत्र से हजारों किलोमीटर का लंबा सफर कर प्रति वर्ष दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक यहां पहुुंचते हैं। करीब तीन माह समय बिताने के बाद पक्षी यहां से ओड़िसा के चिलका झील की ओर रवाना हो जाते हैं। इस साल दिसंबर के दूसरे सप्ताह में ही पक्षियों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस मौसम में जलाशय में भरपूर पानी भरा हुआ रहता है। नीमगांव जलाशय में सेलडक (ब्रासनी डक) बारहेडेडगिज (राजहंस),पिनटेल,उलेंड हेडेड स्टार,लिटिल कार्बोरेटग्रेव यहां पहुंचते हैं।

शिकारियों के खतरे से जूझते है मेहमान पक्षी

सुबह और शाम नीमगांव के डेम में पक्षियों की संख्या बढ़ जाती है। दिन भर यह पक्षी चारा के लिए आसपास के क्षेत्रों में विचरण करते है। विभाग द्वारा इन पक्षियों की निगरानी का दावा जरूर किया जाता है। इसके बावजूद आसपास के ग्रामीण इन पक्षियों का शिकार करने से नहीं हिचकिचाते। नीमगांव सहित हजारीटोली, बुधवाटोली, जिलिंग गांव के ग्रामीण खाने के लिए इन पक्षियों का शिकार कर ग्रामीण पहले जलाशय के आसपास कुछ स्थान पर थोड़े से हिस्से में घास छिल देते हैं। जिससे वह दूर से नजर आए। इसके बाद वहां धान या मडुआ (एक स्थानीय अनाज) के दानों में कीटनाशक डेमोक्रान मिलाकर वहां रख देते हैं। दानों की लालच में पक्षी वहां पहुंचते हैं। दाना चुगते ही पक्षी की मौत कुछ ही क्षणों में हो जाती है। चूंकि अधिकांश ग्रामीण किसान हैं। जिससे उनके पास फसलों को कीट व्याधि से बचाने के लिए आसानी से कीटनाशक उपलब्ध हो जाता है।

यह है योजना

वनमंडलाधिकारी कृष्णा जाधव ने बताया कि पक्षी विहार विकसित करने के लिए जो योजना तैयार की गई है,उसमें प्राथमिकता विदेशी पक्षियों की सुरक्षा है। इसके लिए तालाब में उथले टापूनुमा स्थलों का निर्माण किया जा रहा है। इन टापुओं में जलक्रीड़ा के दौरान पक्षियों को विश्राम करने का स्थल मिल सकेगा। इसके साथ ही चारा मिलने में भी पक्षियों को सरलता होगी। उन्होनें बताया विदेशी पक्षियों के साथ जिले की अन्य प्रजातियों की पक्षियों को इस विहार की ओर आकर्षित करने के लिए तालाब के आसपास फलदार और फूलदार पौधों का रोपण किया जाएगा। बर्ड वॉचिंग के लिए पर्यटकों को दूरबीन युक्त वॉच टॉवर का निर्माण भी कार्ययोजना में शामिल है। पक्षियों की जानकारी देने के लिए बैनर,पोस्टर और पुस्तक भी उपलब्ध कराया जाएगा।

जिले में पाए गए है डेढ़ सौ से अधिक प्रजाति के पक्षी

जैव विविधता के लिहाज से भरपूर जशपुर जिले बर्ड काउंट ने सर्वे के दौरान प्रवासी पक्षियों सहित 157 पक्षियों की प्रजातियां प्राप्त हुई है। इस सर्वे में जिले के कई क्षेत्रों में कुछ दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों के रिकार्ड भी प्राप्त हुए है। जो कि जशपुर जिले में हिमालय तथा दुनिया के कई हिस्सों से ठंड और वन क्षेत्रों की उपलब्धता होने के कारण यहां पाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इन दुर्लभ प्रजातियों में रोजीमिनीबेट प्रजाति पाई गई है,जो कि छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक जशपुर जिले में प्राप्त हुआ है। साथ ही लौंग टेल्डस्टान्नाईक ट्राईकलर नामक हिमालय से आने वाली पक्षी भी यहां मिली है। इसके अलावा जिले में ब्लू कैव्ड रौक थ्रस, अल्ट्रा मरीन फ्लाई कैचर, वरी डेंटर फ्लाई कैचर, रूफर्स वुड पैंकर और वेलवैड फ्रन्टेड नट हैज जैसी और भी कई पक्षियों की प्रजातियां प्राप्त हुई है। बर्ड काउंट के इस सर्वे से पहले जिले में मात्र 43 पक्षियों के प्रजातियों की जानकारी ही उपलब्ध थी। जो कि 24 से 29 जनवरी 2020 तक के सर्वे के दौरान 157 हो गई हैं।

बुनियादी सुविधा का भी होगा विकास

नीमगांव डेम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पहले भी जिला प्रशासन ने बनाया था। इस योजना में जलक्रीड़ा कर रहे पक्षियों को निहारने के लिए वॉच टॉवर का निर्माण शुरू किया गया था। लेकिन यह योजना परवान नहीं चढ़ सका। अधूरा पड़ा टॉवर अब भी इस प्रस्ताव की विफलता की कहानी बयां कर रहा है। जिस समय डेम में प्रवासी पक्षियों का डेरा रहता है, उस समय में बड़ी संख्या में लोग उन्हे देखने एवं वहां पिकनिक मनाने के लिए भी पहुुंचते हैं। डेम में विचरण करने वाले पक्षी जैसे ही अपने आसपास किसी व्यक्ति को देखते हैं, तो वे दूसरी तरफ चले जाते हैं। जिसके कारण लोग पक्षियों को पास से नहीं देख पाते हैं। इसे देखते हुए वन विभाग ने नीमगांव डेम के पास वॉच टावर बनाने का निर्णय लिया था। पर अभी तक यह वाच टॉवर बनने की शुरूआत भी नहीं हुई है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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