जशपुरनगर नईदुनिया प्रतिनिधि। शहरी क्षेत्र में गोठान निर्माण करने के लिए नगर सरकार को जमीन नहीं मिल रहा है। जमीन की तलाश में अधिकारी शहर और इससे लगने वाले ग्रामीण क्षेत्रों की खाक छान रहे हैं। लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा योजना के लिए राशि स्वीकृत किए जाने के बावजूद निर्माण स्थल को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। नगर पालिका क्षेत्र की सड़कों में इन दिनों निराश्रित मवेशी डेरा जमाएं हुए बैठे हुए हैं। इन मवेशियों को नियंत्रित करने के लिए नगर सरकार के पास काउ कैचर वाहन और कांजी हाउस जैसे तमाम भौतिक संसाधन मौजूद है। लेकिन राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में ये संसाधन कबाड़ होते हुए उपेक्षित पड़े हुए है। पालिका की यह लापरवाही नगरवासी और निराश्रित मवेशी,दोनों को भारी पड़ रही है।

विधानसभा चुनाव 2018 में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद प्रदेश की कमान सम्हालने वाली कांग्रेस सरकार ने नरवा, गरूवां, घुरूवां और बाड़ी योजना लागू करने की घोषणा की थी। प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य प्रदेश के पशुधन को संरक्षित कर इसका विकास करने के साथ कृषि को प्रोत्साहित कर ग्राम स्तर पर आर्थिक स्थिति सुधारना है। इस योजना के तहत गांव से लेकर शहर तक गोठान का निर्माण किया जा रहा है। इन गोठानों में गांव और शहरों के पालतू मवेशियों को एक जगह रखने के लिए सर्वसुविधा जुटाया जा रहा है। पंचायतों के साथ सरकार की इस अति महत्वाकांक्षी योजना को शहरी क्षेत्र में नगरपालिका और नगर निगम स्तर पर भी लागू किया गया है। लेकिन यह योजना नगर पालिका क्षेत्र जशपुर में अब तक लागू नहीं हो पाया है। कारण है गोठान निर्माण के लिए नगर सरकार को तलाशने के बावजूद जमीन नहीं मिल पा रहा है। जशपुर नपा सीएमओ बसंत बुनकर ने बताया कि गोठान निर्माण के लिए कम से कम तीन एकड़ की जमीन आवश्यक है। इतनी बड़ी जमीन शहरी क्षेत्र में अब तक नहीं मिल पाया है। उन्होनें बताया कि शहर के नजदीक ग्राम गिरांग के समीप जशपुर के करपात्री महाराज प्रवेश द्वार के पास गोठान निर्माण के लिए जगह तलाश किया है। लेकिन निर्माण के लिए इस स्थल को अब तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। गिरांग मोड़ के पास गोठान के निर्माण में शहर से इसकी दूरी आड़े आ रही है। नपा अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही निर्माण स्थल के संबंध में अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा।

सड़कों में डेरा जमाएं मवेशियों से नगरवासी हलाकान

शहर में गोैठान निर्माण में हो रहे इस लेट लतीपᆬी से नगरवासी हलाकान है। शहर के सभी सड़कों में इन दिनों मवेशियों का झुंड सुबह से लेकर रात तक डेरा जमाएं रहते हैं। इन निराश्रित मवेशियों से आवागमन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। खास कर सुबह 10 से लेकर 12 बजे तक शहर के उन्नत गौरव पथ, महाराजा चौक से जयस्तंभ चौक, बस स्टैंड, कॉलेज रोड और सन्ना रोड की स्थिति बदतर है। मवेशी पालक इनकी ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्हें इन मवेशियों की याद इन पालकों को इसके साथ होने वाले हादसे के समय ही आती है। वो भी प्रायः हादसे का शिकार होने वाले वाहन के मालिक से क्षतिपूर्ति राशि वसूलने को लेकर। मवेशियों की वजह से हो रहे इन हादसों आए दिन विवाद की स्थिति बन रही है। निराश्रित मवेशियों की समस्या से निबटने के लिए नगर सरकार के पास काउ कैचर वाहन और कांजी हाउस की सुविधा मौजूद है। लेकिन इनका प्रयोग करने के नाम पर पालिका के कर्मचारियों के हाथ पैर पᆬूलने लगते हैं। कांजी हाउस में रखने के दौरान मवेशियों के लिए दाना-पानी का व्यवस्था करना पालिका के खजाने पर भारी पड़ता है। साथ ही किसी प्रकार का हादसा होने पर राजनीतिक तूल पकड़ने का भय भी पालिका के अमले को सताता है। नतीजा सड़कों पर निराश्रित मवेशियों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है।

संरक्षित करने के लिए सरगुजा दौड़ने की मजबूरी

गौ तस्करी प्रभावित इस जिले में समय-समय पर पुलिस विभाग द्वारा तस्करों से बड़ी संख्या में मवेशियों को जब्त किया जाता है। जब्ती की इस कार्रवाई के बाद विभागीय अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या जब्त मवेशियों को संरक्षित करने को लेकर आती है। नियम के मुताबिक इन मवेशियों को सिपर्ᆬ पंजीकृत गौशाला में ही संरक्षित किया जा सकता है। लेकिन जिले में पंजीकृत गौशाला ना होने की वजह से पुलिस विभाग के अधिकारियों को सरगुजा जिले के सीतापुर तक दौड़ लगाना प़ड़ रहा है। इस दौरान मवेशियों को सीतापुर तक पहुंचाना इन अधिकारियों के लिए एक बड़ी समस्या साबित होती है। जब्त मवेशियों को यहां तक पहुंचाने के लिए कोई शासकीय व्यय स्वीकृत नहीं होता। इसके बाद मवेशियों के परिवहन की अनुमति भी जटिल प्रक्रिया भी आड़े आती है। कई बार जब्त मवेशी कई दिनों तक संबंधित थाना परिसर में ही बंधे रहते हैं।

शहरी गोठान योजना के तहत नगर पालिका क्षेत्र में गोठान के लिए 71 लाख रूपए की स्वीकृति प्रदेश सरकार द्वारा दे दी गई है। इस निर्माण के लिए अब तक जमीन का चयन अंतिम रूप से नहीं किया जा सका है। प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही निर्माण स्थल पर अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा।

बसंत बुनकर,सीएमओ,नपा,जशपुर

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