जशपुरनगर,नईदुनिया प्रतिनिधि। लापरवाही को लेकर इन दिनों सुर्खियां बटोर रहे वन विभाग की पोल सोमवार को उस समय खुल गई,जब संसदीय सचिव और कुनकुरी के विधायक यूडी मिंज ने भारी मात्रा में जंगल की अवैध कटाई की शिकायत पर,जंगल का निरीक्षण करने के लिए जंगल के अंदर घुस गए। यहां,जंगल की हालत देख कर उन्होनें वनविभाग की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई है। मामला,जिले के कुनकुरी वन परिक्षेत्र के गड़ाकटा लोटापानी के जंगल की है। जानकारी के अनुसार संसदीय सचिव मिंज सोमवार को एक निर्माण कार्य की भूमिपूजा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लोटापानी पहुंचें थे। यहां,भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न होने के बाद,स्थानीय रहवासियों ने उन्हें बताया कि लोटापानी के जंगल में भारी मात्रा में हरे भरे वृक्षों की अवैध कटाई हो रही है। ग्रामीणों का आरोप था कि बाहर से आए अंजान लोग,पूरी योजना बना कर,आधुनिक यंत्रों से लैस हो कर आते हैं,और वृक्षों की कटाई कर,ले जाते हैं।

ग्रामीणों का आरोप था कि इसकी शिकायत करने के बाद भी वन विभाग के रेंजर और बीट गार्ड कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर संसदीय सचिव अपने समर्थकों के साथ बाइक में सवार हो कर लोटापानी के जंगल पहुंच गए। उन्होनें जंगल के अंदर जा कर वन तस्करों की करतूत को देखा। जंगल का निरीक्षण करने के बाद,मिडिया से चर्चा करते हुए संसदीय सचिव ने बताया कि जंगल के 3 सौ मीटर अंदर बुरी तरह से कटाई की जा रही है। उन्होनें बताया कि प्रथम दृष्टया जंगल में 5 सौ से अधिक पेड़ काटे जाना प्रतीत हो रहा है। तस्करों का निशाना साल और सरई के वृक्ष हैं। ये वृक्ष पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण होते हैं। इन पेड़ों की जड़े धरती के अंदर तक पहुंची रहती हैं। जिससे वर्षा के दौरान मिट्टी का कटाव रूकता है और पानी धरती के अंदर तक पहुंचती है। इस तरह की कटाई से लोटा पानी के घने जंगल के उजाड़ होने पर चिंता व्यक्त करते हुए संसदीय सचिव मिंज ने नाराजगी जताते हुए,वनविभाग के उच्च अधिकारियों से,मामले पर चर्चा करनी की बात भी कही है।

महेशपुर मामला भी अधर में लटका -

जानकारी के लिए बता दें कि हाल ही में जिले के पत्थलगांव रेंज के ग्राम पंचायत झिमकी के आश्रित गांव महेशपुर में वनभूमि पट्टा के लिए संरक्षित जंगल की स्थानीय ग्रामीणों द्वारा संगठित होकर अवैध कटाई का मामला,उजागर हुआ था। कटाई करने वाले ग्रामीणों का आरोप था कि पंचायत में वनभूमि अधिकारी पट्टा वितरण में धांधली हुई है। अपात्र लोगों को पट्टा दे दिए जाने से पात्र लोग,योजना के लाभ से वंचित हो गए हैं। इससे नाराज हो कर,ग्रामीणों ने आपस में एक राय होकर,जंगल को साफ करने का निर्णय लिया था। मिडिया में मामला सामने आने के बाद,वनविभाग ने इस मामले में स्थानीय वन अधिकारियों से रिपोर्ट मांगने की खानापूर्ति कर,प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया। आश्चर्य की बात तो यह है कि जनपद पंचायत पत्थलगांव की सामान्य सभा की बैठक में मामला उठने के बाद भी वनविभाग चुप्पी साध कर बैठा हुआ है।

हाथी के बच्चे मामले में भी हो चुकी है फजीहत -

जानकारी के लिए बता दें कि जिले के तपकरा रेंज में दल से बिछड़ कर समडमा बस्ती पहुंचे हाथी के बच्चे के मामले में भी वनविभाग की खूब किरकिरी हुई है। छोटा हाथी को उसकी मां से मिलाने के लिए विभाग द्वारा किए गए प्रयास के तौर तरीके से जानकार सहमत नहीं थे। जानकारों ने इस अभियान में वन विभाग को मिली असफलता के लिए,अभियान के शुरूआत में अधिकारियों द्वारा की गई गलतियों को ही जिम्मेदार बताया है। जानकारी के लिए बता दें कि 13 सितंबर को मिले इस छोटो हाथी को मां से मिलाने का विभाग के मंत्री मोहम्मद अकबर के निर्देश पर,वन विभाग अब तक पालन नहीं कर पाया है।

अधिकारियों ने साधी चुप्पी

कुनकुरी रेंज के लोटापानी के जंगल में 5 सौ से अधिक पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में नईदुनिया ने विभाग को पक्ष जानने के लिए वनमंडल अधिकारी जितेन्द्र उपाध्याय के मोबाइल पर काल किया। लेकिन उनके काल रिसिव न करने के कारण,विभाग का पक्ष नहीं मिल पाया।

लोटापानी के ग्रामीणों की शिकायत पर जंगल का निरीक्षण किया गया। इसमें योजनाबद्व तरीके से जंगल की कटाई की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि मामले की जानकारी देने के बाद रेंजर और बीटगार्ड कार्रवाई नहीं करते हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। तस्करो से संलिप्तता की आशंका भी लोगों ने जताई है। इस पर उच्च अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।

यूडी मिंज,संसदीय सचिव,छग शासन।

Posted By: Nai Dunia News Network

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