तुमला(नईदुनिया न्यूज)। पांच हाथियों ने एक कच्चे मकान को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। घटना के समय घर के खाली होने से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। घटना जिले के सबसे अधिक हाथी प्रभावित तपकरा वन परिक्षेत्र की है।

जानकारी के अनुसार तपकरा रेंज के ग्राम पंचायत धौरासाढ़ के आश्रित ग्राम खजूरडीपा निवासी चैन सिदार पिता बहादूर सिदार का मकान गांव के अंतिम छोर में जंगल के किनारे स्थित है। इन दिनों धौरासाढ़ के आसपास के जंगल में 5 हाथियों का एक दल डेरा जमाए हुए है। इसे देखते हुए स्थानीय रहवासियों ने चैन सिदार को रात के समय घर को छोड़कर बस्ती में रहने की सलाह दी। लोगों की बात को मानते हुए चैन सिदार अपने घर को छोड़ कर बस्ती में रहने लगा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्रवार और शनिवार की मध्य रात्रि पांच हाथियों के दल ने इस घर को घेर लिया और मिट्टी से बने हुए कच्चे मकान को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया है। घर की स्थिति को देखकर चैन सिदार सहित स्थानीय ग्रामीण सिहर गए। उनका कहना है कि हाथियों के आक्रमण के समय किसी के रहने पर बड़ी घटना हो सकती थी।

अब तक हो चुकी है 9 की मौत

जिले में हाथियों की बढ़ती हलचल बड़ी समस्या बनी हुई है। हाथियों के हमले में जनहानि के आंकड़े साल दर साल बढ़ते जा रहें हैं। वनविभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल 2022 में जनवरी से जुलाई तक जिले में हाथियों के आक्रमण में 9 लोगों की जान जा चुकी है।वहीं बीते साल 2021 में 17,वर्ष 2020 में 14 और 2019 में 15 लोगों ने हाथियों के कुचलने से प्राण गंवाई थी। जिले में हाथियों की यह समस्या पड़ोसी राज्य ओडिशा और झारखंड में तेजी से विकसित हो रहे उत्खनन उद्योग को माना जाता है। जानकारों के अनुसार लगातार कम हो रहे वन्य क्षेत्र से हाथियों का प्राकृतिक रहवास प्रभावित हो रहा है। इससे यह विशालकाय वन्यजीव सुरक्षित ठिकाने और भोजन की तलाश में मानव बस्ती में घुस रहें हैं। इससे मानव हाथी संघर्ष की स्थिति बन रही है। इससे निबटने के लिए केन्द्र व राज्य सरकारों ने एलीफेंट कारिडोर जीआई सोलर वायर फेसिंग और जागरूकता अभियान जैसे उपाय किए हैं। लेकिन जनहानि का सिलसिला अब तक न तो थमा है और न ही अपेक्षा के अनुसार कम हो पाया है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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