0- विडंबना : प्रशासन और जनप्रतिनिधि बैठकों में ही जताते है चिंता, आमजन में भी नहीं आ रही जागरूकता,

0- रोक लगाने को लेकर सरकारी दस्तावेजों पर दौड़ा रहे कागजी घोड़े

कांकेर। नईदुनिया प्रतिनिधि

तमाम समझाइश और प्रतिबंध के बाद भी शहर में अमानक पॉलीथिन का उपयोग बेतहाशा बढ़ रहा है। आमजन घर से कपड़े की थैली ले जोन के आलस में बाजार में इसके उपयोग को बढ़ावा दे रहे है तो दुकानदार भी थोड़े से लाभ के चक्कर में 40 माइक्रॉन से कम मोटाई वाली पॉलीथिन बेच रहे है। इसे रोकने के लिए जनप्रतिनिधि भी कागजी घोड़े दौड़ा रहे है। पॉलीथिन न केवल शहर में पर्यावरण प्रदूषण फैला रही है अपितु पूरे सीवरेज सिस्टम को भी तहस-नहस कर रही है।

गोवंश भुगता रहा खामियाजा

साथ ही इसका सर्वाधिक खामियाजा गौवंश भुगत रहा है। जानकार लोगों की माने तो शहर में पॉलीथीन खाने से साल भर में बहुत से गायों की मौत हो रही है। जिला मुख्यालय में पांच जनवरी से 8 जनवरी तक मेला का आयोजन हुआ। जिसमें दूर-दूर से बड़ी संख्या में व्यापारियों ने अपना दुकान लगाया हुआ था। लेकिन मेला समाप्त होने के चार दिन बाद भी मैदान में व्यापारियों के द्वारा छोड़े गए बड़ी संख्या में पॉलीथीन व कचरा मैदान में अभी भी मौजूद है। वहीं मेले में नगर पालिका द्वारा सभी से टैक्स की वसूली गई थी। मगर मेला उठने के बाद भी मैदान को साफ नहीं किया गया है। जिसके चलते मैदान के चारों तरफ पॉलीथिन फैला हुआ है।

सब काम पॉलीथिन के भरोसे

बाजार से सब्जी, किराना या फिर कोई दूसरी चीज लाने के लिए सभी पॉलीथिन के ही भरोसे है। उपयोग के बाद इनके नष्टीकरण की विधिवत प्रक्रिया नहीं होने से थैलियां इधर-उधर गंदगी में जमा हो जाती है या नालियों को जाम कर रही है।

सब्जी मार्केट में होता है सर्वाधिक उपयोग

अमानक थैलियों का सर्वाधिक उपयोग सब्जी मार्केट व छोटी किराना दुकानों पर हो रहा है। सामग्री व्यवसायी अभय यादव ने बताया कि सस्ती होने के कारण सब्जी व्यवसायी इसका प्रयोग करते है। यही हाल छोटी किराना दुकानों का है। बड़ी दुकानों या संस्थानों ने अमानक पॉलीथिन का प्रयोग बंद कर दिया है। एक बड़ी समस्या पैकेट में आने वाले खाद्य पदार्थो की भी है। कई खाद्य पदार्थ अमानक स्तर की थैलियों में आ रहे है।

नाली सिस्टम होता है तहस-नहस

पॉलीथिन से शहर की नाली व्यवस्था पर बुरा असर हो रहा है। छोटे-बड़े नालों में पॉलीथिन गंदे जल निकासी में बाधक बना हुआ है। इससे मच्छर भी पनप सुविधा मिलती है। नपा के सफाई कर्मचारी बताते है कि हर कॉलोनी व गली मोहल्लों में नालियां जाम होने का प्रमुख कारण पॉलीथिन थैलियां है। सुप्रीम कोर्ट ने 40 माइक्रान से कम की पॉलीथिन के उपयोग पर प्रतिबंध लगा रखा है।

दो तीन दिनों में होगी सफाई- सौरभ तिवारी

नगर पालिका सीएमओ सौरभ तिवारी ने कहा कि मेला में आए कुछ व्यापारी अपना सामान लेकर गए नहीं है आज मेला स्थान में जाकर निरीक्षण किया गया है। मैदान में फैली पॉलीथिन को दो से तीन दिनों में सफाई करा दिया जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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