भानुप्रतापपुर। नईदुनिया न्यूज

योजनाएं गरीबों के उत्थान के नाम से बनाई जाती है, लेकिन उसका फायदा अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा उठाया जाता है। जिसका उदाहरण भी जिला यूनियन पूर्व भानुप्रतापपुर में देखा जा सकता है। लाख पालन परियोजना मद से क्षेत्र के आदिवासियों के लिए निःशुल्क कुसमी बीज व कटाई छंटाई के लिए शासन से करोड़ों राशि आबंटित की गई थी।

हितग्राहियों को जिन मात्रा में बीज प्रदाय किया जाना था नहीं किया गया। वहीं कटाई छटाई की राशि भी वितरण नहीं किए जाने बात सामने आ रही है। पिछले अंक में दमकसा समिति के अंतर्गत जय बूढ़ादेव स्वसहायता समूह ग्राम रसोली के सदस्यों ने कुसुमी बीज बेचे जाने की शिकायत की गई है। वहीं ग्राम मंगहुर के स्व सहायता समूह के सदस्यों द्वारा प्रति व्यक्ति को 3-3 कुसमी बीज दिया गया है। व कटाई छटाई के राशि नहीं दिए जाने की बात कही गई है। रिकॉर्ड के अनुसार प्रत्येक समूह में 136 किलोग्राम कुसुमीबीज व कटाई छटाई के लिए प्रति पेड़ 350 रूपये दिया जाना है। एक समूह में ही लाखों की अनियमितता सामने आ रही है।

दमकसा समिति के अंतर्गत मां दूर्गा स्वसहायता समूह ग्राम नागहूर में सदस्यों से मुलाकात कर इस संबंध में जानकारी ली गई तो समूह के सदस्य संतुराम पिता दशरूराम, सोनुराम पिता झिटकाराम, बिरझुराम पिता रूपसिह, सहादुर पिता बिरझुराम, फगनु पिता गनेश, धनेश पिता भानुराम व सोनाराम पिता धिराजी ने बताया कि समिति के प्रबंधक द्वारा हम सभी सदस्यों को 3-3 किलीग्राम कुसुमी बीज दिया है। व कटाई छटाई के लिए जो राशि दिए जाने थे, वह नहीं दिया गया।

लाख पंजी रिकार्ड के माने तो प्रत्येक समूह को 136 किलो ग्राम लाख बीज वितरण किया जाना है। प्रत्येक समूह में दस सदस्य है। कुसुम वृक्षों के अनुसार किसी को 16 किलोग्राम तो किसी को आठ किलोग्राम दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन प्रबंधक व कर्मचारियों द्वारा मात्र 30 किलो ग्राम लाख बीज वितरण कर 106 किलोग्राम लाख में हेराफेरी किया गया है। वहीं कटाई छटाई के लिए प्रति पेड़ 350 रुपये दिए जाने हैं। यह राशि प्रतिवर्ष दिए जाने का प्रावधान है लेकिन राशि नहीं दिया गया है।

गौरतलब हो कि यह तो मात्र एक समिति के एक समूह की बात है, जिला यूनियन पूर्व भानुप्रतापपुर के अंतर्गत 22 समितियों के लगभग 100 से अधिक समूहों पर लाख बीज व कटाई छटाई के राशि वितरण का कार्य किया गया है। अगर समूह की बात करे तो प्रत्येक समितियों मे कम से कम पांच स्वसहायता समूह है किसी किसी समितियों में समूहों की संख्या 10 से भी अधिक है। प्रत्येक समूह मे 10 सदस्य है। नियमतः यह तीन साल का प्रोजेक्ट है।

इसमें 22 समितियों का चयन किया गया है। चयनीत समितियों को एक बार कुसुम वृक्ष की संख्या के अनुसार 16 व 8 किलों ग्राम वितरण किया जाना चाहिए साथ ही लाख के अच्छी पैदावार के लिए कटाई छटाई के लिए प्रति वृक्ष 350 रुपये प्रतिवर्ष दिए जाने का प्रावधान है लेकिन न तो सही मात्रा मे तो लाख बीज वितरण किया गया है और न ही हितग्राहियों को कटाई छटाई के राशि का वितरण किया जाना है।

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