बांदे। नक्सली प्रभावित क्षेत्र बांदे बीएसएफ के 132वीं बटालियन के द्वारा पुरोहित कैंप में एक अगस्त से सात अगस्त तक पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान 132वीं वाहिनी सीमा सुरक्षा बल के अधीन सभी सीओबी जैसे पुरोहित कैंप बांदे, नागलदंड, कुरेनार, पानावर, कन्हारगांव, छोटे बेटिया, मरबेड़ा में एक सप्ताह तक पौधारोपण किया गया। इस दौरान लगभग 16500 विभिन्ना प्रकार के पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में 132वीं बीएसएफ के समादेष्टा धनंजय मिश्रा ने कहा कि दूषित वातावरण से मुक्ति पाने के लिए पौधारोपण ही एक मात्र उपाय है।

हर क्षेत्र में पेड़ पौधों की अंधाधुंध कटाई ने मानव जीवन को खतरे में डाल दिया है और तरह-तरह की बीमारियों को जन्म दे दिया है। पौधारोपण के पीछे का कारण ज्यादातर वनों को बढ़ावा देना, भूनिर्माण और भूमि सुधार है। पृथ्वी पर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए वन हमारे जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस कार्यक्रम के दौरान 132वीं वाहिनी सीमा सुरक्षा बल, डाक्टर रोहित कुमार, सीएमओ, गुरदीप लाल, दुतीय कमान अधिकारी,ब्रिज मोहन जोशी, उप समादेस्ता नीरज कुमार, डंडपाल, एसएम अनुज कुमार, निरीक्षक मुकेश कुमार मीणा, सभी सीओबी के गुलमपति और जवानों ने मिलकर हिस्सा लिया और कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया।

उत्पादन बढ़ाने कतार बोनी का प्रदर्शन

कृषि विज्ञान केंद्र कांकेर एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के फार्म मशीनरी एवं पावर इंजीनियरिंग विभाग के विज्ञानी डा. नरेंद्र हरिदास तायड़े, फार्म मशीनरी एवं पावर के मार्गदर्शन में लघु धान्य फसलों के उत्पादन बढ़ाने के लिए दुर्गूकोंदल विकासखंड के ग्राम घोटुलमुण्डा में रागी फसल का बीज, उर्वरक बुवाई यंत्र, प्लांटर द्वारा कतार बोनी का प्रदर्शन विगत दिनों किया गया।परंपरागत विधि में कृषक मड़िया को छिटकवा विधि से बुवाई करते हैं जिसके कारण कई बार प्रति इकाई क्षेत्र में पौध संख्या पर्याप्त न होने के कारण उपज में कमी आती है।

वहीं दूसरी ओर अधिकांश कृषक इसे रोपाई विधि द्वारा फसल को लगाते हैं, इस विधि में कृषकों को मजदूरी लागत अधिक आती है। इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए बुवाई लागत को कम करने एवं उत्पादन को बढ़ाने के लिए उन्नात किस्म इंदिरा रागी एक की कतार बोनी का प्रदर्शन किया गया। इस विधि से जहां एक ओर 10 से 12 प्रतिशत बीज की बचत होती है, वहीं दूसरी ओर मजदूरी लागत में 15 से 20 प्रतिशत की कमी आती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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