5 कांकेर 17 कैप्शनः परलकोट जलाशय सूखा पड़ाः नईदुनिया

0- निराशाः जलाशय की जलसंचय मात्रा में भारी कमी, किसान अभी से हुए चिंतित

छोटेकापसी। नईदुनिया न्यूज

कांकेर जिले से 120 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ी की गोद में प्राकृतिक सुंदरत से परिपूर्ण रमणीय परलकोट जलाशय किसी जन्नात से कम नहीं है। पखांजूर से 10 किमी दूर उत्तर दिशा में पहाड़ियों से घिरे परलकोट जलाशय एक ऐसा स्थल हैं जिसकी सुंदरता का दीदार करने यहां लोग अक्सर पहुंचते है। हर किसी के दिल में जलाशय के वेस्ट वियर ओवर फ्लो को देखने की चाहत होती है। क्यों कि उस दौरान जलाशय की सुंदरता पर चार चांद लग जाता है क्यों कि मानसूनी मौसम में जलाशय की प्राकृतिक छटा लोक लुभावनी होती है। प्रति वर्ष अच्छी मानसून में अगस्त माह तक जलाशय का जलस्तर बढ़ जाता है रक्षाबंधन पर्व तक जलाशय में ओवर फ्लो की स्थिति निर्मित होती है। अविनाश हलदार, स्वरूप मंडल, उत्तम बाछड़, विष्णु कर्मकार, अमित साहा, ललित ढाली ने कहा कि करीबन एक माह से बारिश नहीं हो रही। आसमान में बदली छायी नजर आती है लेकिन बरसात नहीं होने पर किसान आसमान में टकटकी लगाए मौसम के मेहरबान होने का इंतजार कर रहा है। भीषण गर्मी उमस ने जीना मुहाल तो कर रखा है ऊपर से फसल को पानी की जरूरत है, ऐसे में बरसात नहीं होती है तो हमारा फसल बर्बाद हो जाएगा।

निराश हुए पर्यटक

कांकेर जिले का सबसे बड़ा जलाशय में शुमार परलकोट जलाशय की दीदार करने पहुचे लोग मायूश होकर बेरंग घर लौट आए। राखी का त्यौहार था लोग परलकोट जलाशय में अपने परिवार के साथ पहुंचे थे लेकिन जलाशय में निम्न जलस्तर को देख उनके चेहरे में नाखुशी साफ झलक रही थी। बता दे कि परलकोट अंचल का एक मात्र सौंदर्यता की चादर ओढ़े मनोरमी दृश्य से हृदय को आनंद विभोर कर देने वाला जलाशय इस वर्ष सूखा की मार झेल रहा है। परलकोट जलाशय को लोग खैरकट्टा डेम के नाम से भी जानते है। इस जलाशय में इस वर्ष आज की स्थिति में 25 फीसदी ही पानी जमा हो पाया है।

सूखे की मार जलाशय पर पड़ने से किसान परेशान

विदित हो की अंचल में 55 फीसदी ही धान को रोपाई कार्य सम्भव हो पायी है। परलकोट के किसान एक मात्र कृषि पर निर्भर है। रबी फसल में मक्का और खरीफ फसल पर धान क्षेत्र किसानों द्वारा अधिक मात्रा में उपज की जाती है। पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में पैदावार की श्रेणी में परलकोट अव्वल है। वर्तमान स्थिति में मानसून जून महीने के प्रारंभ में ही दस्तक दे देती है। एक पखवाड़े भर अंचल में जोरदार बारिश होने से किसानों के चेहरे खिले दिखाई दे रहे थे बारिश के आसार को देखकर सभी किसानों ने खरीफ फसल की तैयारी करते हुए कार्य प्रारंभ किया था। वहीं अब दो पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी बरसात का कोई नामोनिशान किसानों को नजर नहीं आ रहा। किसानों के सम्मुख फसल बचाने की चिंता खाई जा रही है। वहीं सूखा पड़ने का खतरा भी मंडरा रहा है किसानों ने फसल बचाने के द्दोहद में वैकल्पिक बंदोबस्त करना भी शुरू कर दिया।

प्रदेश सरकार करे परलकोट जलाशय का जीर्णोद्धार

दंडकारण्य प्रोजेक्ट काल मे तैयार जलाशय आज भी जिले के परलकोट क्षेत्र की सिंचाई के साधन स्त्रोत है। सौंदर्यीकरण की दिशा में भी इस जलाशय में काम किया जाना चाहिए ताकि जलाशय की सुंदरता पर चार चांद लगे लोग मनोरम दृश्य से वशीभूत हो। समय-समय पर सैलानियों की सुविधा के लिए लोगों द्वारा हैंडपंप की मांग की जाती रही है। बरसात से बचने जलाशय के बाइपास स्टेपिंग के दोनों और शेड की व्यवस्था के अलावा बच्चों के खेलने कूदने के लिए पार्क बनाए जाने की मांग की जाती रही है, पर किसी ने ओर ध्यान नहीं दिया। जलाशय के ख्याति सुनकर परलकोट जलाशय का विहंगम दृश्य देखने के लिए पहुंच तो रहे हैं पर जलाशय की रौनकता से भारी कमी आने से भव्यता पर प्रश्नचिन्ह लगता नजर आ रहा है। सैलानियों ने इस स्थल के जीर्णोउद्दार की मांग की है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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