अंतागढ़। खनन प्रभावित क्षेत्र के युवाओं के भविष्य को उज्ज्वल बनाने प्रशासन द्वारा कौशल उन्नायन कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके तहत युवकों को बैकोलोडर संचालन व सिक्युरिटी गार्ड जैसे कार्यों का प्रशिक्षण 10 अगस्त से दिया जा रहा है। यहां पहले 100 युवक-युवतियों को दोपहर का खाना दिया जा रहा था, किंतु अब इसे कलेक्टर के निर्देश पर बंद कर दिया गया। दोपहर का खाना बंद करने की वजह डीएमएफ मद में कमी होना और इस ट्रेनिंग में खर्च अधिक आना बताया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक मिनिरल फंड के विषय में देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2015 में स्पष्ट आदेश दिया है कि डीएमएफ मद का उपयोग सिर्फ खनन प्रभावित क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों के स्वास्थ्य शिक्षा व जीवन को बेहतर बनाने में ही किया जाए, किंतु रायपुर के एनजीओ द्वारा दिए जा रहे करोड़ों के प्रशिक्षण में आदिवासी क्षेत्र से आने वाले बच्चों के खाने में कटौती करना लोगों की समझ से परे है।

इस प्रशिक्षण में चारगांव माइंस, हाहालदी, कच्चे, जैसी जगहों से युवक व युवतियां आती है, जिनके लिए प्रशासन ने गाड़ियों की व्यवस्था की हुई है। सुबह नौ बजे प्रशिक्षण प्रारंभ हो जाता है, ऐसे दूरस्थ अंचल से बच्चों द्वारा लंच बाक्स लेकर आने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम सरण्डी तक गाड़ी इन्हें लेने जाती है, किंतु ग्राम एडानार से आने वाली सुखबती को पैदल गाड़ी तक आने में करीब नौ किमी तय करना पड़ता है, जिसके बाद वे अगर दोपहर का खाना अपने साथ लाना चाहे तो उन्हें काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। इस प्रशिक्षण में आने वाली कई युवतियां गुरुवार को दोपहर खाली पेट रहना पड़ा, क्योंकि अचानक इन्हें बताया गया कि नए बेच में प्रक्षिक्षण लेने वालों को अब दोपहर का खाना नही दिया जाएगा।

ज्यादा आ रहा था बजटः कलेक्टर

इस विषय पर कलेक्टर चंदन कुमार का कहना है कि डीएमएफ मद में पैसे की कमी है और इस प्रशिक्षण का बजट काफी ज्यादा आ रहा है। इसलिए बच्चों को घर से खाना लाने कहा गया है। इस विषय पर आम आदमी पार्टी के संत सलाम का कहना है, डिस्ट्रिक मिनिरल फंड से अगर खनन प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को एक समय का भोजन जिला प्रशासन नहीं कर सकता तो यह सोचनीय विषय है, जबकि इसी क्षेत्र से करोड़ों रुपये की रायल्टी सरकार को दी जाती है। इस ट्रेनिंग का संचालन करा रहे पूर्व सैनिक भीखम साहू ने कहा कि बच्चों को यूनिफार्म भी नहीं दिया गया है ऐसे में विशेषकर लड़कियों को सेक्युरिटी गार्ड की ट्रेनिंग देने में मुश्किल होगी, साथ ही कई बच्चे दोपहर तीन को भूखे रहते हैं ऐसे में वो इस ट्रेनिंग में क्या सीखेंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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