भानुप्रतापपुर। पखांजूर तहसील अंतर्गत ग्राम मेटाबोदेली में संचालित मेसर्स जायसवाल निको इंडस्ट्रीज लिमिटेड की क्षमता को 0.05 मिलियन टन प्रतिवर्ष से 1.0 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक बढ़ाने के लिए पर्यावरण स्वीकृति के लिए ग्राम चार गांव में बुधवार को जन सुनवाई हुई।

जिसमें कंपनी की वादाखिलाफी के चलते उन्हें ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। बीच में विवाद की स्थिति भी बनी, लेकिन पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों को समझाकर शांत किया।

पर्यावरण संरक्षण मंडल जगदलपुर के द्वारा जनसुनवाई में जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीण पहुंचे। जहां माइंस को अतिरिक्त जमीन देने का विरोध ग्रामीणों ने किया। युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज वाधवानी, जनपद सदस्य हेमंत धु्रव, कृष्णा देहारी, सोएब अहमद एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने मांइस द्वारा उत्खनन क्षेत्र में दी जाने वाली सुविधाओं पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि मेसर्स जायसवाल निको इंडस्ट्रीज लिमिटेड (मेटाबोदेली आयरन ओर माईन) द्वारा 2001 से क्षेत्र में उत्खनन कार्य किया जा रहा है पर अब तक यहां पर आवागमन के लिए एक सड़क भी नहीं बनाई गई है।

पीएमजीएसवाय विभाग द्वारा सड़क का निर्माण किया गया था जिसमें भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित है पर माइंस की गाड़ियां उसी सड़क से आवागमन करती हैं जिससे वह सड़क भी खराब हो गई है। वहीं स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार एवं पेयजल की सुविधा भी गांव में मांइस प्रबंधन द्वारा नहीं दी गई है।

नौकरी मिली ना मुआवजा

जनसुनवाई में उपस्थित किसान एवं मजदूर सियाराम रामटेके, भूनेश देहारी, धरसूराम, विनोद, बजारुराम, कार्तिक प्रताप सिंह कुलदीप एवं अन्य ने कहा कि कंपनी द्वारा स्थानीय बेरोजगारों को नौकरी देने का वादा किया था पर कुछ ही लोगों को रोजगार दिया गया।

जबकि कई शिक्षित बेरोजगार अब भी काम की तलाश में भटक रहे हैं। स्थानीय लोगों को कार्य न देकर बाहरी लोगों को कार्य में रखा गया है जो गलत है। माइंस खोलने के पहले कंपनी द्वारा लोक लुभावने वादे किए जाते हैं पर खनिज का दोहन शुरु करने के बाद वह वादों को पूरा करना भूल जाती है। माइंस क्षेत्र में जितने भी किसानों की जमीन आ रही थी सभी को मुआवजा देने की बात कही गई थी पर ना मुआवजा मिला और ना ही नौकरी।

गंदे पानी से हो रही फसल खराब

ग्रामीणों ने कहा माइंस से निकलने वाले गंदे पानी से जिनकी फसलें खराब हो रही है उन्हें भी मुआवजा देने के साथ गंदे पानी को खेतों में जाने से रोकने की बात कही गई थी। पर अब तक इस ओर माइंस प्रबंधन द्वारा ध्यान नहीं दिया गया।

शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क बिजली की भी समस्या है जिसे दूर करने का वादा कंपनी ने किया था जिसे भी पूरा नहीं किया गया। गांव में आवागमन के लिए एक सड़क भी नहीं बनाई। कंपनी द्वारा पहले क्षेत्र का विकास कार्य किया जाए उसके बाद खनिज का दोहन।

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