अंतागढ़ (नईदुनिया न्यूज)। कोरोना संकमण के मामले देश मे लगातार बढ़ रहे हैं। देश सहित प्रदेश की सरकारें भी कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए नई दिशा-निर्देश जारी कर रही है। प्रशासन कोरोना टेस्ट को ज्यादा से ज्यादा कराने का निर्देश दे रहा है किंतु क्षेत्र में चल रहे अवैध पैथालाजी लैब कही न कही कोरोना टेस्ट को प्रभावित कर रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के बीच सरकारी अस्पतालों एवं इन अवैध संचालित लैबों को लेकर बहुत भ्रांतियां हैं। जैसे प्राइवेट लैब में मलेरिया व टाइफाइड निकलता है जबकि सरकारी अस्पतालों में नहीं निकलता या सरकारी अस्पतालों में कोरोना पाजिटिव आता हैं। यही वजह है कि ग्रामीण निजी पैथालाजी लैब में जाकर टेस्ट कराना सही समझने लगे हैं।

सर्दी, खांसी एवं बुखार के लक्षणों में कोरोना टेस्ट कराना जरूरी है, पर ग्रामीणों द्वारा इन लक्षणों के होने पर प्राइवेट पैथालाजी लैब जाकर मलेरिया एवं टाइफाइड का टेस्ट कराया जा रहा है। इन निजी पैथालाजी लैब में कोरोना का टेस्ट नहीं होना और सरकारी अस्पतालों में ऐसे मामलों का नहीं पहुंचना कही न कही कोरोना के मामलों को बढ़ा सकता है जो चिंता का विषय है।

बता दें वर्ष 2018 में जिला प्रशासन एवं जिला चिकित्सा अधिकारी द्वारा अंतागढ़ क्षेत्र में चल रहे अवैध व बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित किए जा रहे पैथालाजी लैब एवं निजी दवाखानों पर कार्रवाई करते हुए इन्हें सील किया गया था। जिन्हें बाद में इन संचालकों द्वारा शपथ पत्र में दोबारा इन लैब का संचालन नहीं किए जाने के बात कहने पर प्रशासन ने सामान निकालने की अनुमति दी थी, किंतु कुछ महीने बाद पैथालाजी लैब एवं निजी क्लिनिक वापस उसी स्थान में संचालित किए जाने लगे।

क्षेत्र में चल रहे इन अवैध पैथालाजी लैबों पर प्रशासन द्वारा दोबारा कार्रवाई नहीं करना इन लैब संचालकों के हौसले और बढ़ा रहा है। क्षेत्र में लगातार ऐसे लैबों की संख्या बढ़ रही है। लैब टेक्नीशियन के साधारण कोर्स कर लोगों द्वारा लैब खोल कर लोगों के स्वास्थ से खिलवाड़ करने भी गंभीर मामला है।

आल इंडिया मेडिकल काउंसलिंग द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भी दिशा-निर्देश जारी की है कि बिना पैथालाजिस्ट डिग्री के कोई भी लैब संचालित नही कर सकता। जिस लैब में पैथालाजिस्ट बैठा हो उसे ही रिपोर्ट देने और लैब संचालन का अधिकार होगा। उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार रिपोर्ट में साइन करने के लिए पैथालाजिस्ट का लैब में होना जरूरी है। केवल डिजिटल साइन से रिपोर्ट मान्य नहीं है। एमबीबीएस या दूसरे विषयों से एमडी लैब संचालित नहीं कर सकते। लैब टेक्नीशियन जांच रिपोर्ट नहीं बना सकते। किंतु क्षेत्र में चल रहे अवैध पैथालाजी लैब इन सभी दिशा-निर्देशों का खुले आम उल्लंघन कर रहे है।

क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पैथालाजी लैब का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है, जबकि अंतागढ़ ब्लाक में एक भी रजिस्टर्ड पैथालाजी लैब रजिस्टर्ड नहीं है। फिर भी कोरोना जैसी महामारी में जबकि इनके द्वारा कोरोना टेस्ट को प्रभावित किया जा रहा है, उनका खुलेआम संचालन जिला स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन के कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है।

कोरोना जांच में इन अवैध लैबों द्वारा पड़ रहे प्रभाव पर ब्लाक के चिकित्सा अधिकारी डा. संभाकर ने बताया कि कोरोना के लक्षणों वाले मरीज स्वास्थ्य केंद्र न जाकर निजी लैब में जाकर सामान्य टेस्ट करा रहे हैं। जिसकी वजह से हम तक सही जानकारी इन संक्रमितों की नहीं आ रही है। लोग सामान्य मलेरिया या टाइफाइड का टेस्ट कराकर दवा निजी अस्पतालों से ले लेते हैं। इन निजी लैब में कोरोना टेस्ट नहीं किया जाता है और न ही ऐसे लक्षणों वाले मरीजों की जानकारी हमें दी जाती है। ऐसे में कोरोना के मामले बढ़ने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

इस विषय पर मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी जेएल उइके ने कहा कि क्षेत्र में कोई भी पैथालाजी लैब मान्यता प्राप्त नहीं है। सभी लैब अवैध हैं। पहले कार्रवाई की गई थी पर पुनः इनके द्वारा संचालन किए जाने की जानकारी नहीं थी। इन अवैध पैथालाजी लैब संचालकों पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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