बड़गांव (नईदुनिया न्यूज)। क्षेत्र में धान खरीदी जोर पकड़ने लगी है। सभी केंद्रों में धान की आवक बढ़ी है। विगत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष किसानों की संख्या बढ़ी है पर गिरदावरी में रकबा कम होने जाने के कारण विगत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष पखांजूर तहसील में 1.40 क्विंटल धान की कम खरीदी होगी। प्रशासन द्वारा की गई गिरदावरी में बड़ी संख्या में ऐसे भूमि मिली, जिसमें वर्षों से तालाब खोद कर मछली पालन हो रहा था पर वहीं किसान इस भूमि में हर वर्ष धान का पंजीयन करा कर अपनी धान बेच हर वर्ष शासन को लाखों का चूना लगा रहे थे।

शासन द्वारा गिरदावरी में बरती गई क़ड़ाई के परिणाम सामने आने लगे है। गिरदावरी के दौरान जिले के प्रभारी सचिव से लेकर कलेक्टर तक ने खेतों की मेढ़ नापी थी। इसका परिणाम यह हुआ की अधिकारियों के मौके में जाने के चलते पटवारियों ने भी खेतों में पहुंच गिरदावरी की और जिन खेतों में वर्षों से धान की खेती नहीं हो रही थी पर धान बिक रही थी उन खेतों से फर्जी रकबा कम हुआ और महज पखांजूर तहसील में ही 37 सौ हेक्टेयर फर्जी रकबा कम हो गया।

इस दौरान कई एसे किसानों से पटवारियों का सामना हुआ जो मक्का लगा धान बेच रहे थे, तो कई किसानों ने तालाब बना लिया था। कोई अपने खेत में नीलगीरी की खेती कर रहे था पर हर वर्ष उस खेत में धान बेचता था। वर्षों से शासन को इस तहर धान का फर्जी रकबा दिखा धान बेच कई करोड़ों का चूना लगा रहे थे। सटीक गिरदावरी का असर यह रहा कि इस वर्ष धान के रकबे में 3744 हेक्टेयर की कमी आई है। इसके चलते पखांजूर तहसील में इस वर्ष 1.40 लाख क्विंटल धान की कम खरीदी होगी? जिससे शासन का हर वर्ष करीब 30 करोड़ रुपये बचेंगे।

क्षेत्र में धान उत्पादन में भी नंबर एक है तो मछली उत्पादन में भी नंबर एक है। क्षेत्र में जिन खेतों में मछली पाली जा रही थी उन खेतों में धान भी बेची जा रही थी। हर वर्ष नील कांति योजना के तहत सैकड़ों तालाब शासन के द्वारा खोदे जा रहे थे इसके अलावा रोजगार गारंटी योजना से निजी डबरी और लोग स्वयं के पैसे से भी निजी तालाब का खनन करा रहे थे। यह सिलसिला विगत सात वर्ष से चल रहा था पर इन तालाबों का रकबा कम होने का नाम नहीं ले रहा था जिसके चलते क्षेत्र में धान खरीदी में फर्जीवाड़ा बढ़ता जा रहा था पर शासन ने इस वर्ष कड़ाई से गिरदावरी कराई तो इस फर्जीवाड़े में रोक लग गई है।

गिरदावरी के सटीक होने के बाद से धान खरीदी केंद्र को ले लेने वालों का उत्साह भी कम हो गया है पूर्व में धान फड़ लेने के लिए लोगों की होड़ लगी रहती थी पर इस वर्ष ऐसेबेड़ा ग्राम पीवी 15 जैसे धान खरीदी केंद्र के लिए आवेदन ही नहीं आए। हर वर्ष धान खरीदी करने वाले इसी तरह के फर्जी रकबा में अपनी धान खपा काफी पैसे कमाया करते थे पर इस वर्ष कम हुए रकबा ने उनका उत्साह भी कम कर दिया है।

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गड़बड़ी में कमी आएगीः धनंजय

पखांजूर एसडीएम धनंजय नेताम ने बताया कि पखांजूर तहसील में रकबा कम होने का बड़ा कराण वर्षों से कई किसानों द्वारा खेतों में तालाब बना, प्लांटेशन लगा, मक्का लगाया जाता था पर वहीं किसान धान का पंजीयन करा धान बेचते थे। इस वर्ष ऐसे किसानों की पहचान कर उनका रकबा काटा गया है। जिस कारण रकबे में भारी कमी आई है। इसका परिणाम यह होगा की धान खरीदी के दौरान गड़बड़ी में भी कमी आएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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