भानुप्रतापपुर। अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों के द्वारा ही पलटी मार देने के कारण जनपद पंचायत भानुप्रतापपुर में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। 14 में से 14 मत अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ पड़े।

विदित हो कि जनपद पंचायत भानुप्रतापपुर में कांग्रेस समर्थित जनपद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष काबिज हैं। जनपद पंचायत चुनाव में कांग्रेस समर्थित आठ, भाजपा समर्थित पांच व आम आदमी पार्टी समर्थित एक सदस्य चुन कर आए थे। जिसके बाद कांग्रेस ने बेहद आसानी से अध्यक्ष पद के लिए ब्रिजबती मरकाम व उपाध्यक्ष पद के लिए सुनाराम तेता को पदस्थ करा लिया था। परंतु लगभग ढाई साल के कार्यकाल के बाद पिछले दिनों कुछ जनपद सदस्यों ने नाराजगी जाहिर की औऱ फिर इन दोनों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, जिसके बाद सोमवार को जनपद पंचायत के सभागृह में फ्लोर टेस्ट हुआ। मतदान के पूर्व अध्यक्ष ब्रिजबति मरकाम और उपाध्यक्ष सुनाराम तेता ने अपनी बात रखी। दोनों ने कहा कि हमने सतत सभी सदस्यों को सम्मान दिया है, साथ लेकर चला है और उनकी सलाहों को भी पूरी तरजीह दी गई है। इसके बाद भी यदि कोई नाराजगी है, तो आपसी संवाद से इसे दूर किया जा सकता है।

इसके बाद भाजपा समर्थित जनपद सदस्य जीवराखन सलाम ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अध्यक्ष उपाध्यक्ष के द्वारा लगातार हमारी उपेक्षा की जाती रही है। इसी कारण सदस्यों में नाराजगी व्याप्त है। इसके बाद मतदान हुआ और जब मतों की गणना की गई तो नतीजे बेहद चौंकाने वाले निकले। आश्चर्यजनक तरीके से पूरे 14 में से 14 वोट अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के पक्ष में पड़े। बताया जा रहा है कि कुछ कांग्रेसी जनपद सदस्य ही अध्यक्ष व उपाध्यक्ष से नाराज थे, और उन्हीं के द्वारा अविश्वास प्रस्ताव जैसा कदम उठाया गया था। उन्ही की पहल पर भाजपा के जनपद सदस्य भी अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में खड़े हो गए थे। परंतु बाद में कांग्रेस एक्शन में आई और नाराज जनपद सदस्यों से संपर्क कर उन्हें मना लिया गया। बाजी हाथ से निकलती देख भाजपाई जनपद सदस्य जो अविश्वास प्रस्ताव का पक्ष ले रहे थे, वह भी हालात भांपते हुए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का साथ देने पर मजबूर हो गए। इस तरह अविश्वास प्रस्ताव शून्य मत के साथ खारिज हुआ और अध्यक्ष व उपाध्यक्ष अपनी कुर्सी आसानी से बचा ले गए।

जितेंद्र यादव ने भानुप्रतापपुर में निभाई अंतिम जिम्मेदारी

अनुविभागीय अधिकारी राजस्व जीतेन्द्र यादव ने अपने स्थानांतरण के बाद भानुप्रतापपुर में अपने कार्यकाल के अंतिम दिन इस अविश्वास प्रस्ताव के मतदान में पीठासीन अधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई। तहसीलदार सुरेन्द्र उर्वशा एवं प्रशासनिक अमले ने उनका सहयोग किया।

सबको साथ लेकर चलना प्राथमिकता

परिणाम के पश्चात अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने संयुक्त रूप से कहा कि यह वस्तुतः भाजपा की साजिश थी, जो कि नाकाम रही। मुख्य चुनाव में तो हमें आठ वोट मिले थे, परन्तु इस बार पूरे के पूरे 14 मत मिले हैं। जिसके लिए हम लोग सभी जनपद सदस्यों को धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। बचे हुए कार्यकाल में सारे जनपद सदस्यों को साथ लेकर चलने की बात दोनों ने कही।

Posted By: Nai Dunia News Network

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