अंतागढ़। बस्तर संभाग व देश के अन्य क्लस्टर क्षेत्रों में कुपोषण की संख्या को कम करने केंद्र सरकार ने पीडीएस द्वारा दिए जा रहे चावल में प्रति क्विंटल चावल में तीन किलोग्राम फोर्टिफाइड चावल जो कि कृत्रिम तौर पर तैयार किया जाता है, जिसमे प्रत्एक 100 ग्राम चावल में आयरन 4.25 मिलीग्राम फोलिक एसिड 12.5 मिलीग्राम एवं विटामिन बी-12 0.125 ग्राम मिलाया जाता है ,जिससे कुपोषित लोगों एवं बच्चों को पोषक आहार दिया जाए। किंतु ग्रामीण व नगरीय क्षेत्र में रहने वाले जानकारी के अभाव में इस चावल को प्लास्टिक चावल बताकर शिकायत कर रहे हैं।

लोगों का कहना है यह चावल पकाने से पकता नहीं। साथ ही इसे जलाने से प्लास्टिक जैसी प्रतिक्रिया होती है जो कि अन्य चावलों में नहीं होती. लोगों का कहना है सरकार लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है, इसलिए प्लास्टिक चावल उनको दिया जा रहा है। अंतागढ के श्याम नगर के कुछ घरों में लैंपस से चावल ले जाया गया किंतु जब चावल की छंटाई की गई तो उसमें कुछ अजीब से दिखने वाले चावल नजर आए, जिसके बाद मामला बढने लगा, लोग एक के बाद एक चावल की शिकायत करने अपने घरों से बाहर आने लगे।

वहीं, पूर्व विधायक भोजराज नाग भी श्यामनगर आ गए, जब इस विषय में फ़ूड इंस्पेक्टर से बात की गई तो उन्होंने इस चावल के बारे में जानकारी दी, किंतु जब लोगों को इस चावल की सच्चाई के बारे में बताया गया तो उनका कहना था अगर सरकार ऐसी कोई योजना चला रही है तो लोगों को इस विषय में जानकारी देनी चाहिए।

जानकारी के अभाव में लोग पीडीएस का चावल खाना बंद कर रहे हैं। लोगों का कहना भी जायज है, जब सरकार लोगों के कुपोषण हटाने ऐसा कोई प्रयास कर रही है जो सराहनीय कार्य है, किंतु प्रशासन द्वारा लोगों इस विषय मे अभियान चलाकर जागरूक करने की रूरत है ताकि लोग फोर्टिफाइड चावल के गुणों को समझ सके और उसका उपयोग करना शुरू करें।

बेपरवाह रवैए से लोग असमंजस में थे

फोर्टिफाइड चावल के बारे में इस विषय की जानकारी वाली पर्ची डाली गई है, जिसमें लोगों को बताया जा सके की इस चावल में फोर्टिफाइड चावल का अंश मिलाया गया है जो आपकी सेहत को ध्यान में रखकर मिलाया गया है, किंतु संबन्धित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी की बेपरवाह रवैए की वजह से लोग असमंजस में हैं। इस चावल के संबंध में निर्देश दिया गया है कि इस चावल का उपयोग थैलीसीमिया रोग से ग्रसित व्यक्ति न करें। साथ ही एक साल के भीतर ही इस चावल का इस्तेमाल किया जा सकता है, अब अगर जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों को ही इस विषय में जानकारी नहीं तो वो लोगों को कैसे जानकारी दे सकते हैं। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि केंद्र सरकार की इस महती योजना जिससे कुपोषण के दर को कम किया जा सकता है किंतु सम्बन्धित विभाग के अधिकारी कर्मचारीव प्रशासन का लचर रवैया इस महती योजना पर पलीता लगा रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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