पखांजूर। शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार युद्ध्‌ स्तर पर प्रयासरत है। मगर आपको सुनकर आश्चर्य होगा की अतिसंवेदनशील क्षेत्र कोयलिबेड़ा ब्लाक के ग्राम मोहला में शासकीय प्रायमरी और मिडिल स्कूल में कुल तीन शिक्षक संतोष कुमार मर्गेंद्र, लोकेश कुमार साहू, देवलाल अपनी सेवा दे रहे है। जहां पर मीडिल में कुल सात बच्चे तथा प्रायमरी में 16 बच्चे अध्यनरत हैं यह स्कूल विगत कई वर्षों से संचालित हैं मगर आज तक सरकारी खाते में यह स्कूल का नाम दर्ज नहीं हैं क्योंकि प्रत्येक स्कूलों का यू-डाईस कोड रहता हैं जिससे उसकी पहचान की जाती हैं और कई सारे सुविधा स्कूल सहित बच्चों को मिलती हैं।

वहीं शिक्षक बतलाते हैं की मोहला में संचालित स्कूल का कोई कोड नहीं हैं। यह दूसरे स्कूल के भरोसे संचालन हो रहा हैं अगर शासन द्वारा इसका कोड प्राप्त होता तो स्कूल की तरक्की और छात्र को छात्रवृति, जाति, निवास आनलाइन कर पाते यह पढ़ाई कर रहे छात्र को शासन की कोई योजना का लाभ नहीं मिलता। इसके लिए हम कई बार उच्चाधिकारी को बता चुके हैं मगर समस्य का समाधान नहीं हुआ गांव के ग्रामीण, हिर्गुराम और स्कूल के चपराशी इमानसाय तारम कहते हैं यह बच्चे खली स्कूल आते हैं और चले जाते हैं इनको शासन का कोई लाभ प्राप्त नहीं होता।

यहां तक की मध्याह्न भोजन का चावल, दाल, सब्जी छिन्टोला स्कूल से मांग कर बच्चों को भोजन करवाते हैं, स्कूली बच्चे जमीन पर बैठकर पड़ते हैं उनके लिए ना तो कुर्शी हैं ना बेंच अगर आलम ऐसा रहा तो सुदूर अंचलो के बच्चे कैसे पढ़-लिख कर आगे बढेंगे इस समस्य को गंभीरता से लेकर शासन को सभी चीजों का व्यवस्था करना चाहिए। हालांकि इसे लेकर स्थानिय अधिकारी बीईओ गंभीर नहीं है जब भी ऐसे ज्वलंत सील समस्याओं को लेकर बीईओ को फोन किया जाता है तो वहां मीडिया साथी का फोन नहीं उठाते ऐसे में सुदूर अंचल में पढ़ रहे बच्चों की भविष्य को लेकर अधिकारी-कर्मचारी सजग नहीं है।

प्रस्ताव भेजा गया है शाला के उन्नायन केलिए यहां दिल्ली से कोड जारी होता है स्कूल मे पढ़ रहे सभी बच्चों को शासकीय योजना का लाभ अन्य स्कूल के माध्यम से मिल रहा है बहुत जल्द ही उन्हें अपने निजी स्कूल में सभी सुविधाएं मिलने लगेगी।

- ओमप्रकाश मीरे, जिला शिक्षा अधिकारी ।

Posted By: Nai Dunia News Network

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