0- सशर्त इजाजत यात्री बसों में निर्धारित क्षमता से कम संख्या में सवारी बैठाकर चलाने की दी है अनुमति

खास बातें-

0- प्राइवेट वाहनों में यात्रा करना पड़ रहा महंगा

0- 53 दिनों से बस स्टैंड में पसरा है सन्नाटा

कांकेर। नईदुनिया प्रतिनिधि

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते सभी सभी प्रकार के पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। लॉकडॉउन 3.0 के दौरान कई छूट दी गई। इसमें यात्री बसों को बसों में निर्धारित क्षमता से कम संख्या में सवारी बैठाकर चलाने की अनुमति दी गई है, लेकिन नियम व शर्तों के चलते बसों के संचालन में होने वाले नुकसान को देखते हुए बसों का संचालन नहीं किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर विभिन्न स्थानों पर फंसे लोग अपने घर पहुंचने के लिए या तो पैदल ही निकल रहे हैं, या फिर निजी वाहनों का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में निजी वाहनों की सवारी करना लोगों के जेब पर भारी पड़ रहा है।

लॉकडॉउन में हवाई यात्रा व रेल यात्रा के साथ-साथ बसों व टैक्सियों के संचालन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। लॉकडाउन 1.0 व 2.0 के दौरान इस पर पूर्ण प्रतिबंध रहा, लेकिन इसके बाद लोगों को आने जाने की छूट के साथ-साथ निर्धारित नियमों के पालन के साथ बसों के संचालन की अनुमति भी दी गई है। बस ऑपरेटरों की माने तो निर्धारित नियमों के तहत बसों का संचालन संभव नहीं हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। इसके चलते ही बसों का संचालन अब भी शुरू नहीं हो सका है। शहर के नए बस स्टैंड में जहां हर समय चहल-पहल हुआ करती थी। वहां अब सन्नाटा पसरा रहता है।

शहर के बरदेभाटा निवासी गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें अपने निजी कार्य से धमतरी जाना था, लेकिन बसों का संचालन बंद होने के कारण उन्हें किराए पर कार लेनी पड़ी। इससे उनका खर्च काफी बढ़ गया। उन्होंने बताया कि लंबी दूरी का सफर करने वालों के लिए यात्रा और भी महंगी हो गई है। बस स्टैंड में होटल संचालित करने वाले उदय शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से ही बसों का संचालन बंद है। लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद रोजना सुबह कई यात्री पहुंचते हैं, जो बसों के संचालन के संबंध में पूछताछ करते हैं, लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि बसों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। वे निराश होकर लौट जाते हैं।

आधी सवारी के साथ बस चलाना असंभव

मुस्कान ट्रेवर्ल्स के संचालक राजू खटवानी ने बताया कि वर्तमान शर्तों में निर्धारित क्षमता से आधी सवारी के साथ बसों का संचालन करना संभव नहीं है। इस प्रकार बसों के संचालन से बस चालक, अन्य कर्मचारियों व डीजल की राशि भी बस ऑपरेटर को अपने जेब से भरनी पड़ेगी। वर्तमान में दो माह से बसें बंद होने से बस ऑपरेटरों को काफी नुकसान हुआ है। प्रदेश सरकार द्वारा यात्री बसों का दो माह का टेक्स माफ करने की घोषणाा की गई है, जिससे कुछ राहत मिली है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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