बांदे (नईदुनिया प्रतिनिधि)। वर्षों पूर्व 20 से 25 एकड़ में लगाए गए पौधे जब वृक्ष बनकर खड़े हुए तब उन्हें काट दिया गया। अधिकारिक रूप से अब भी वहां जंगल है जबकि यथार्थ में वहां केवल समतल क्षेत्र ही दिखता है। यहां अब ग्रामीण घर बनाकर रहने लगे हैं। वर्षों से वृक्षों के कटने पर मौन बैठे वन अधिकारी अब इन ग्रामीणों पर कार्रवाई करने पर तुले हुए हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि वन विभाग के कर्मचारी ने इस प्लांट में बड़े-बड़े पेड़ पौधे को काटकर 20 से 25 एकड़ निकालकर धान लगा रहे है, लेकिन संबंधित विभाग अपने कर्मचारियों ऊपर आज तक कोई कार्रवाई किया है और न उसे हटाया हटाया। वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा पिछले दो सालों से जंगल काटा जाता रहा। बड़े-बड़े पेड़ोें की बलि चढ़ा दी गई। उच्च अधिकारी खामोशी से देखते रहे। विभाग के कर्मचारी होने का फायदा उठाते हुए मनमानी तरीके से 20-25 एकड़ जमीन निकल लिया। वहीं जब पड़ोसी गांव के लोग घर के लिए रातों रात जंगल मेें टेंट लगाकर बैठ गए तो वन विभाग कार्रवाई करने पहुंच जाता है।

कर्मचारी पर मेहरबान, गरीबों पर कार्रवाई

विभाग की दोहरी चरित्र सामने आ गया है। ग्रामीणों ने बताया कि हमारे पास तो घर बनाने के लिए जमीन नहीं है, हम यहां से नहीं हटेंगे चाहे हमारी जान क्यों न देनी पड़े। वन विभाग के दिखाए रास्ते पर अतिक्रमण कर दिया तो विभाग की नजर में आ गए। वहीं उन्ही के विभाग के कर्मचारी अपना पद का फायदा उठाते हुए वनों को उजाड़ दिया और उसमें धान का फसल भी कर रहे हैं।

सिर पर छत नहीं है: मंडावी

इस मामले पर कब्जा करने वाली महिला सोनी मंडावी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि न तो मेरे पास रहने के लिए घर है ना ही कमाने के लिए जमीन मेरे तीन बेटे है जिनको रखने के लिए छत तक नहीं है। जब वन विभाग के कर्मचारी बड़े बड़े पेड़ काटकर धान लगाने के लिए जमीन निकल सकते है तो हम यह रह नहीं सकते। इसीलिए हमने ये घर बनाना शुरू किया।

करेंगे कार्रवाईः रेंजर

इस विषय पर रेंजर सीएच भंडारी ने कहा कि हमने आज कब्जा करने वाले लोगों को समझाइश दी है और थाने में भी सूचना दी है। कब्जा करने वालों को कल एक बार फिर समझना है अगर उनके द्वारा कब्जा हटाया नहीं गया तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उनके सभी सामनों को जब्त किया जाएगा और वन विभाग के जमीन पर बने घर को तोड़कर सभी सामनों को वन विभाग द्वारा जप्त कर लिया जाएगा।

Posted By: Pramod Sahu

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close