अंतागढ़। आजादी के 75 साल बाद आखिर अंतागढ़ क्षेत्र के लोगों को आज से रेल सुविधा मिलने जा रही है, एक और जहां भारत देश में जहां आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। वहीं अंतागढ़ क्षेत्र में आज से रेल सुविधा का मिलना आजादी के अमृत महोत्सव में और चार चांद लगा रही है। रावघाट परियोजना और रेल लाइन के विस्तार की कहानी काफी लंबी है, कई पीढ़ियां रेल लाइन और रावघाट परियोजना के शुरू होने के इंतजार में गुजर गईं, पर अब दशकों के इंतजार के बाद लोगों का सपना पूरा होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क निकालने में रावघाट परियोजना पर संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे थे। भिलाई स्पात संयंत्र को जिंदा रखने के लिए रावघाट परियोजना का शुरू होना अत्यंत आवश्यक है।

लौह अयस्क परिवहन करने केलिए रेल पात रावघाट तक बिछाना एक बड़ी चुनौती थी, जिसके रास्ते में आ रहे पेड़ों की कटाई के लिए कोई सामने नहीं आ रहा है। इस रेल परियोजना के लिए लगभग तीन लाख पेड़ काटे जाने थे। पेड़ों की कटाई के लिए कई बार निविदा निकालनी पड़ी। वहीं परियोजना का विरोध कर रहे माओवादियों का कहना है था की सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के नाम पर सरकार रावघाट के लौह अयस्क को निजी कंपनियों को सौंपना चाहती है। वहीं कई सामाजिक कार्यकर्ता इस परियोजना में क़ानून की अनदेखी का भी आरोप लगाते रहे हैं, नक्सलियों के विरोध की वजह से केंद्र सरकार ने क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती की जिसमे बीएसएफ, एसएसबी, सीआरपीएफ जैसे सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभालकर अंततः रेल परियोजना को साकार रूप देने में दिन रात एक कर दिया और लोगों के सपनो को साकार करने में अपनी विशेष भूमिका निभाई।

उत्तर बस्तर के कांकेर और नारायणपुर लिे में स्थित रावघाट की पहाड़ियों में लौह अयस्क के छह ब्लाक हैं, जिनमें 712.48 मिलियन टन लौह अयस्क होने का अनुमान है। भारत सरकार के उपक्रम स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी सेल के भिलाई इस्पात संयंत्र ने पहली बार 30 अगस्त, 1983 को रावघाट की लौह अयस्क की खदानों के लिए भारत सरकार को आवेदन दिया था. लेकिन अलग-अलग कारणों से यह आवेदन रद्द होता रहा। लेकिन दशकों के इंतजार के बाद ही सही रावघाट परियोजना और रेल सुविधा क्षेत्र के लोगों को मिलने जा रही है तो अब बीते समय को लोग याद नही करना चाहते की उनकी कितनी पीढ़ी इस पल के इंतजार में गुर गई, अंत भला तो सब भला।

Posted By:

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close