दुर्गूकोंदल। नईदुनिया न्यूज

अंचल में इन दिनों महुआ बिनने का कार्य प्रगति पर है। लोग सुबह उठकर महुआ पेड़ों में पहुंच जाते है इसलिए ताकि महुआ पेड़ से गिरा हुआ फूल को मवेशी ना खाएं। अंचल में महुआ एक अतिरिक्त आमदनी का साधन है लोग कच्चा महुआ बिनकर उसे धूप में सुखाते है, तब उसे बाजार में ले जाकर चिल्हार विक्रेताओं को बेचते है और बदले में विक्रेताओं द्वारा पैसा दिया जाता है, जो लोगों का दैनिक जीवन में जरूरतमंद चीजों को खर्च करने के लिए अतिरिक्त आय का साधन बन जाती है।

बाजार में इसकी कीमत वर्तमान में 20 से 30 रूपये चल रही है इन दिनों कोरोना वायरस के चलते लोग सुबह-सुबह अपने अंतराल बनाकर महुआ बिनने का कार्य कर रहे है। विकासखंड के गांव-गांव में चल रहा है जो कि अतिरिक्त आमदनी का साधन है। छत्तीसगढ़ में सभी प्राइवेट व शासकीय स्कूलों में शासन द्वारा 13 मार्च से अनिश्चितकालीन तक छुट्टी घोषित की गई है। 24 मार्च रात्रि 12 बजे से लाकडाउन 21 दिन का जो कि 14 अप्रैल तक चलेगी। जिसमें ग्रामीण सुबह-सुबह अपना महुआ बिनने का कार्य अंचल में कर रहे है।

आप शासन के निर्देश का भी पालन कर रहे है, जिसमें एक मीटर का फासला बनाकर कार्य कर रहे है, वहीं जिसके चलते स्कूली छात्र-छात्राएं अपने घर परिवार में रह रही है वे भी परिवार के सदस्यों के साथ महुआ बीनने में सहयोग दे रही है इस बार महुआ गिरना शुरू हो चुके है, लेकिन मौसम बदलाव के चलते काफी परेशानी हो रही है हम कच्चा महुआ फूल बिन कर लाते है, और उसे सुखाने के लिए तेज धूप की जरूरत पड़ती है लेकिन आए दिन बूंदा बांदी पानी गिरने के वजह से परेशानी झेलनी पड़ती है उन्होंने बताया कि इस वर्ष पिछले वर्ष की अनुसार कम मात्रा में महुआ गिरने की संभावना है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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