स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने कलेक्टर को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा राज्य की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। मुख्यमंत्री का सपना है कि राज्य के सभी बधाों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो। मुख्यमंत्री द्वारा पिछले कुछ दिनों में शिक्षा से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि सभी बड़े शहरों में अंग्रेजी माध्यम के उत्कृष्ट स्कूल आगामी शिक्षा सत्र से प्रारंभ की जाए। उन स्कूलों के लिए कोई न्यूनतम संख्या निर्धारित नहीं की गई है, परंतु अपेक्षा यह है कि ऐसे स्कूल अधिक से अधिक संख्या में हो और प्रत्येक जिले में कम से कम एक ऐसा स्कूल हो। इसे लेकर डीईओ कार्यालय ने नये शिक्षा सत्र जुलाई माह में कवर्धा के नवीन हायर सेकंडरी स्कूल को अंग्रेजी माध्यम का स्कूल बनाने प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्वात के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। मंगलवार को एबीवीपी ने डिप्टी कलेक्टर अरुण सोनवार को ज्ञापन सौंपकर आदेश को वापस लेने की मांग की है। एबीवीपी के प्रवीण वर्मा ने बताया कि इस आदेश को वापस नहीं लेने पर आंदोलन किया जाएगा।

गौरतलब है कि इस स्कूल को अंग्रेजी माध्यम बनाने को लेकर शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। लेकिन इस स्कूल को अंग्रेजी स्कूल बनाए जाने को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है। यहां कक्षा 6वीं से 12वीं तक करीब 900 से अधिक बधो पढ़ाई कर रहें है। ऐसे में इस स्कूल को अंग्रेजी माध्यम का स्कूल बनाया जाएगा तो 920 बधाों को यहां से हटना होगा व उन्हें दूसरा स्कूल में एडमिशन लेना होगा। ऐसे में पालकों ने विरोध शुरू कर दिया है।

सभी प्रकार की सुविधा होने का दावा

आदेश अनुसार इस स्कूल का चयन करने के बाद स्कूल के भवन में सुधार के लिए छोटे-छोटे सिविल कार्य कराए जा सकते हैं। विशेषरूप से शौचालयों को साफ-सुथरा रखने, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों को अच्छा करने के लिए भी सिविल कार्यों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। स्कूल का रंग-रोगन भी कराया जा सकता है। कलेक्टर से कहा गया है कि अनावश्यक सिविल कार्य नहीं कराया जाए, ऐसा कार्य कराया जाए जो मई माह तक पूरे हो जाए। कक्षाओं में अच्छी क्वालिटी का फर्नीचर, प्रयोगशालाओं के लिए आवश्यक उपकरण स्कूल में उपलब्ध कराए जाए। पुस्तकालय में अच्छी क्वालिटी के सेल्फ फर्नीचर तथा सभी विषयों की अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें उपलब्ध हो। पुस्तकालय के साथ एक रीडिंग रूम भी हो और उसमें अंग्रेजी के अखबार तथा मैग्जीन भी रखे जाए। खेल मैदान होने पर उसे अच्छा बनाया जाए। स्कूल की कार्ययोजना में होने वाले व्यय को कनवर्जेंस से पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। इसमें डीएमएफएफ, सीएसआर आदि की राशि का उपयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त नगर पालिक निगम, जन-सहयोग से कुछ कार्य किए जा सकते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network