कवर्धा (नईदुनिया न्यूज)। नईदुनिया में मंगलवार के अंक में जागरूकता की कमी, पराली जला रहे किसान शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया। कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा के निर्देश पर कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह देते हुए मीडिया एडवायजरी जारी की है। कृषि विभाग ने किसानों से आग्रह करते हुए कहा है कि फसल कटाई के बाद खेतों में पड़े अवशेषों को आग से बचाने के लिए कहा है। अवशेषों को खेतों में ही सड़ाकर कम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है। इससे पर्यावरण को प्रदुषण से भी बचाया जा सकता है। भविष्य में लेने वाले फसलों की उत्पादन क्षमता अच्छी होगी।े

कृषि विभाग ने बताया कि खरीफ सीजन की फसल लगभग कटाई हो चुकी है जिसमें मुख्य रूप से धान की फसल है, कटाई, मिसाई के बाद अवशेष खेत अथवा खलीहान में पड़े हुए है, जिसे कृषकों द्वारा जलाया जाता है। फसल अवशेष के जलाने से धुऐं में मौजूद जहरीली गैंसों से न केवल मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, बल्कि जलवायु तथा मृदा स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। मृदा का तापमान बढ़ने से मृदा में उपस्थित लादायक सूक्ष्म जीव, केचुआ, मकड़ी तथा अन्य मित्र कीट की संख्या कम हो जाती है। जिससे भविष्य में लेने वाले फसलों की उत्पादन क्षमता कम हो जाती है।

फसल अवशिष्ट प्रबंधन के उपाय एवं लाभ

फसल कटाई उपरांत खेत में पड़े हुए फसल अवशिष्ट के साथ ही जुताई या इकट्ठा कर गड्ढे में डालकर डी-कम्पोजर के माध्यम से कम्पोस्ट, नाडेप खाद के रूप में परिवर्तित कर खेती में उपयोग करें। रबी फसलों की उपयुक्त कृषि यंत्र जैसे हैप्पी सीडर से बोनी करने से खेत पर बिखरे हुए अवशिष्ट नमी को सुरक्षित रखते हैं। धान के पैरे मशरूम उत्पादन में उपयोग के साथ यूरिया से उपचारित कर पशुओं के लिए सुपाच्य पौष्टिक चारे के रूप में उपयोग करें। फसल अवशिष्ट प्रबंधन हेतु उपयोगी कृषि यंत्र जैसे स्ट्रा रीपर, स्ट्रा बेलर, मल्चर एवं रीपर कम बाइंडर का उपयोग कर फसल अवशिष्ट का प्रभावी ढंग से प्रबंधन कर सकते है।

अवशिष्ट जलाने पर प्रतिबंध

राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में फसल कटाई के पश्चात खेतों में बचे हुए फसल अवशिष्ट को जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण भोपाल द्वारा फसल अवशिष्ट जलाने पर निम्नानुसार अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। दो एकड़ तक कृषकों को राशि 2500 रुपये प्रति घटना, दो से अधिक तथा पांच एकड़ से कम भूमिधारी कृषकों को राशि 5000 रुपये प्रति घटना, पांच एकड़ से अधिक भूमिधारी कृषकों को राशि 15,000 रुपये प्रति घटना दंड का प्रविधान है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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