कवर्धा(नईदुनिया न्यूज)। सर्दी अब विदाई की ओर है। मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। ठंडी-गर्मी के बीच उतार चढ़ाव भी जारी है। मंगलवार को न्यूनतम तापमान 15.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, सोमवार को दिन का अधिकतम तापमान 32 डिग्री के पार पहुंच गया था। मौसम विभाग के मुताबिक अब गर्मी आने वाली है।

26 फरवरी से इसका असर भी दिखने लगेगा। जिले में पिछले सप्ताह बारिश हुई थी। जिसकी वजह से ठंडी का भी अहसास हुआ। अब एक बार फिर मौसम में परिवर्तन होने वाला है। जिसका असर दिखना शुरू हो गया है। अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। सोमवार को न्यूनतम तापमान 16.6 डिग्री था। आज 1.2 डिग्री की गिरावट आई है। बावजूद इसके गर्मी लगने लगी है। दिन में सूर्य का तेवर तेज हो चुका है। सुबह हल्की ठंड के बाद दोपहर के 12 बजते ही धूप चुभने लगी है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो तीन दिनों तक अभी तापमान में उतार चढ़ाव इसी तरह बना रहेगा। ठंड अब विदाई की ओर है। गर्मी ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। तापमान में निश्चित रूप से बढ़ोतरी का सिलसिला आरंभ होगा।

दिन में गर्मी तो रात में गुलाबी ठंड

जिले में अब दिन में गर्मी तो रात में गुलाबी ठंड की स्थिति है। विगत 10 वर्षों का आंकडा देखें तो पता चलता है कि फरवरी के दूसरे पखवाड़े में अधिकतम तापमान 32 डिग्री से उपर रहता है। गौरतलब है कि इस वर्ष मौसम विभाग ने यह भी कहा था कि मार्च के अंत तक ठंड बनी रह सकती है। लेकिन ताजा आंकडो से पता चलता है कि नियत समय से गर्मी दस्तक देगी।

बदलते मौसम के बाद कृषि विभाग ने दी सलाह

कृषि विज्ञानियों ने राज्य के किसानों को मौसम आधारित सामयिक सलाह दी है कि गेंहू की फसल बालियां निकलने की अवस्था में है अतः जो किसान बीज उत्पादन करना चाहते हैं, वे विजातीय पौधों को निकालकर खेत से अलग करें। लगातार बादल छाए रहने के कारण चने में इल्ली का प्रकोप होने की संभावना है अतः इल्ली को हाथ से चुनकर नष्ट करें। किटहारी पक्षियों की खेतों में सक्रियता बढ़ाने के लिए 20-25 नग लकड़ियां प्रति हेक्टर की दर से अलग-अलग स्थानों में लगाएं। व्यस्क कीटो कि निगरानी के लिए फिरोमेन ट्रेप 2 नग प्रति एकड़ की दर से लगाएं। सरसों फसल में माहो (एफिड) कीट की शिशु और वयस्क दोनों ही हानिकारक अवस्थाएं है। इस कीट की अधिक प्रकोप होने पर नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 250 मि.ली. प्रति हेक्टेयर की दर से घोल बनाकर 10-15 दिन के अंतराल पर आवश्यकतानुसार दो से तीन बार छिड़काव करें। किसानों को सलाह दी गई है कि ग्रीष्म कालीन धान की फसल में तना छेदक के प्रकोप से फसल को बचाने के लिए प्रारम्भिक नियंत्रण के लिए प्रकाश प्रपंच अथवा फिरोमेन ट्रेप का उपयोग करें। दलहनी फसलों में पीला मोजेक रोग दिखाई देने पर रोगग्रस्त पौधों को उखाड़ कर नष्ट कर दें तथा मेटासिस्टाक्स या रोगोर कीटनाशक दवा 1 मिली/लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

उद्यानिकी के फसल में बैगनी धब्बा बीमारी

इसी प्रकार उद्यानिकी के फल और सब्जियों की फसलों में प्याज में बैगनी धब्बा बीमारी दिखने या पत्तियां सूखने पर साफ नामक दवा को 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। लगातार बादल छाए रहने के कारण सब्जियों में एफिड (मैनी) एवं भटा में फल एवं तनाछेदक लगने की संभावना हैं। अतः किसानों को सलाह हैं की प्रारम्भिक कीट नियंत्रण के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन का प्रयोग जैसे फीरोमोन प्रपंच, प्रकाश प्रपंच या खेतों में पक्षियों के बैठने हेतु खूटी लगाना लाभकारी होता है। आम में इस समय बौर आ चुका है तथा फल लगना प्रारम्भ हो रहा है। इस अवस्था में बौर में भभूतिया रोग लगने की संभावना रहती है। अतः सलाह दी जाती है कि इसकी सतत निगरानी करें तथा रोग के लक्षण दिखाई देने की स्थिति में बॉविस्टीन 1.5 ग्राम अथवा सल्फेक्स 3 ग्राम प्रतिलीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव करें।

Posted By: Nai Dunia News Network

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