बोड़ला (नईदुनिया न्यूज)। बोड़ला विकासखंड पौष में पड़ने वाली कड़ाके की ठंड से लोग ठिठुरते हैं, लेकिन इस साल पौष में सावन की झड़ी से लोग ठिठुर रहे हैं। खराब मौसम, दिन-रात हुई झमाझम बारिश से लोग दिन भर घरों में दुबके रहे। गर्म कपड़े पहने अलाव के पास से डटे रहे। लगभग एक सप्ताह से भारी बारिश के चलते विकासखंड के कई धान खरीदी केंद्रों में खुले में रखे धान भीग गए हैं। इससे समितियों को भारी नुकसान हुआ है बेमौसम हुई बारिश के चलते विकासखण्ड के 12 धान खरीदी केंद्रों- बोड़ला, बैजलपुर, बोदा, मिनमिनिया, चिल्फी, समनापुर, बम्हनी, झलमला, राजानवागांव, खरोडा हरिनछपरा में जगह न होने से धान भीग रहा है। खरीदी केंद्रों में धान को बारिश से बचनो के लिए कैपकवर, तालपत्री सहित विभिन्न इंतजाम के लिए पर्याप्त राशि सहकारी समितियों को दी गई है। बावजूद धान को नीचे से भीगने से नहीं बचाया जा सका है। विकासखंड में बारिश से कई क्विंटल धान भीगने की खबर आ रही है।

इस संबंध में जिला विपणन अधिकारी टिकेंद्र राठौर ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था समितियों की जिम्मेदारी है। विकासखंड में धान खरीदी की स्थिति की जानकारी चाही गई तो कहा कि विकासखंड स्तर पर कोई जानकारी नहीं है। जिले के लक्ष्य पर बताया कि 44 लाख क्विंटल धान खरीदा जाना है। अब तक 31 लाख 50,000 क्विंटल धान खरीदी हो गई है। उन्होंने बताया कि 38 प्रतिशत धान का उठाव हुआ है।

अव्यवस्था पर किसान नाराज

चिल्फीघाटी के कृषक लालाराम यदु, ग्राम पंचायत बेला के हरीश यादव ने बताया कि समितियों में रखे धान की सुरक्षा की स्थिति साफ दिख रही है। खरीदी केंद्रों में ताला लगा हुआ है और बारिश में धान भीग रहा है। केंद्रों में धान यत्र तत्र जमीन पर पड़ा हुआ है। पिछले एक सप्ताह से हो रही बारिश के चलते धान खरीदी भी बंद है। स्थानीय किसानों जिनमें विजय पाटिल, सोमनाथ, दया यादव ने खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मौसम को लेकर अलटविभाग द्वारा भारत से बारिश संबंधी अलर्ट पहले से जारी कर दिया गया है। इसके बाद भी धान को भीगने से बचनो के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए है।

रबी फसल को भारी नुकसान

दामापुर के नवापारा, कोड़ापुरी, नानापुरी, महली, अखरा, नेऊरगाव खरर क्षेत्र में लगातार हो रही बेमौसम बारिश से रबी फसल को भारी नुकसान होने के कारण किसानों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। चना, मसूर, तिवरा, अरहर की फसल को काफी क्षति हुई है। किसान कर्ज लेकर महंगा दामों में फसल की बोनी की थी, किंतु इस बारिश ने बर्बाद कर दिया। अब किसानों को कर्ज चुकाने समस्या सताने लगी है। ग्राम कोड़ापुरी के किसान दीना चंन्द्राकर, नरेंद्र साहू, अंजय, अश्वनी यदु, सुनील साहू, राम ठाकुर, दिनेश ने बताया कि क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश एवं ओले गिरने से चना, मसूर, तिवरा व अरहर जैसे चना फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। उन्होंने फसल क्षतिपूर्ति राशि एवं बीमा की राशि शीघ्र भुगतान करने की मांग की है। यही हाल क्षेत्र के अन्य ग्राम कोड़ा पुरी नवापारा पेन्ड्रीकला, छीतापार महली, अखरा, नेऊरगाव, कुंडा, माकरी, कोदवा व नेऊरगांव के गांव में भी देखा जा सकता है। इसके अलावा फल और सब्जियों की फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है। लगातार बादल छाए रहने और बारिश होने से कीट प्रकोप भी हो गया है। किसान फसल को बचाव के लिए कीट नाशक दवा की भी छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन कोई असर नहीं पड़ रहा है। क्षेत्र के किसान नेतराम, बलदाऊ चंद्रवंशी,चंद्रिका चंद्रवंशी, महेश चंद्रवंशी, जलेश वर्मा, संजय चंद्राकर, महादेव ठाकुर सुनील साहू, राम ठाकुर, दिनेश ठाकुर, महादेव ठाकुर इन किसानों ने शीघ्र ही फसल क्षतिपूर्ति एवं फसल बीमा की राशि भुगतान करने की मांग की है।

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