कवर्धा। नईदुनिया न्यूज

जून 2017 को पहली बार भोरमदेव शक्कर कारखाना में चुनाव कर बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर के सदस्य चुने गए। फिर सदस्यों द्वारा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने गए। बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर के चार सदस्य सरकारी विभाग से, तीन शेयरधारक संस्थानों से और बाकी व्यक्तिगत शेयरधारक से चुनाव के माध्यम से पहुंचे थे। फरवरी 2018 में यहां बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर के पांच सदस्य को अपात्र घोषित किया गया था। छत्तीसगढ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 19 (क)(क) सहपठित धारा 19 ख के उपबंधों के अंतर्गत बोर्ड के सदस्य का पद धारण करने के लिए अपात्र हो जाने के फलस्वरूप बोर्ड के सदस्य का पद रिक्त घोषित किया गया।

भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना में फिर से चुनाव हो सकते है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के पांच पद खाली हो चुके है। वहीं दूसरी ओर 46 डेलीगेट्स कम हो गए। वहीं आरक्षण में भी फेरबदल हो गया जिसके चलते शक्कर कारखाना संचालक मंडल सदस्यों की पूर्ति नहीं हो पा रही है। भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना में फिलहाल बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर के पांच सदस्य के पद खाली पड़े है। इसकी पूर्ति करना पेचिदा कार्य हो चुका है। जिन प्रतिनिधि मंडल सदस्यों ने मिलकर बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर चुने वह अब कम हो चुके है। नवंबर 2017 में पंडरिया स्थित शक्कर कारखाना में पेराई सीजन प्रारंभ होते ही भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना के कार्य क्षेत्र का विभाजन हो गया। इसके चलते पांच संचालक सदस्य और 46 डेलीगेट्स का कार्यक्षेत्र भी भोरमदेव शक्कर कारखाना से पंडरिया शक्कर कारखाना चले गए चूंकि डेलीगेट्स ही संचालक मंडल सदस्य चुनते है। वहीं संचालक मंडल सदस्य के अनुपात में ही वर्गवार एसटी, एससी और महिला आरक्षण होता है। लेकिन फिलहाल 185 में से 46 डेलीगेट्स ही कम हो गए तो आगे की प्रक्रिया ही नहीं बढ़ रही। ऐसे में इसके लिए कारखाना प्रबंधक द्वारा रायपुर पंजीयक से गाइड लाइन मांगी गई है। ताकि प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

Posted By: Nai Dunia News Network