कवर्धा। नईदुनिया न्यूज

किसानों को डेम से सिचांई के लिए पानी तो मिलता नहीं पर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बॉर्डर पर बना इस डेम का पानी ज्यादातर मध्यप्रदेश के मलाजखंड में बने लौह प्लांट अंतर्गत ताम्र परियोजना को दिया जाता है। और छत्तीसगढ़ के किसान फसल के लिए पानी की मांग करते हुए गुहार लगाते रह जाते है। अब जिस डेम से इन्हे पानी समय पर सिंचाई के लिए नहीं मिल पाता वो अब वो पानी किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। अब डेम किसने खोला क्यों खोला इसका अभी तक सही जानकारी समाचार के लिखे जाने तक नहीं मिल पाया है। जबकि इस संबंध में जानकारी जुटाने प्रयास भी किया गया तो अधिकारी बचते हुए डब्लूआरडी विभाग से जानकारी लेने की बात कर रहे है। खैर जो भी हो जिस डेम से किसानों को गर्मी के समय में पानी की उम्मीद रहती है उन्हें उस समय तो पानी नहीं मिल पाता, लेकिन इस बार डेम का पानी मुसीबत बनकर किसानों की फसलो को तबाह कर रहा है।

जिले में तीन दिन से लगातर हल्की व तेज बारिश हो रही है। पूर्व में मौसम विभाग ने बारिश को लेकर चेतावनी भी दिया था। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। स्थिति ऐसी रही कि बारिश होने के बाद भी वनांचल ग्राम बहेराखार के बांध को खोल दिया गया। इस कारण बांध का पानी करीब 400 एकड़ से अधिक भूमि में जा घुसा। इससे इस भूमि में लगे फसल खराब होने की संभावना बढ़ गई है। बहेराखार बांध का पानी छोड़ने से आसपास के चार गांव के करीब 400 एकड़ खेत में पानी भर गया है। जिससे पूरा फसल बर्बाद होने की कगार पर आ गया है। ऐसे में किसानों को फसल की चिंता सताने लगी है। सोमवार को जैसे ही मामले की जानकारी मिली तो जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने कवर्धा से टेक्निकल टीम रवाना किया गया है।

नहर का गेट खराब के कारण आई परेशानी

बताया जा रहा है कि नहर का गेट खराब होने के बावजूद उसे सुधारा नहीं गया। इस कारण से बहाव तेज हो गया है। अब लगातार पानी बहने की वजह से बांध खाली होने का खतरा बना हुआ है। रविवार रात से मुख्य गेट जाम होने के कारण नहर से लगातार पानी बहता रहा। सोमवार की सुबह पानी का बहाव अधिक होने के कारण मुख्य नहर का दीवार भी फूट गया, जिससे पानी खेतों में जा घुसा है। पानी के कारण ग्राम पंडरिया जंगल, भिभौरी व उसरवाही सहित कई गांवों के 300 से अधिक एकड़ की फसल में पानी भर चुका है। खड़ी फसल में पानी भरने से किसानों को नुकसान होने की आशंका बनी हुई हैं.

मध्यप्रदेश बार्डर में है यह डेम

बहेराखार बांध कबीरधाम जिले मध्यप्रदेश सीमा से लगे गांव में बना है। यह अविभाजित मध्यप्रदेश के पहले बना था, ऐसे में इस बांध का ज्यादातर पानी मध्यप्रदेश के मलाजखंड में बने लौह प्लांट अंतर्गत ताम्र परियोजना को दिया जाता है। पानी के बदले मलाजखंड परियोजना से जिले के जल संसाधन विभाग को भी मोटी रकम मिलती है, लेकिन बांध के रख रखाव पर कभी भी ध्यान नहीं दिया गया। यही कारण है कि आज थोड़े से पानी के दबाव में ही गेट जाम हो गया। जल्द ही बांध के गेट को बंद नहीं किया गया, तो बांध पूरी तरह से खाली होने का डर तो बना ही है। इसके साथ ही आसपास के गांव में भी पानी घुसने की आशंका बनी हुई है। फिलहाल रायपुर से भी टेक्निकल टीम को बुलाया गया है। टीम के आने के बाद भी गेट ठीक हो पाएगा।

बांध के पानी से इन किसानों के फसल हुए प्रभावित

वीरूसिंह पिता हिरदे सिंह, सूबेदार पिता जुरजन सिंह, मनराखन पिता जुरजन, झनकलाल पिता जुरजन, प्रहलाद पिता दसेलाल, हीरा लाल पिता दसेलाल, रमेश पिता कमल, पंचराम पिता कुंवरसिंह, सीताराम पिता कुंवरसिंह, बरस लाल पिता हुकूम, सवनुसिंह पिता कुंवरसिंह, मुन्नाालाल पिता नुरलाल, दिलीप पिता अखत, धनीराम पिता धुरसिंह, मैनसिंह पिता धुरसिंह, पुनाराम पिता बाबूलाल, सुरतलाल पिता खाकलाल, तुकाराम पिता बाबूलाल, राम पटेल पिता रितु पटेल, बलराम पिता रीतू, हंसराम पिता मेहत्तर, छन्नू पिता समुक्त इनके साथ अन्य किसानो के फसल भी इस बांध के पानी से प्रभावित हुए है।

एक जून से लेकर 21 अक्टूबर तक बारिश की स्थिति

तहसील का नाम वर्षा के आंकड़े

कवर्धा 1153.5, पंडरिया 612, बोड़ला 647.6, सहसपुर लोहारा 1154,

जिले के बांध की स्थिति

बांध का नाम डेम में भरे पानी की स्थिति(मिमी) प्रतिशत

छीरपानी 428.50 100, सुतियापाठ 415 100, सरोदा 420.91 99.59, कर्रानाला 387.50 86.35, बेहराखार 609.60 87.75

बहेराखार में जांच दल भेजी गई है। 20 हेक्टेयर फसल का नुकसान बताया जा रहा है। पानी के रूकने के बाद ही बताया जा सकता है कि कितना नुकसान हुआ है। फिलहाल अभी जांच दल की रिपोर्ट आने से ही प्रभावित फसलों के सही आंकडे मिल सकेंगे।

अवनीश कुमार शरण कलेक्टर जिला कबीरधाम

Posted By: Nai Dunia News Network