पोंडी। पोंडी नगर में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान जगन्नााथ की रथ यात्रा शुक्रवार को डीजे की धुन में निकाली गई। जिसमे शोभा यात्रा में रथ सवार होकर भगवान जगन्नााथ अपने मौसी घर पहुंचे। रथयात्रा का शुभारंभ पोंडी के शिव मंदिर प्रांगण से प्रारंभ किया गया जो नगर के ठाकुर पारा, गोस्वामी पारा, बाजार चौक बस स्टैंड से सतनामी पारा, पाली पारा, महादेव पारा, कुंभकार पारा से होकर भगवान जगन्नााथ अपने मौसी के घर शीतला मंदिर पहुंचे। पूरे रथ यात्रा के दौरान आयोजक समिति के सदस्य भगवान जगन्नााथ की यात्रा में झूमते नजर आए।

दरअसल लगातार 02 वर्षो से कोरोना महामारी की चलते प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं मिलने के कारण रथ यात्रा नहीं निकाला जा रहा था। लेकिन इस वर्ष बड़े ही धूमधाम से रथ यात्रा निकाली गई। इस रथ यात्रा में भगवान श्री कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम और अपनी बहन सुभद्रा के साथ अपने मौसी के घर पहुंचे। रथ यात्रा में प्रकाश साहू, गणेश श्रीवास, महेश निषाद, सूरज यादव, संजय गोस्वामी, दीपेश साहू, चुरावन साहू, रवि निषाद, राहुल गुप्ता, मनीषा कुंभकार, अमन ठाकुर, नितेश निर्मलकर सहित ग्रामवासी मौजूद रहे।

युवा सेवा संघ के सदस्यों ने वितरण किया प्रसाद

रथयात्रा के दौरान संत आसाराम बापू के द्वारा प्रेरित श्री योगदान सेवा समिति एवं युवा सेवा संघ कवर्धा के द्वारा कवर्धा के हृदय स्थल कहे जाने वाले सिग्नल चौक में हजारों श्रद्धालुओं के लिए चने की प्रसादी एवं शरबत की व्यवस्था की गई थी। ऐसी मान्यता है कि जो भी इस यात्रा में शामिल होता है, उसके सारे कष्ट सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। रथ खींचने को लेकर भी अलग-अलग धारणाएं हैं। कहा जाता है कि जो व्यक्ति भगवान के रथ को खींचते हैं उसे 100 यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है। साथ ही इस यात्रा में शामिल होने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं। इस रथ को गरुड़ध्वज, कपिध्वज या नंदीघोष कहा जाता है। इसमें 16 पहिए होते हैं व ऊंचाई साढ़े 13 मीटर तक होती है। लाल और पीले रंग का लगभग 1100 मीटर कपड़ा रथ को ढंकने के लिए उपयोग में लाया जाता है। इस रथ को बनाने में 832 लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग किया जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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