कवर्धा(नईदुनिया न्यूज)। कवर्धा जिले में भी अब कोरोना तेजी से फैल रहा है। स्थिति ऐसी है कि अब जिले में एक्टिव मरीजों की संख्या करीब 1100 के पार पहुंच गई है। अब तो दूसरे राज्य भी हमारे राज्य को कोरोना हाटस्पाट मान रही है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ की ओर से आने व जाने वाली सभी बसों पर रोक लगा दी है। इसका असर कबीरधाम जिले में भी हुआ है। क्योंकि कवर्धा से रायपुर-जबलपुर व मंडला होते हुए करीब 10 से अधिक बस गुजरती है। बुधवार को छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखे हुए मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने दोनों प्रदेशों के बीच आने-जाने वाली बसों पर 15 अप्रैल तक रोक लगा दी है। बुधवार को एमपी के परिवहन विभाग के इस आदेश में 7 से 15 अप्रैल तक मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच सभी बसों पर रोक लगाने को कहा गया है। आदेश में लिखा गया है कि यह निर्णय कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जनता की भलाई में लिया गया है।

एमपी में महाराष्ट्र की बसों पर भी पाबंदी

इससे पहले महाराष्ट्र में बढ़ते संक्रमण को देखे हुए मध्य प्रदेश की महाराष्ट्र से लगी सीमाएं सील कर दी गई हैं। जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ में ब्ुधवार को 10 हजार से ज्यादा नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। छत्तीसगढ़ में पिछले वर्ष मार्च के बाद अब फिर इस तरह की स्थिति बन गई है। कोरोना संक्रमण से हमारे राज्य में 55 मौते एक ही दिन में दर्ज की गई हैं, जिनमें 26 मौतें अकेले रायपुर में हुई है। छत्तीसगढ़ में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या 52,445 पहुंच गई है। वहां 14 जिलों में संक्रमितों की संख्या 200 से अधिक है। ऐसे में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच लोगों के आने-जाने पर रोक लगाने के लिए बसें बंद की गई हैं।

बसों की संख्या भी कम हो रही, लोगों को हो रही परेशानी

दूसरे शहरों में कोरोना के मामले बढ़ने के कारण अब सवारी भी कम मिल रहे हैं। यही कारण है कि मालिकों को नुकसान हो रहा है। इस स्थिति में बस की संख्या भी कम हो रही है। शहर के बस स्टैंड से हर दिन नागपुर, जबलपुर, मंडला, नागपुर, लखनऊ व पूणे के लिए यात्री बसें चलती हैं। लेकिन इन रूट पर चलने वाली यात्री बसों के पहिये थम गए। जिले से बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूरी करने नागपुर जाते हैं। होली पर्व में सभी मजदूर अपने गांव वापस लौटते हैं। नागपुर में लाकडाउन होने व 31 मार्च तक यात्री बसों का संचालन बंद होने के कारण नागपुर गए इन मजदूरों को वापस अपने गांव लौटने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इन मजदूरों के आने-जाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। इससे इन मजदूरों की परेशानी ओर अधिक बढ़ सकती है।

मरीजों को चिकित्सक को सही जानकारी देने की अपील की

स्वास्थ्य विभाग ने होम आइसोलशन मे रह रहे मरीजों से अपील की है कि वे संबंधित चिकित्सक को अपने आक्सीजन लेवल, तापमान , पल्स आदि की सही रीडिंग बताएं, क्योंकि अनेकों बार यह देखा गया है कि होम आइसोलेशन वाले मरीज जब अस्पताल पहुंचते हैं, तब मालूम होता है कि उन्होने इसके पूर्व गलत रीडिंग बताई या बताई ही नहीं,जिसके कारण गंभीर स्थिति हुई। होम आइसोलेशन के मरीजों को या जो उनकी देखभाल करता है, उसे थर्मामीटर से तापमान लेना ,पल्स आक्सीमीटर से आक्सीजन स्तर लेना और पल्स की रीडिंग लेना आना चाहिए जो कि बहुत सरल है,यह पल्स आक्सीमीटर के जरिए ली जाती है। उससे दिन में चार बार रीडिंग लेकर मोबाइल के जरिए ही उस चिकित्सक को भेजना है जो उन्हें एलाट किया गया है। इसके अतिरिक्त मरीजों को छह मिनट चलने के पहले और छह मिनट बाद भी आक्सीजन स्तर, आक्सीमीटर से रीडिंग लेना चाहिए और इसमे तीन अंकों का अंतर आने पर डाक्टर को बताना चाहिए। आक्सीजन स्तर 95 से कम होने पर भी चिकित्सक को जरूर बताना चाहिए।

घर पर रह कर सैकड़ों लोगों का हो रहा इलाज

जिले में कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं। लेकिन ज्यादातर जिन्हें कोई भी लक्षण व कम लक्षण है उन्हें घर पर ही इलाज की सुविधा मिल रही है। ऐसे में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य अधिकारियों को परिपत्र जारी कर होम आइसोलेशन से संबंधित प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन करवाने कहा है। विभाग ने होम आइसोलेशन में कोविड-19 के इलाज की अनुमति, पात्रता, शर्तों, नियमों, जिला प्रशासन के उत्तरदायित्वों, मरीजों के स्वास्थ्य की निगरानी और मरीजों द्वारा बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों के संबंध में विस्तृत निर्देश दिए हैं।स्वास्थ्य विभाग ने होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की निगरानी कर रहे निजी अस्पतालों, नर्सिंग्स होम्स और डाक्टरों को मरीज से संबंधित जानकारी और उनके होम आइसोलेशन की समाप्ति की सूचना जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

इन नियमों को पालन जरुरी

विभाग द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया है कि राज्य शासन द्वारा कोविड-19 के मरीजों को निर्धारित मापदंडों के अनुरूप होम आइसोलेशन की अनुमति प्रदान की गई है। मरीज को होम आइसोलेशन की अनुमति देने के पहले उसकी पात्रता का आकलन किया जाएगा। कोरोना संक्रमित मरीज के रहने के लिए घर में हवादार कमरा और अलग शौचालय होना अनिवार्य है। यदि घर में ऐसी व्यवस्था नहीं है तो मरीज के इलाज का प्रबंध कोविड केयर सेंटर में किया जाएगा। सामुदायिक शौचालय का उपयोग करने वाले परिवारों को होम आइसोलेशन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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