कवर्धा (ब्यूरो)। भोरमदेव अभ्यारण्य में बीते चार वर्षों से लगातार बाघ की मौजदूगी के प्रमाण मिले है। यह पहला अवसर है जब चिल्फी, कवर्धा व रेंगाखार वन परिक्षेत्र में एक साथ तीन बाघिन, तीन शावक और एक बाघ की मौजदूगी के लगातार प्रमाण मिल रहे है। चिल्फी वन परिक्षेत्र के धवईपानी के जंगल में हिंसक वन्य प्राणी द्वारा मवेशी के शिकार किए जाने के बाद वन विभाग ने ट्रेप कैमरा लगाया था। जिसमें बाघ की तस्वीर कैद हुई है।

चिल्फी वन परिक्षेत्र अधिकारी जेएन तिवारी ने बताया कि चिल्फी से रेंगाखार तक लगभग 70 किमी तक की वन सीमा कान्हा टाईगर रिजर्व से जुड़ा हुआ है जहां लंबे समय से दो बाघिन के साथ,दो शावक तथा एक बाघ मौजूद है। ट्रेप कैमरे में बाघ की तस्वीर कैद हुई है तथा गश्त के दौरान बाघिन व शावक के पद चिन्ह लगातार मिल रहे है। वहीं कवर्धा वन परिक्षेत्र के जंगल में बाघिन के साथ एक शावक पद चिन्ह मिले है।

ट्रेप कैमरे से निगरानी

भोरमदेव अभ्यारण्य के एसडीओ जितेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि बाघ, बाघिन और शावक की सुरक्षा के दृष्टिकोण से चिल्फी ,कवर्धा व रेंगाखार वन परिक्षेत्र के संभावित स्थलों में ट्रेप कैमरा लगाकर लगातार उनके लोकेशन पर नजर रखी जा रही है। तथा गांव में लोगों को हिदायत दी जा रही है ही मवेशी चराने के नाम पर जंगल के भीतर प्रवेश न करें। क्योंकि जंगलों में हिंसक वन्य प्राणियों की संख्या में बढ़ोत्तरी के साथ उनके द्वारा शिकार भी लगातार किया जा रहा है।

दहशत में वनवासी

भोरमदेव अभ्यारण्य के तहत कवर्धा,चिल्फी व रेंगाखार वन परिक्षेत्र के जंगलों से लगे हुए गांव में रहने वाले बैगा आदिवासी व वनवासी हिंसक वन्य प्राणी बाघ, बाघिन व तेंदुएं की दहाड़ व लगातार मवेशियों को अपना शिकार बनाने से दहशत में हैं। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से बाघ की मौजदूगी के सूचना के बाद वनवासियों का दिनचर्या ही बदल गया है। सूर्य की रोशनी के दौरान ही गांव से लगे हुए जंगल के हिस्सों में ही मवेशियों को चराकर वापस लौट जा रहे है।