कवर्धा (नईदुनिया न्यूज)। जिले के सबसे बड़े पीजी कालेज में प्राइवेट विद्यार्थियों से जनभागीदारी शुल्क लिए जाने को लेकर विरोध शुरू हो गया है। पीजी कालेज के प्राइवेट परीक्षा दिला रहे विद्यार्थियों से जनभागीदारी फीस के नाम पर 255 रुपये वसूल रहे हैं, जबकि ये विद्यार्थी केवल परीक्षा में ही शामिल होंगे। इन विद्यार्थियों परीक्षा को छोड़ कालेज से किसी भी प्रकार से सुविधा नहीं मिलती। इसका विरोध भी हो चुका है। इसके बाद भी रुपये लिए जा रहे हैं। अजित जोगी छात्र संगठन के जिला अध्यक्ष रंजीत वर्मा ने बताया कि अनियमित छात्र-छात्राओं को न ही प्रायोगिक कार्य कराया जाता है और न ही लैब ले जाते है। उसके बाद भी 250 रुपये की वसूली की जा रही है और जनभागीदारी शुल्क भी बहुत ज्यादा है। इससे छात्र छात्राओं को कोरोना काल मे अतरिक्त भार पड़ेगा और इस राशि का कोई रसीद भी नहीं देते हैं। अजित जोगी छात्र संगठन कवर्धा ने छात्र हित मे मांग की कि अनियमित छात्र-छात्राओं से प्रायोगिक और जनभागीदारी शुल्क की वसूली बंद की जाए। इस संबंध में नेताओं ने ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वर्तमान में प्राइवेट परीक्षा फार्म भरे जा रहे हैं, इन विद्यार्थियों से रुपये लिया जा रहा है।

सुविधा देने का करते हैं दावा

विद्यार्थियों ने बताया कि यह राशि परीक्षा के दौरान सुविधा देने का दावा किया जाता है। लेकिन ऐसे कोई खास सुविधा नहीं मिलती। केवल परीक्षा के दौरान एक टेबल व पानी की व्यवस्था की जाती है। स्थिति इतनी खराब होती है कि परीक्षा के दौरान ज्यादा विद्यार्थियों की संख्या होती है तो बरामदे में बैठा दिया जाता है। इससे असुविधा होती है। इसके अलावा परीक्षा भीषण गर्मी के दौरान होती है। कालेज में परीक्षा के दौरान ज्यादा भीड़ होने पर मोटरसाइकिल रखने छायादार पार्किंग की कमी है। इस कारण विद्यार्थी कालेज के भीतर पेड़ के नीचे अपने मोटर साइकिल को रखते है।

परीक्षा ही नहीं हुई तो रुपये वापस होंगे

वर्तमान में पीजी व यूजी पाठ्यक्रम के वार्षिक परीक्षा प्राइवेट के फार्म भराए जा रहे हैं। दूसरी ओर कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। ऐसे में मई-जून में होने वाले आफलाइन परीक्षा को लेकर संकट के बादल छाए हुए है। तब अगर मई-जून में संक्रमण बढ़ती है, तो ऐसी स्थिति में कालेज में परीक्षा नहीं तो क्या जनभागीदारी समिति अपने सभी प्राइवेट विद्यार्थियों को जनभागीदारी शुल्क वापस करेगी? विद्यार्थियों में इस बात की नाराजगी है। क्योंकि बीते वर्ष भी रुपये लिए गए थे,लेकिन कालेज में आफलाइन परीक्षा ही नहीं हुआ।

परीक्षा फार्म शुल्क भी दे रहे विद्यार्थी

वर्तमान में विद्यार्थियों द्वारा परीक्षा फार्म शुल्क के लिए दुर्ग के हेमचंद विवि द्वारा आनलाइन फीस ली जा रही है। एमए के लिए करीब 1600 रुपये फीस है। यह विद्यार्थी द्वारा आनलाइन जमा किया जाता है। इसके बाद फार्म भी प्रिंट को पीजी कालेज के जमा किया जाता है। तब कालेज द्वारा जनभागीदारी शुल्क लिया जा रहा है। विद्यार्थियों ने बताया कि प्राइवेट छात्र सिर्फ परीक्षा समयावधि में ही कालेज में परीक्षा देने जाते हैं। इसके अलावा न तो कालेज से कोई शैक्षणिक लाभ वह लेता है और न ही किसी अन्य सुविधाओं का वह उपयोग करता है। इसके बाद भी कालेजों में निर्धारित जनभागीदारी शुल्क प्राइवेट के छात्रों से लिया जा रहा है। परीक्षा देने के लिए निर्धारित परीक्षा शुल्क का भुगतान करने के बाद भी जनभागीदारी शुल्क की वसूली की जा रही है, जो गलत है।

वर्सन -

कालेज के जनभागीदारी समिति द्वारा हर साल प्राइवेट विद्यार्थियों से जनभागीदारी फीस ली ही जाती है। इसके बदले में हम परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को सुविधा भी दे रहे हैं।-मोहित माहेश्वरी, जनभागीदारी समिति अध्यक्ष

Posted By: Nai Dunia News Network

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