कवर्धा (नईदुनिया न्यूज)। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर से संबद्घ संत कबीर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र कवर्धा ने शुक्रवार को स्वामी करपात्री जी शासकीय उच्चतर माध्यामिक विद्यालय कवर्धा के साथ कृषि शिक्षा दिवस मनाया। कृषि शिक्षा के महत्व विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ताकि स्कूलों में पढाई कर रहे छात्र-छात्राओं में कृषि शिक्षा के प्रति जागरूकता लाई जा सके।

अधिष्ठाता डा. आरबी तिवारी ने कहा कि तीन दिसम्बर को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद के जन्मदिवस को कृषि शिक्षा दिवस के रूप में मनाते हैं। लगभग 70 प्रतिशत भारतीय आबादी कृषि पर निर्भर है, अतः कृषि उपज बढ़ाने के लिये नई-नई तकनीक, अनुसंधान और उपक्रम ईजाद करने की आवश्यकता है। छात्र-छात्राओं को अधिक से अधिक कृषि शिक्षा लेने को पे्ररित किया। कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाने पर जोर दिया।

12वीं के बाद ले सकते हैं प्रवेश

वैज्ञानिक डा. चंद्रेश कुमार चंद्राकर ने जानकारी दी कि विज्ञान विषय में बारहवीं परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कृषि विषय में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम क्रम में प्रवेश ले सकते हैं। इसके लिये छत्तीसगढ़ व्यापम द्वारा आयोजित पीएटी परीक्षा में भाग लेकर राज्य में संचालित विभिन्न सरकारी एवं निजि कृषि महाविद्यालय में प्रवेश ले सकते हैं। भारतीय अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा आयोजित आइसीएआर एआइईईए (यूजी.) परीक्षा में भाग लेकर देश के विभिन्न राज्यों में स्थित विश्वविद्यालयों द्वारा संचालित महाविद्यलयों में प्रवेश लेकर कृषि शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। जीव विज्ञान संकाय के छात्र कृषि महाविद्यालय के अलावा पशु चिकित्सा महाविद्यालय एवं वानिकी महाविद्यालय में भी प्रवेश ले सकते हैं। गणित संकाय के विद्यार्थी कृषि शिक्षा के अलावा दुग्ध प्राद्योगिकी एवं कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालयों में भी प्रवेश ले सकते हैं। वैज्ञानिक रविशंकर नाग ने उपाधि प्राप्त करने के पश्चात किन-किन विभागों में सरकारी एवं निजी क्षेत्रों में अपने सेवाऐं दे सकते के बारे में विस्तार से बताने के साथ ही साथ बताया कि मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन इत्यादि को स्वरोजगार के रूप में अपना सकते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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