कवर्धा(नईदुनिया न्यूज)। मजदूर आज अपने घर पहुंचने के लिए संघर्ष के उस दौर से गुजर रहा है। जहां उन्हें किसी भी स्थिति में जैसी भी सुविधा मिले, न मिले, वह बस घरों तक पहुंचना चाहते हैं। तो इसके साथ ही कई मजदूरों को ऐसा भी देखा गया है,जो अपने जीवन साथी के साथ सिर पर बोझ रखे पैदल ही चल रहे हैं, तो कोई साइकिल से अपने हम सफर के साथ सैकड़ों किलोमीटर की दूरी को तय करने आत्मविश्वास के साथ चल रहे हैं और इन मजदूरों को कहना भी है कि वे जरूर अपने घर तक पहुंचेंगे।

ज्ञात हो कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार मजदूर अपने घरों तक पहुंचने के लिए कोई पैदल, तो कोई साइकिल से निकल पड़े हैं। इसके साथ ही आज की स्थिति में तेज गर्मी के चलते जहां लोग घरों से निकलना पसंद नहीं कर रहे हैं। वहीं मजदूर 42 डिग्री तापमान में भी साइकिल या पैदल ही अपने ग्रामों की ओर लौट रहे हैं । शुक्रवार को पोड़ी के पास मजदूरों का एक परिवार लखनऊ से लौटकर कांपादाह की ओर जाने के लिए बैठे हुए थे। जब उनसे चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि वे लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर का पैदल सफर किया। तथा कहीं वाहन मिला, तो उसका सहारा लेकर वह अपने ग्राम की ओर लौट रहे हैं। बात करते समय जहां इन मजदूरों की आंखें नम हुई। वहीं इन मजदूरों में एक महिला का कहना था कि शहरों की खीर से गांव की खिचड़ी अच्छी है। दोबारा हम पलायन नहीं करेंगे। अपने ग्राम में ही खेती किसानी या मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर लेंगे पर अब शहरों के चकाचौंध में कमाने खाने नहीं जाएंगे।

मजदूरों की यह दशा है कि वे किसी भी स्थिति में अपने घर को लौटने लगे हुए हैं। इसके साथ ही सहसपुर लोहारा क्षेत्र में भी भरी दोपहरी को मजदूर साइकिल से अपने ग्रामों की ओर निकल पड़े थे। इन मजदूरों के हाथ में थैला सहित राशन की सामग्री रखे हुए थे। मजदूरों का कहना था कि सफर बहुत लंबा है और वे रुकते-रुकते जैसे तैसे कर अपनी मंजिल तक पहुंचने मजबूर हैं। बेमेतरा जिले के साजा से 22 मजदूर जो उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं वह साजा क्षेत्र के गुण फैक्ट्री में काम करने उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ आए हुए थे, और वे लॉकडाउन में फंसे रहे। मजदूरों ने बताया कि गुण फैक्ट्री में काम बंद हो जाने से उनके सामने रोजी रोटी की बड़ी समस्या खड़ी हो गई। वहीं आर्थिक तंगी के चलते उन्हें भूखे पेट भी रात काटना पड़ रहा था। आखिरकार इन मजदूरों ने अब अपने घर वापस लौटने का फैसला लिया तथा साइकिल से ही निकल पड़े। मजदूरों ने बताया कि सभी मजदूर ने जो कुछ पैसे बचाकर रखे थे, उन पैसों से साइकिल खरीदी और कुछ राशन खरीदे तथा उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के लिए निकल पड़े। मजदूरों ने बताया कि वें 6 से 7 दिनों में अपने ग्राम मेरठ तक पहुंच जाएंगे।

गजब का आत्मविश्वास

मजदूरों में गजब का एक आत्मविश्वास भी बना हुआ है कि वे साइकिल से ही सैकड़ों किलोमीटर की दूरी सात दिन में तय कर अपने घरों तक पहुंच जाएंगे। वर्तमान स्थिति में इस महामारी के चलते सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना मजदूरों को ही करना पड़ रहा है। रोजी रोटी की तलाश में जहां यह मजदूर अपने ग्रामों से पलायन कर अन्य प्रदेश में गए हुए थे, उन्हें अब घर पहुंचने की चिंता सता रही है, तो इसके साथ ही बहुत से मजदूर अब पलायन को लेकर तौबा कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब किसी भी स्थिति में वे पलायन नहीं करेंगे। अपने ग्राम में ही रहकर जो कुछ काम मिलेगा वह उससे ही गुजारा करेंगे। लेकिन अब शहर की ओर रुख नहीं करेंगे खैर जो भी हो अभी वर्तमान स्थिति में तो सुबह से मजदूरों को बड़ी संख्या में देखा जा सकता है जो अपनी ग्रामों की ओर लौट रहे हैं।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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