कवर्धा (नईदुनिया न्यूज)। जिले में इस बार मकर संक्रांति दो दिन आज और कल मनाया जाएगा। मकर संक्रांति के त्योहार पर गंगा स्नान, दान-पुण्य, जप और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति पर सूर्य धनु राशि को छोड़ते हुए अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश कर जाते हैं। इस दिन से सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं. दिन लंबे और राते छोटी होने आरंभ हो जाती है। इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में परिवर्तन को लेकर पंचांग में भेद है, जिस वजह से मकर संक्रांति का त्योहार दो दिन यानी आज और कल मनाया जाएगा।

श्री रामजानकी मंदिर के पंडित अखिलेश शुक्ला ने बताया कि काशी पंचाग एंव देव पंचाग के साथ-साथ देश के अन्य भागों के अधिकतर पंचांगों में सूर्य का राशि परिवर्तन 14 जनवरी की रात्रि आठ बजे के बाद दिखा रहा है। अतः काशी और देव पंचांग के अनुसार संक्रांति पर्व निर्विवाद रूप से 15 जनवरी को ही मनाया जाएगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही सभी तरह के मांगलिक कार्य जैसे यज्ञोपवीत, मुंडन, शादी-विवाह, गृहप्रवेश आदि आरम्भ हो जाएंगे।

मकर संक्रांति पर स्नान-दान

इस पर्व पर समुद्र में स्नान के साथ-साथ गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, कृष्णा, कावेरी आदि सभी पवित्र नदियों में स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देने से पापों का नाश तो होता ही है, पितृ भी तृप्त होकर अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। यहां तक कि इस दिन किए जाने वाले दान को महादान की श्रेणी में रखा गया है। वैसे तो सभी संक्रांतियों के समय जप-तप तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व है। किंतु मेष और मकर संक्रांति के समय इसका फल सर्वाधिक प्रभावशाली कहा गया है, उसका कारण यह है कि मेष संक्रांति देवताओं का अभिजित मुहूर्त होता है और मकर संक्रांति देवताओं के दिन का शुभारंभ होता है। इस दिन सभी देवता भगवान श्री विष्णु और मां श्रीमहालक्ष्मी का पूजन-अर्चन करके अपने दिन की शुरुआत करते हैं। अतः श्रीविष्णु के शरीर से उत्पन्न तिल के द्वारा बनी वस्तुएं और श्रीलक्ष्मी के द्वारा उत्पन्न इक्षुरस अर्थात गन्ने के रस से बनी वस्तुएं जिनमें गुड़-तिल का मिश्रण हो उसे दान किया जाता है।

इन चीजों का करना चाहिए दान

कहा जाता है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी दान करने से घर में सुख और शांति आती है। इस दिन गुड़ और तिल दान करने से कुंडली में सूर्य और शनि की स्थिति से शांति मिलती है। शनि की साढ़े साती से प्रभावित लोगों को इस दिन तांबे के बर्तन में काले तिल को भरकर किसी गरीब को दान करना चाहिए। मकर संक्रांति के दिन नमक का दान करने से भी शुभ लाभ होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन का गाय के दूध से बने घी का दान करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। मकर संक्रांति के दिन अनाज दान करने से मां अन्नपूर्णा प्रसन्न रहती हैं।

सौ गुना वापस मिलता है दान

शास्त्रों के अनुसार, उत्तरायण को देवताओं का दिन यानी सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। चूंकि इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, इसलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, का खास महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान, सौ गुना बढ़कर वापस मिल जाता है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के त्योहार का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के दिन गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन तिल-गुड़, चावल-दाल की खिचड़ी आदि का दान करना भी शुभ माना गया है। इस दिन कई राज्यों में पतंग उड़ाने की भी परंपरा है। मकर राशि में सूर्य के प्रवेश के दौरान सूर्यदेव की पूजा भी बहुत फलदायी होती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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