कोंडागांव/ माकड़ी (नईदुनिया न्यूज)। माकड़ी ब्लाक के ग्राम अनंतपुर के बीहड़ वन क्षेत्र में गांव से पांच किलोमीटर की दूरी पर मेढर तालाब है, जो सैकड़ों वर्ष पुराना है। इस तालाब का निर्माण बस्तर के प्राचीन नागवंशी राजाओं ने करीब 11से 12 ईसवी में करवाया था, जहां इसके दक्षिण भाग में भगवान शिवजी के मंदिर बनाने की योजना थी। इसके लिए उन्होंने तीन ईंट भट्ठा निर्माण किए थे, जिससे कि मंदिर का निर्माण किया जा सके। यह ईट भट्ठा आज भी मेढर तालाब के उत्तरी भाग में स्थित है। इस भट्ठे को धान के भूसे से जलाया गया था जो कि ध्यान से ईंट भट्ठे को देखने से पता चलता है, मेढर के उत्तरी भाग में अनेक छोट-छोटे तालाब हैं।

नागवंशी राजाओं ने कालांतर में मेढर तालाब में मंदिर निर्माण की योजना को त्यागकर चार किलोमीटर दूर कोयंदोमारो (मार्कंडेय नदी) जो कि छत्तीसगढ़ ओडिशा सीमा पर बनवाया गया। कालांतर में वह शिव का मंदिर राजा महाराजाओं की लड़ाई के बाद नागवंशी शासन के खात्मे के बाद यह शिव मंदिर धराशाई होकर गिर गया। कोंडागांव कलेक्टर दीपक सोनी का कहना है कि जिले में स्थित सभी पुरातात्विक स्थलों के सर्वे के लिए पुरातत्व विभाग से आग्रह करते पत्र भेजा गया है, ताकि पुरातात्विक धरोहरों का संरक्षण व जीर्णोंद्धार किया जा सके।

कोयंदेमारो शिव मंदिर पुन: प्राण प्रतिष्ठा

जबकि ओडिशा स्थित ग्राम देवगांव का एक लकड़हारा प्रतिदिन लकड़ी के लिए अनंतपुर स्थित जंगल में आया करता था जो कि उस नागवंशी राजाओं के द्वारा निर्मित धाराशाही मंदिर के शिवलिंग (जिसका ऊपरी हिस्सा) से कुल्हाड़ी सेे धारकर जंगल आता था एक दिन उसने सोचा कि इस पत्थर को क्यों ना मैं घर लेकर जाऊं यह कहते उसने उस पत्थर की खुदाई की तो पत्थर नीचे तक गया हुआ था लगातार खुदाई करने पर वहीं प्राचीन शिव मंदिर के रूप में लोगों के बीच सैकड़ों वर्ष बाद पुन: बाहर आया जिसे वर्ष 2008 में पुन: प्राण प्रतिष्ठा किया गया जहां प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि में श्रद्धालुओं की भीड़ होती है।

अनंतपुर के उपसरपंच श्यामसुंदर नेताम ने बताया कि यह जो मेढर तालाब है, यह बीच जंगल में है पहले बहुत जंगल था अभी भी है पर हम अभी गांव वाले जंगल को बचाना चाहते हैं, यहां पर चारों जगह से लोग आते हैं साथ में पशु -पक्षी भी आते हैं। यहां बीच जंगल में ईंट है, जो कि राजा महाराजाओं के जमाने का ईट है, हमारे दादा परदादा बताते हैं, यहां पर जंगल में इटा बाटी है, यहां पर पूर्व कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा आए थे। उन्होंने तालाब को देखा तालाब में बहुत सारे पक्षी आए थे, उनको देखकर कलेक्टर ने कहा था कि इसेे ग्रामवासी सुरक्षित रखें और किसी को भी इसे नुकसान पहुंचाने ना दे और इसका हम सुंदरीकरण करण करेंगे।

घस्सूराम सोरी थाना अनंतपुर वन रक्षक

यहां वन प्रबंधन समिति अनंतपुर के जो समिति सदस्य रहे और सरपंच उपसरपंच गायता पटेल ने बताया कि जीपीएस से लिए माप से टोटल नौ हेक्टेयर में यह तालाब है, जबकि पूरे जंगल का रकबा 265.029 हेक्टेयर में है। पूर्व कलेक्टर मीणा के दौरे के समय उन्होंने काला बगुला देख कर बहुत खुश हुए थे और समिति से जो मछली पालन कराया जा रहा था उसको बंद करने का निर्देश दिया था, पशु-पक्षी से कोई छेड़खानी ना हो, वन रक्षक को आदेश दिया था। स्थानीय लोगों ने बताया था कि यदाकदा यहां पानी-पीने हिरण, भालू को भी देखा जाता है। उनके स्थानांतरण के बाद पुन: इस ऐतिहासिक तालाब को संरक्षित करने के लिए किसी ने सुध नहीं लिया है।

Posted By: Abhishek Rai

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