कोंडागांव (नईदुनिया न्यूज)। भारत के इतिहास में 1971 में हुए लोकसभा चुनाव का था जिसमें इंदिरा गांधी ने प्रतिद्वंदी राजनारायण को पराजित किया था। लेकिन चुनाव परिणाम आने के चार वर्ष बाद हाई कोर्ट में चुनाव परिणाम को चुनौती दी। 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त कर उन पर छह वर्ष का चुनाव न लड़ने का प्रतिबंध लगा दिया एवं उनके चिर प्रतिद्वंद्वी राजनारायण सिंह को विजयी घोषित कर दिया। दलील दिया गया था, इंदिरा गांधी द्वारा सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग एवं तय सीमा से अधिक खर्च इन आरोप को अदालत ने सही पाया। इन आरोपों के बावजूद इंदिरा गांधी ने इस्तीफा नहीं दिया और बौखलाई तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने निर्णय नहीं मानते हुए 25 जून 1975 को संविधान की धारा 352 के तहत आपातकाल की घोषणा कर दी थी। इसे भाजपा ने काला दिवस के रुप में मनाया।

प्रेस कांफ्रेंस में भाजपा नेताओं ने कहा कि इस आपातकाल के दौरान जनता के सभी मौलिक अधिकारों को स्थगित कर दिया गया था। सरकार विरोधी भाषणों और किसी भी प्रकार के प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। समाचार पत्रों को विशेष आचार सहिता का पालन करने के लिए विवश किया गया और सरकारी सेंसर से गुजरना पड़ता था। घोषणा के साथ ही विरोधी दल के नेताओं को गिरफ्तार करवाकर अज्ञात स्थानों पर रखा गया, सरकार ने मीसा के तहत कदम उठाया। यह ऐसा कानून था जिसके तहत गिरफ्तार व्यक्ति को कोर्ट में पेश करने और जमानत मांगने का भी अधिकार नहीं था। विपक्षी दलों के बड़े नेता मोरारजी देसाई, अटल बिहारी बाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जार्ज फर्नांडिस, जयप्रकाश नारायण सभी को जेल भेज दिया गया। आपातकाल लागू करने के लगभग दो साल बाद विरोध की लहर तेज होती देख इंदिरा गांधी ने लोकसभा भंग कर 1977 में चुनाव करने की सिफारिश की।

भाजपा नेताओं ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की कांग्रेस सरकार भी ठीक आपातकाल की तरह सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए अनुमति प्रविधान लाकर इतिहास दोहराने का कार्य कर रही है। प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व जिला अध्यक्ष प्रवीर सिंह बदेशा, जिला महामंत्री तरुण साना, युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष प्रशांत पात्र, नगर पंचायत अध्यक्ष गणेश दुग्गा, नगर पंचायत उपाध्यक्ष गणेश जायसवाल मोहित सिंह उपस्थित रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close