कोंडागांव (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ईडी की गिरफ्त में फंसे आइएएस समीर बिश्नोई पर कोंडागांव कलेक्टर रहते हुए पांच करोड़ रुपये गबन करने का आरोप लगा था। इसके बाद उन्हें यहां से स्थानांतरित कर दिया गया। इस प्रकरण की जांच शुरू की गई परंतु बार-बार जांच अधिकारी बदलते रहे और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

बिश्नोई दो सितंबर से 16 अक्टूबर 2016 तक करीब डेढ़ महीने तक कोंडागांव के कलेक्टर रहे। इस दौरान उन्होंने स्कूलों की मरम्मत के नाम पर पांच करोड़ की राशि का आहरण किया। आरोप लगा कि मरम्मत के लिए ऐसे स्कूल चुने गए जो नवनिर्मित थे व बिना काम कराए राशि निकाल ली गई।

उस प्रकरण की जांच अधिकारी जिला पंचायत की तत्कालीन सीईओ रही नुपूर राशि पन्ना ने बताया कि उन्होंने जांच पूरी कर रिपोर्ट कमिश्नर को भेज दी थी। इसमें कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। हालांकि उनकी जांच को गलत बताते हुए उनका तत्काल तबादला कर दिया गया। वर्तमान में अपर कलेक्टर डीडी मंडावी के पास यह प्रकरण है।

सूर्यकांत के ठिकानों पर ईडी ने 17 बार दी दबिश

कोयला परिवहन घोटाले का मास्टर माइंड सूर्यकांत तिवारी फरार है। उसकी तलाश में ईडी के अधिकारी बीते एक सप्ताह में उसके सभी संभावित ठिकानों पर 17 बार छापा मार चुके हैं परंतु उसका सुराग नहीं मिला। ईडी ने रायगढ़ व कोरबा के डीएमएफ दफ्तरों को सील कर दिया है। इन जिलों में डीएमएफ के उपयोग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

चोरी का कोयला भी बेचता था गैंग

सूर्यकांत तिवारी गैंग के लोग चोरी के कोयले को भी वैध बनाकर खपाते थे। ईडी की जांच में कई कोरे टीपी मिले हैं। इनमें कंपनी का नाम छोड़कर अन्य सभी विवरण दर्ज हैं। यहां गेवरा में देश की सबसे बड़ी कोयला खदान है जिसमें सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण कोयले की चोरी करते हैं। तस्करों के माध्यम से यह कोयला खपाया जाता है। इस बात की जांच की जा रही है कि क्या कंपनी के नाम के बिना खनिज विभाग इस चोरी के कोयले का टीपी जारी करता था। इस जांच की आंच यहां पदस्थ रहे दो आइपीएस अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है।

Posted By: Pramod Sahu

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