Chhattisgarh पूनमदास मानिकपुरी, कोंडागांव। चूड़ी उद्योग का नाम आते ही उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद जिले का नाम जेहन में आता है, लेकिन अब कोंडागांव भी फिरोजाबाद की राह पर चल पड़ा है। यहां चूड़ियों की खनक ने आदिवासी महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। फिरोजाबाद से कच्चा माल और तकनीक लाकर कोंडागांव में चूड़ी बनाई जा रही है। यहां भट्ठी में कांच गलाने से लेकर चूड़ी की डिजाइन और पैकिंग तक सारा काम महिलाएं करती हैं। इस काम में 93 महिलाएं लगी हैं और सभी प्रतिदिन ढाई सौ से तीन सौ रुपए तक कमा लेती हैं। समूह की महिलाएं अब आत्मनिर्भर हो गई हैं। जिला प्रशासन की पहल पर जनवरी 2018 में चूड़ी निर्माण केंद्र की स्थापना की गई। फिलहाल उतना उत्पादन तो नहीं हो रहा है कि यहां से माल बाहर भेजा जा सके पर जिले के हाट बाजारों में अब यहीं की चूड़ियां बेची जा रही हैं।

चूड़ी प्रशिक्षण व निर्माण केंद्र के संचालक महीप सिंह ने बताया कि इलाके की बेरोजगार महिलाओं का समूह बनाकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से इस केंद्र की स्थापना की गई थी। महिलाएं प्रतिदिन सुबह 10 से शाम पांच बजे तक काम करती हैं। अभी खेती किसानी का सीजन है तो कम महिलाएं आ रही हैं। लेकिन जो आती हैं, वे ढाई-तीन सौ कमा ही लेती हैं। उन्हें काम के अनुपात में मेहनताना दिया जाता है।

एक कंगन का करीब दो रुपये मिलता है। केंद्र में काम कर रही तारामती नेताम, नीशू निर्मलकर, मोहिनी यादव, गीता, गुड्डी आदि ने बताया कि चूड़ी की डिजाइन सरल होती है तो काम तेजी से होता है। कठिन डिजाइन का माल तैयार करने में ज्यादा वक्त लगता है। एक दिन में वे अधिकतम सौ से डेढ़ सौ तक चूड़ी बना लेती हैं। यहां कंगन ज्यादा बनाए जाते हैं।

कांच लोकल, बाकी फिरोजाबाद से

चूड़ी बनाने के लिए कांच के अलावा कैमिकल, नग और जरी आदि की जरूरत होती है। दवा और शराब की पुरानी बोतलें व कांच के टुकड़े यहां मिल जाते हैं। बाकी सामग्री फिरोजाबाद से मंगाई जाती है। चूड़ी बनाने के लिए स्टैंड व बेलन की भी जरूरत होती है जो स्थानीय स्तर पर उपलब्ध है। यहां एक छोटी भट्ठी लगाई गई हैश् जिसमें 12 सौ से 13 सौ डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर कांच को गलाया जाता है। गले हुए कांच को मनचाहा आकार देकर चूड़ी बनाई जाती है।

Posted By: Prashant Pandey

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