कोंडागांव। Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कोंडागांव जिले के पांच गांवों में इसाई परिवारों के घरों पर हमले हुए हैं। यह हमले स्थानीय ग्रामीणों ने एकजुट होकर किए। कई घरों को तोड़कर बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। जिन गांवों में यह घटना हुई है उनके नाम कर्काबेड़ा, सिंघानपुरी, तेलियाबेड़ा, सिलती और जोंद्राबेड़ा बताए गए हैं। यह घटना गुरुवार की बताई जा रही है। घटना के तुरंत बाद गांवों में पुलिस फोर्स भेजी गई और पूरे गांव में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि जिन लोगों के घर तोड़े गए हैं वे मूल रूप से जनजातिय समूहों से हैं। इन परिवारों ने कुछ समय पहले इसाई धर्म स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद उन्हीं के समुदाय के कई लोग उनसे नाराज थे। उन्हीं लोगों ने एकजुट होकर गांवों में हमले को अंजाम दिया।

गांवों में इस तरह की घटनाओं के बाद तनाव का माहौल है। बस्तर जिले के इंस्पेक्टर जनरल पी. सुंदरराज ने कहा कि यहां रहने वाले लोग धर्म परिवर्तित लोगों से खुश नहीं हैं क्योंकि ये लोग स्थानीय रीति-रिवाजों को नहीं मानते हैं। सुंदरराज ने कहा, 'कोंडागांव के पांच गांवों कर्काबेड़ा, सिंघानपुरी, तेलियाबेड़ा, सिलती और जोंद्राबेड़ा गांवों में कुछ परिवार पिछले पांच से छह सालों से इसाइ धर्म का पालन करते हैं।

यहां रहने वाले लोग इससे खुश नहीं हैं क्योंकि ये लोग स्थानीय रीति-रिवाजों और त्योहारों को नहीं मानते हैं। इस वजह से गांव में तनाव का माहौल पैदा हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और दोषी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल इलाके में शांति का माहौल है और यहां ऐसी कोई घटना दोबारा ना हो इसलिए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

गौरतलब है कि देश की कई जनजातियों द्वारा ईसाई धर्म अपनाया गया है। छत्तीसगढ़ में ही उत्तरी इलाके के सरगुजा संभाग में बड़ी संख्या में जनजातिय समूहों के सदस्य पिछले कई दशकों से इसाई धर्म स्वीकार कर उसी का अनुपालन कर रहे हैं। हलांकि हमारा संविधान हमें धार्मिक आजादी देता है और कोई भी व्यक्ति अंतकरण से किसी भी धर्म को मानने और उसके प्रति आस्था रखने के लिए स्वतंत्र है।

इस साल के फरवरी महीने में उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर जिले के खलीलाबाद के ग्राम बयारा में भी इस तरह का मामला सामने आया था। यहां के एक दर्जन से भी अधिक अनुसूचित परिवारों द्वारा ईसाई धर्म अपनाया गया था। इस अनुसूचित बस्ती में काफी समय से हर रविवार को प्रार्थना सभा आयोजित कर लोगों को ईसाई धर्म की शिक्षा दी जा रही थी। किसी को नौकरी दिए जाने तो कुछ को और प्रलोभन देकर धर्मांतरण करवाया जा रहा था।

Posted By: Himanshu Sharma

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