कोंडागांव। किसानों व पशुपालकों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी गोठान योजना संचालित कर रहीं है। मुख्यमंत्री के सपनों के अनुरूप गोठानों को मल्टी एक्टिविटी सेंटरों के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा, ताकि गोठान में रोजगार मूलक गतिविधियां का संचालन हो सके है और गोठानों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सकें। वर्तमान में जिले के ग्राम बड़े कनेरा में निर्मित आदर्श गोठान वीरान हो चुकी है।

बड़ेकनेरा में स्थित आदर्श गोठान का मुख्यमंत्री ने 2019 में शुभारंभ किया था, ताकि स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे। सरकार की महत्वाकांक्षी गोठान योजना जिम्मेदार अधिकारियों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण दम तोड़ रही है। गोठान की अव्यवस्थाओं के कारण किसान अपने मवेशियों को ले जाने से कतराते हैं। गोठान में जिन महिला समूहों पर गोठान संचालन की जिम्मेदारी थी, समूह की महिलाओं ने कार्य बंद रखा है। वहीं गोठान परिसर के अंदर बकरी पालन, मुर्गी पालन के लिए शेड का निर्माण हुआ है। शेड के अंदर बकरी तथा मुर्गी के चूजे तक नजर नहीं आ रहे।

नई दुनिया से बातचीत में स्थानीय लोगों ने बताया कि पशुपालक मवेशियों को गोठान में नहीं लाते, गोठान निर्माण हुआ था, उस दौरान मवेशियों को लाते थे और महिलाएं भी प्रतिदिन गोबर खरीदी कर कंपोस्ट खाद निर्माण करती थी, मुर्गी पालन, बकरी पालन, सूकर पालन के लिए शेड का निर्माण हुआ था, जहां बकरी व कड़कनाथ मुर्गियां लाई गई थी। लेकिन धीरे-धीरे सब गायब हो गए और मुर्गियां मर गई आज एक भी नहीं है। अभी तीन दिन पहले पैरा लाकर रख गया हैं। आज की स्थिति में गोठान का रेख-देख करने वाला भी कोई नहीं।

कुमारी खवास अध्यक्ष जय बिहान तिरंगा समूह बड़ेकनेरा के मुताबिक हमने एक लाख का लोन लेकर 80 हजार की राशि में अधिकारियों के कहने पर धमतरी से 15 नग जमनापाली बकरी खरीद कर गोठान में लाई थी। विभाग के लोगों ने ऐसी बकरियां हमें दिलाया जो सभी बच्चा जनने के बाद मरने लगी, हमने किसी तरह मात्र 40 हजार पटाया है, अधिकारियों ने निश्शुल्क दूसरी बकरी लाकर देने की बात कही थी, लेकिन आज तक नहीं लाए। इसलिए बकरियों की मौत के बाद घाटा होने से हमने गोठान में कार्य करना छोड़ दिया, मुर्गी पालन करने वाले समूह की महिलाओं ने भी गोठान में कार्य करना छोड दिया है।

कुछ बकरियां बची है

-गोठान में चार समूह कार्यरत हैं, वर्मी कंपोस्ट गोबर खरीदी बकरी पालन सूकर पालन का कार्य चल रहा था, बकरिया देशी नस्ल की नहीं होने से मर गई, कुछ बकरियां बची है, उनको समूह की महिलाओं ने रखा है, कड़कनाथ के चूजे भी मर गए, समूहो के द्वारा सब्जी उत्पादन किया जा रहा, मवेशियों के लिए पैरा की व्यवस्था है, ग्रामीण सुबह-शाम मवेशियों को लाते हैं।

गोकुल दास मानिकपुरी, अध्यक्ष गोठान प्रबंधन समिति बडेकनेरा

नए सिरे से कार्य आवंटित करने का दावा

-गोठान मैं सुबह शाम मवेशियों को लाने सहित पर्याप्त चारे की व्यवस्था होने और मुर्गी, बकरी पालन जैसी तमाम गतिविधियां बंद रहने से विभाग द्वारा प्रक्रिया में लेकर समूहों को नए सिरे से कार्य आवंटित करने का दावा किया है।

प्रकाश चुरगिया,उपसरपंच बडेकनेरा ।

मल्टीएक्टिविटी केंद्र

-सामान्य रूप से सभी गोठानों को मल्टीएक्टिविटी केंद्र के रूप में विकसित करने का हमारा प्रयास है। बड़ेकनेरा गोठान का मैंने निरीक्षण नहीं किया है, वहां पर हमारी गतिविधियां सामान्य रूप से समूहों द्वारा संचालित की जा रहीं।

प्रेम प्रकाश शर्मा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोंडागांव

Posted By: Nai Dunia News Network

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