कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। वर्षा आश्रित खेती से जिले के किसानों को आज भी मुक्ति नहीं मिली है। डेढ़ माह की मानसून बीतने के बाद भी 50 प्रतिशत रोपा बियासी का काम बाकी है। जिले में केवल 48 प्रतिशत भूमि सिंचित है। इसमें 16 प्रतिशत बढ़ाने यानि 64 प्रतिशत करने कटघोरा के आमाखोखरा और रामपुर में 123 करोड़ की लागत से 24 ग्राम पंचायत के 46 गांवों में सिंचाई और व्यपवर्तन निर्माण काम होना है। 38 किलोमीटर नहर तैयार करने के लिए राजस्व में भू- अर्जन का मामला सात साल से लंबित है। जलाशय का पानी खेतों तक नहीं पहुंचने से 18 हजार किसान सिंचाई योजना से वंचित हैं।

किसानों की सुविधा के लिए जिले में सिंचाई सुविधा का विस्तार जिस गति से होना था वह नहीं हो रहा। बांगो जैसी बड़ी सिंचाई परियोजना के होने के बाद भी जिले वासियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा, वजह यह है । पोड़ी के पहाड़ी क्षेत्र में कृषि का रकबा बहुमत कम है। दर्री बांध से होकर निकलने वाली दायी व बायी तट नहर कोरबा और करतला के खेतों से नीचे हैं। इस असुविधा को देखते हुए सिंचाई सुविधा को बढ़ाने के लिए दो बड़े जलाशयों का निर्माण किया गया है। इनमें पहाड़ी क्षेत्र से उतरने वाली वर्षा जल को रोक सिंचाई के लिए रामपुर जलाशय बनाया गया है। इस जलाशय आठ ग्राम पंचायतों के 1900 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई प्रस्तावित है। नहर निर्माण के लिए प्रस्तावित भूमि का मुआवजा प्रकरण अभी तक निराकृत नहीं हुआ है। यही हाल अहिरन नदी के पानी को रोककर तैयार किया गया आमा खोखरा जलाशय की है। जलाशय काम तो पूरा हो चुका है लेकिन खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए 21 में से 13 गांवों के जमीन को अधिग्रहित किया जाना है। अब तक केवल पांच गांवों के ही जमीन को अधिग्रहित किया जा सका है। जिन गांवों का प्रकरण पूरा हो चुका है उनमें ढपढप, जुराली, कसरेंगा, विजयपुर व कापूबहरा शामिल है। अधिग्रहण के बाद अब तक केवल छह किलोमीटर ही नहर का काम पूरा हुआ है। लंबे समय से काम बंद होने कई स्थानों में खोदी गई नहर में मिट्टी पट चुकी है। बताना होगा कि सिंचाई सुविधा के लिए स्वीकृत 56.07 करोड़ में 17 करोड़ राशि जलाशय निर्माण में खर्च हो चुका है। शेष राशि को नहर निर्माण और मुआवजा के लिए खर्च किया जाना है। कटघोरा के निकट जुराली कसनिया के सैकड़ो हेक्टेयर खेतों में सब्जी की खेती होती है। नहर में सिंचाई के लिए पानी दिए जाने से सब्जी की खेती को विस्तार मिलेगा। अभी भी यहां भूमिगत जलस्त्रोत में खेती आश्रित होने से सब्जी की खेती प्रभावित होता है।

शाखा नहरों का भी रूका है काम

38 किमी लंबी नहर में 13 अतिरिक्त शाखा नहर का निर्माण भी प्रस्तावित है। लगगभ 11 किलोमीटर शाखा नहर से नदी के उथले बंजर भूमि को पानी मिलेगा। सिंचाई सुविधा के अभाव में प्रस्तावित गांवों अभी वर्षा आश्रित खेती होती है। विभाग की माने तो शाखा नहर का आगे भी विस्तार किए जाने की संभावना है। इसके अलावा नहर में पानी का बहाव होने से सायफन के माध्यम से जलापूर्ति की सुविधा में विस्तार मिलेगा। नहर विस्तार होने से आसपास के किसान डीजल पंप से पानी को अधिक से अधिक दूर तक ले जा सकते हैं।

कटघोरा नगर को जलावर्धन से मिल रहा पानी

जलाशय के पानी का भले ही सिंचाई के लिए उपयोग न हो रहा हो लेकिन कटघोरा नगर को इससे जला पूर्ति की जा रही है। इसके लिए पीएचई विभाग ने 33 करोड़ की लागत से जलावर्धन योजना तैयार की है। 20 वार्डो में बंटे नगर में अभी भी पाइपलाइन का पूरा विस्तार नहीं किया गया। ऐसे में लोगों को हर साल गर्मी के समय जल संकट से गुजरना पड़ता है। इधर जल संसाधान के अधिकारी का कहना है कि पानी नगरीय प्रशासन से पानी तो लिया जा रहा लेकिन राजस्व का भुगतान नहीं किया जा रहा। तीन साल से पानी का 12 लाख भुगतान बकाया है।

तीन साल में केवल 20 हेक्टेयर सिंचिंत रकबा बढ़ा

कोरोना काल से लेकर अब तक रोजगार गारंटी बने तालाबों से केवल 20 हेक्टेयर 0.12 प्रतिशत सिंचित रकबा में बढ़त हुई है। तालाबों का निर्माण खेतों में आसपा किया जाना था लेकिन स्थल चिन्हांकन में बरती गई लापरवाही के चलते किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। कोरोना काल लेकर अब कितने 3000 से भी अधिक तालाबों का गहरीकण किया जा चुका है लेकिन तालाब से खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नहर निर्माण की योजना मनरेगा में शामिल नहीं की गई है। ऐसे में तालाबों में वर्षा जल का उपयोग सिंचाई के लिए नहीं हो रहा।

लोटनापारा व मुरली का भी काम बंद

जलाशय निर्माण की तरह जल संसाधन की छोटी परियोजाओ का भी काम बंद पड़ा है। पाली विकासखंड के ग्राम लोटनापारा उतरदा व्यपवर्तन जलाश का निर्माण पांच साल पहले हो चुका है। इससे आसपास के 300 हेक्टेयर जमीन को सिंचित किया जाना है। 1.5 किलोमीटर नहर निर्माण के लिए भू-अर्जन का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है। इसी तरह ग्राम मुरली में निर्मित जलाशय के पानी को खेतों तक पहुंचाने के नहर निर्माण छह साल ठप है। चैतमा का वसुंधरा नाला में निर्मित जलाशय किसानों के लिए आज भी अनुपयोगी है।

इन गांवों से होकर गुजरेगी नहर

लखनपुर, विजयपुर, अभयपुर, ढेलवाडीह, ढपढप, भेजीनारा, कसरेंगा, घनाकछार, अरदा, हर्राभांठा, जमनीमुड़ा, तेलसरा, पौसरा, बांकीमोंगरा, मड़वाढोढा, रोहिना, सिंघाली पुरेना आदि।

रामपुर जलाशय और आमाखोखरा जलाशय से 29 गांवों के खेतों को सिंचित किया जाना है। खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए लगभग 38 किलोमीटर नहर निर्माण स्वीकृत है। मुआवजा और भू-अधिग्रहण का काम लंबित होने से खेतों तक पानी पहुंचाना संभव नहीं है।

केएस पैकरा, एसडीओ, जलसंसाधन कटघोरा

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