कोरबा(नईदुनिया प्रतिनिधि)। पीएमजीएसवाय की पांच साल से भी अधिक पुरानी खस्ताहाल हो चुकी 26 सड़कों की नवीनीकरण के लिए सरकार ने 13 करोड़ की स्वीकृति दी है। सड़क बनवाने के लिए निविदा तो जारी की जा रही लेकिन निर्माण के लिए तय सरकारी दर की वजह से पर्याप्त ठेकेदार सामाने नहीं आ रहे हैं। ठेका स्वीकृति के लिए तीन से अधिक ठेकेदारों का शामिल होना अनिवार्य हैं। कम दर तय किए जाने से कम ठेकेदारों की भागीदारी सामने आ रही है। इस वजह से पिछले दो साल से निविदा की प्रक्रिया निरस्त हो रही है। सड़क में सुधार का कार्य लंबित होते जा रही है, जिसका खामियाजा आम ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।

गांवों की विकास के लिए तैयार की गई प्रधानमंत्री ग्राम विकास की सड़कें फिर से पगडंडियों में तब्दील हो चुकी है। सड़कों के निर्माण तय समय में सुधार नहीं होने की वजह मरम्मत की लागत दर बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कों की गारंटी पांच साल की रहती है। इस बीच सड़क की स्थिति जर्जर होने पर मरम्मत कराने की संपूर्ण जवाबदारी ठेकेदार की होती है। अवधि बीत जाने के उपरांत सुधार की पूरी जवाबदेही सम्बंधित विभाग शासन की रहती है। जिले में वर्ष 2002 से पीएमजीएसवाय के तहत सड़क तैयार किया जा रहा है। अब तक 500 से भी अधिक सड़कें बनाई जा चुकी हैं। इन सड़कों के माध्यम से ही गांव एवं ग्रामीण मुख्य मार्ग जुड़ चुके हैं, लेकिन मार्ग में समय रहते सुधार कार्य नहीं होने से जानलेवा साबित हो रहा है। सड़कें सुधार के लिए प्रस्ताव भेजने पर सीमित सड़कों के लिए ही अनुमति मिलती है। जिले में पांच से अधिक समय पूरा कर चुके सड़कों की संख्या 50 से भी अधिक है। इनमें 26 सड़कों के नवीनीकरण संधारण की स्वीकृति प्रदान दो साल पहले की गई थी। आवंटित होने के बाद भी सड़कों सुधार नहीं हुआ है। मुख्य व बायपास सड़कों की मरम्मत के लिए हमेशा फंड की तंगी प्रमुख अड़चन बनकर सामने आती रही हैं लेकिन प्रधानमंत्री ग्राम सड़क की संधारण नवीनीकरण के लिए आबंटन उपलब्ध कराए जाने के दो साल बाद भी कार्य शुरू नहीं किया जा सका।

बढ़ चुके हैं सामग्रियों के दाम

वर्ष 2018-19 में सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत कार्य की लागत वर्तमान में जारी जा रहा है। सामाग्रिया के दाम बढ़ चुके हैं। पहले डामर का दर 28 रुपए प्रतिकिलो था जो आज 52 रुपये हो गया है। यही वजह है ठेकेदार पुराने दर पर कार्य नहीं करना चाहते। इस बीच शासन न ही बजट रिवाइज कर रही और न ही नए स्टीमेट बनाने की दिशा में सार्थक पहल कर रही। ठेकेदार वर्तमान बाजार भाव की दर पर निविदा में दर डाल रहे जिसे स्वीकार नहीं किया जा रहा। बताया जा रहा है कि कुछ ठेकेदार हिम्मत कर निविदा प्रक्रिया में शामिल भी रहे पर तीन से कम ठेकेदार होने की वजह से निविदा निरस्त हो जा रही। निविदा स्वीकृति से लेकर कार्य पूरा होने तक चढ़ावा खर्च हो देखते हुए आम ठेकेदार कम दर में निर्माण करने में असमर्थ हैं।

भारी वाहनों का कब्जा

प्रधानमंत्री सड़क निर्माण के बाद ग्रामीणों को आवागम की सुविधा मिली वहीं दूसरी ओर अवैध कारोबार से जुड़े लोगें के लिए भी यह वरदान साबित हुआ। कालरी क्षेत्र से जुड़े तमाम सड़कें कोयला तस्करी करने वाली भारी वाहनों से प्रभावित है। वन मार्ग से जुड़ी सड़कों में रेती से भरी हाइवा और ट्रैक्टर दौड़ रहे है। परिवहन क्षमता से अधिक सामानों लेकर चलने वाले भारी वाहनों की वजह से सड़क समय से पहले खराब हो रही हैं। आवागमन व्यवस्था तय करने के लिए न तो परिवहन विभाग का हस्तक्षेप है न ही यातायात विभाग की रूचि है। लेमरू, सतरेंगा पहुंचने के लिए पहले बसों का भी संचालन होता था लेकिन सड़कों की दशा खराब होने से यात्री वाहन बंद हो चुके हैं। बालको से अजगर बहार पहुंच मार्ग में आए दिन वाहन कीचड़ में धंसे हुए मिल जाएंगे।

इन सड़कों के नवीनीकरण को मिली है स्वीकृति

जिन सड़कों को स्वीकृति मिली है उनमें करतला विकासखंड से कोटमेर से कोई,चांपा चोरभट्ठी मार्ग से कलगामार,कर्रापाली टोंडा से पहाडगांव, मुख्यमार्ग से भालूसटका,पठियापाली रामभांठा से साजापानी शामिल है। कोरबा ब्लाक से मातमार से कलदामार, रिंगरोड से बैगामार, भैसमा कुदमुरा से भेलवाटार, कोरकोमा से मुढूनारा, बालको अजगरबहार से तिलईडांड, अजगरबहार कछार से कोसगई मंदिर, लेमरू अजगरबहार से बगबुड़ा, सोनपुरी रोड से तराईडांड, रजगामार पतरापाली से गोड़मा शामिल है। इसी तरह पाली मुख्य मार्ग से कांजीपानी ,एल 38 से डिंडोलभांठा ,पाली रतखंडी से रमतला,एल 46 से ओझियईन, मुख्य मार्ग से डोगाघाट, एल 67 से कंदरईलपारा, एल 59 से टिकरीपारा,टी 01 से बाघीनाला शामिल है। कटघोरा पसान रोड से अडसरा ,पसान पिपरिया रोड से लैंगी , पसान चंद्रोटी रोड से तुलबुल ,टी-दो से टेकीकुड़ा नवीनीकरण शामिल हैं।

निविदा की प्रक्रियार रायपुर मुख्यालय से होती है। निर्धारित मापदंड के अनुसार कार्य करने के लिए निविदा में ठेकेदारों की भागीदारी कम है। निविदा की प्रक्रिया पूरी होने के कार्य शुरू कराई जाएगी।

कमलराम, मुख्य कार्यपालन अभियंता

Posted By: Nai Dunia News Network

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