कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति की श्रेणी में आने वाले कोरवा व बिरहोर जनजाति के एक भी युवा अब बेरोजागर नहीं रहेंगे। इस कड़ी में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर मंगलवार को पांचवीं से आठवीं पढ़े 19 युवाओं को जिला शासन की ओर से नियुक्ति पत्र प्रदान की जाएगी। कलेक्ट्रेट के एनआइसी कक्ष में कलेक्टर की उपस्थिति में आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रमा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन विशेष पिछड़ी जनजाति के युवा व समाज के लोगों को संबोधित करेंगे।

जिले में पांचवीं से स्नातकोत्त तक पढ़े-लिखे युवाओं की संख्या 322 है। सर्वे के आधार पर आवेदन पत्र मंगाए गए थे, जिसमे रिक्त पदों के विरूद्ध वरीयता क्रम में अधिक अंक पाने वाले युवाओं को शामिल किया गया है। विशेष पिछड़ी जनजाति के इन युवाओं को नौकरी से मिलने से वे विकास की मुख्यधारा में शामिल होंगे। जिले के अस्तित्व में आने के बाद 20 वर्ष का लंबा समय गुजर जाने के बाद इनके जीवन शैली में खास परिवर्तन नही आई। कभी पहाड़ पर रहने वाले इन विशेष पिछड़ी जन जाति के लोगों मैदानी क्षेत्र में लाने के बाद भी उनके रहन सहन में पूर्ण बदलाव नहीं लाया जा सका है। लंबे अंतराल में एक अच्छी पहल यह रही कि कुछ परिवारों में शिक्षा को लेकर जागरूकता आने लगी है, लेकिन बेरोजगारी के कारण उनकी जीवन शैली में खास बदलाव नहीं आया है। इस समस्या को देखते हुए शासन पांचवीं से स्नातकोत्तर तक अध्ययनरत युवाओं जिले के रिक्त तृतीय और चतुर्थ वर्ग श्रेणी पदों में भर्ती करने का निर्णय लिया है। आदिवासी दिवस के अवसर पर 19 युवाओं को उनके योग्यता के अनुसार तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों में पदस्थ किया जाएगा। पिछड़ी जनजाति के इन आदिवासियों को सीधी नियुक्ति देने के लिए नव नियुक्त कलेक्टर संजीव झा सभी जनपद अधिकारियों को पत्र लिखा था। जिसमें क्षेत्र में निवासरत शिक्षित बेरोजगार बिरहोर की संख्या की जानकारी मांगी गई है, ताकि उन्हे शासन की मंशा के अनुसार नियुक्ति दी जा सके। बताना होगा कि कोरवाओं की अपनी अलग तरह की संस्कृति है। अशिक्षा के कारण शराब का सेवन और एक स्थान पर ठहर कर नहीं रहने मानसिकता से वे अब तक नहीं उबर पाएं हैं। शासकीय सेवाओं में सीधी पदस्थापना से उन्हे विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलेगा। आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त माया वारियार ने बताया कि सीधी भर्ती का नियम पहले भी था, लेकिन शिक्षित युवा सूचना संचार नहीं जुड़े होने के कारण आवेदन नहीं कर पाते। यही वजह है कि उनकी सीधी भर्ती की जा रही। जो युवा बच गए हैं उनकी भर्ती पद रिक्त होने पर की जाएगी।

स्थानी स्तर पर दी जाएगी नियुक्ति

युवाओं को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए पहले भी पहल की जा चुकी है, इस दिशा में शिक्षित और अशिक्षित युवाओं को लाइवलीहुड कालेज से होमगार्ड, ड्रायवर, लोडर जैसे जैसे पदों के लिए प्रशिक्षित किया गया था। प्रशिक्षण के पश्चात इन्हे निजी कंपनियों के अलावा शराब दुकानों में भी पदस्थ किया लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने व परिवार से दूरी कारण नौकरी छोड़ दी है। स्थानीय स्तर पर शासकीय नौकरी मिलने से उन्हे विकास की मुख्य धारा में जुड़ने का अवसर मिलेगा।

68 ग्राम पंचायतों में है बसाहट

जिले के कटघोरा विकासखंड को छोड़ दिया जाए तो शेष पाली, पोड़ी उपरोड़ा, कोरबा और करतला के 68 ग्राम पंचायतों में कोरवा व बिरहोर जनजाति के लोग निवासरत हैं। आदिवासी विकास विभाग के सर्वे के अनुसार इनकी जनसंख्या चार हजार 934 है। आदिवासी जिला होने के लिहाज से जिले के सभी 412 ग्राम पंचायत आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है लेकिन एक भी पंचायत में कोरवा या बिरहोर सरंपच नहीं हैं।

फैक्ट फाइल

0जनजाति- पांचवी- आठवी- दसवीं- बारहवीं- स्नातक

कोरवा- 212- 31- 6- 2- 1

बिरहोर- 51- 15- 4- 0- 0

वर्जन

विशेष पिछड़ी जनजाति की श्रेणी में कोरवा और बिरहोर आदिवासियों से 19 रिक्त पद के लिए आवेदन मंगाए थे। वरीयता के आधार तृतीय और चतुर्थ श्रेणी पद के लिए के पांचवीं व आठवीं उत्तीर्ण युवाओं की सूची जारी गई है। सभी पात्र आदिवासयों को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर नियुक्ति पत्र प्रदान की जाएगी। शेष बचे युवाओं को पद रिक्त होने पर पदस्थ किया जाएगा।

माया वारियर, सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग

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