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कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सूचना संचार के बढ़ते युग में नेटवर्क समस्या के कारण आज भी 98 ग्राम पंचायत के 278 वनांचल गांव मोबाइल कनेक्टिविटी सुविधा से वंचित हैं। पंचायती राज व्यवस्था को संचार सुविधा से सुदृढ़ बनाने 390 ग्राम पंचायत का वाट्सएप ग्रुप तैयार किया जाना था, ताकि जनप्रतिनधियों को शासन के विकासमूलक जानकारियां अब सीधे रायपुर से मिल सके। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर प्रतिनिधि उच्च अधिकारियों से सीधा संवाद कर सकें। प्रतिनिधियों के अलावा जनपद सदस्यों व जिला पंचायत सदस्यों को भी ग्रुप में जोड़ना था। नेटवर्क कनेक्टिविटी सुविधा नहीं होने से विकासमूलक कार्य प्रभावित हो रहे।

पंचायतों तक विकासमूलक योजनाओं की सीधी जानकारी प्रदान करने के लिए संचार सुविधा के तौर पर वाट्सएप ग्रुप तैयार किया जाना था। इसमें सरपंचों को जोड़ने पंचायत विभाग ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में पत्र जारी किया गया था। हाईटेक मोबाइल सुविधा जिन प्रतिनिधियों के पास नहीं थी, उन्हें अब मोबाइल खरीदने के लिए कहा गया था। विकासमूलक कार्यों का सीधा संवाद प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हो सके, इस पहल की कवायद अब धूमिल हो चुकी है। गांवों में आज इंटरनेट ऑनलाइन सुविधा के लिए कनेक्टिविटी टावर की समस्या को दूर नहीं किया गया है। भारत संचार निगम लिमिटेड के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायतों को संचार सुविधा से जोड़ने की महत्वपूर्ण योजना अब भी पूरी नहीं हो सकी है। ग्राम पंचायतों के लिए नियुक्त किए गए कंप्यूटर ऑपरेटर को को भी पदमुक्त किया जा चुका है। प्रभावित ग्राम पंचायतों में श्यांग, लेमरू, गढ़उपरोड़ा, गिद्धमुड़ी, एलांग आदि ऐसे गांव हैं जहां नेटवर्क की समस्या है। इसके चलते केवल पंचायत ही नहीं बल्कि गांवों से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक विभाग से संबंधित जानकारी अपडेट नहीं हो पाती।

पहले ही शिक्षा विभाग का टेबलेट नाकाम

नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण ही शिक्षा विभाग का टेबलेट सिस्टम पहले से ही पᆬेल हो चुका है। करोड़ों खर्च के बाद शिक्षा विभाग की दशा में सुधार नहीं आया है। 2270 प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में सिस्टम दिया गया था। कई शिक्षक तो टेबलेट को ऑपरेट करना अब भी नहीं जानते। शैक्षणिक सत्र के आखिर तक केवल 320 टेबलेट से ही रिपोर्टिंग विभाग तक आ रही थी।

महिला जनप्रतिनिधि एंड्रायड से दूर

आदिवासी जिला होने के लिहाज से आज भी कई ग्राम पंचायात के प्रतिनिधि असाक्षर हैं। खासकर 50 पᆬीसदी ग्राम पंचायतों की बागडोरमहिला सरंपचों के हाथ में है, जो हाईटेक मोबाइल चलाने से अंजान हैं। ऐसे में महिला सरपंचों को सीधा संवाद किया जाना मुश्किल होगा। इसके अलावा मोबाइल ऑपरेट करने में समय लगेगा। योजना को सपᆬल बनाने प्रशिक्षण भी दिए जाने की बात कही गई जो अब तक मूर्तरूप नहीं ले पाई है।

टावर की समस्या

वाट्सएप ग्रुप से प्रत्येक गांव को जोड़ने की योजना शुरू की गई है। इसके पहले भी ग्राम पंचायतों को इंटरनेट सुविधा से हाईटेक किया जाना था। इसके लिए कंप्यूटर सेट भी प्रदान किया है। टावर की सुविधा नहीं होने से ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ने की बात थोथा ही साबित हो रहा है। नई सरकार गठन के बाद के इस दिशा में अब तक कोई पहल नहीं हो पाई है। वर्तमान में नरवा गरवा घुरवा बाड़ी पर ही शासन का का ध्यान केंद्रित है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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