कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास में पोषक तत्वों से भरपूर आहार सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। पर उन्हीं खाद्य पदार्थों में किसी माध्यम से कृमि के कीटाणु हों, तो पोषण की बजाय पेट में जाकर वह बच्चों को बीमार कर देते हैं। परिणाम स्वरूप कृमि के प्रभाव से स्वस्थ बच्चे भी कमजोर होकर कुपोषण की ओर चले जाते हैं। पालकों को यही समझाते हुए बच्चों को कृमि से बचाने जिले में एक अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत गांव-गांव में पालकों व खासकर माताओं को जागरुक किया जा रहा। बच्चों को अल्बेंडाजोल दवा खिलाई जा रही और फल-सब्जियों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने प्रोत्साहित किया जा रहा।

इसी कड़ी में जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर लेमरू सेक्टर के समस्त गांव, पारा व मोहल्ला में राष्ट्रीय कृमि उन्मूलन कार्यक्रम मनाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत एक से लेकर 19 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों, बालक-बालिकाओं को लक्ष्‌य लेकर अल्बेंडाजोल की गोली खिलाने का अभियान शुरू किया गया। गढ़-उपरोड़ा में सरपंच संतमती राठिया ने इस कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान पीएचसी लेमरू से डा एलआर गौतम व उनकी स्वास्थ्य टीम में शामिल भारती यादव, मीना सेक्टर के गांवों में भ्रमण कर ग्रामीणों अभियान के बारे में जानकारी प्रदान कर रहीं। इस अभियान को सफल बनाने क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता-सहायिकाओं का भरपूर सहयोग मिल रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू की स्वास्थ्य टीम और कार्यकर्ता व सहायिकाएं गांव-गांव में ग्रामीणों व खासकर माताओं से सतत संपर्क कर अपने घर के सभी बच्चों को यह दवा खिलाने जागरुक कर रही हैं। आसपास के क्षेत्रों में घर-घर भ्रमण कर सभी बच्चो को गोली खिलाई जा रही है। डा गौतम ने बताया कि कृमि की समस्या कुपोषण का एक प्रमुख कारण है।

बिना साफ किए फल-सब्जी न खाएं

डा गौतम ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि उन्मूलन का प्रमुख उद्देश्य सभी बच्चों के पोषण स्तर में सुधार कर सभी को सुपोषित करना हैं। कुपोषण का एक प्रमुख कारण कृमि है, जो आमतौर पर तीन प्रकार के होते हैं। इनमें हुक वार्म, राउंड वार्म एवं टेप वार्म शामिल है, जो मिट्टी एवं गंदे पानी वाले स्थानों से आते हैं। ऐसे स्थान से जब हम बिना साफ किए फल, सब्जी को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं, तो यह रोगाणु हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। हमारे शरीर से सभी पोषक तत्वों का भक्षण कर खासकर बच्चों को कमजोर बनाते हैं और फिर वे कुपोषित हो जाते हैं। इसकी रोकथाम जरूरी है।

कार्यशीलता एवं क्रियाशीलता प्रभावित

कृमि के दुष्प्रभाव का असर बच्चे ही नहीं, किशोर व युवाओं में भी होता है, जिससे वे बीमार होने लगते हैं। उनकी कार्यशीलता एवं क्रियाशीलता कम होने लगती हैं। बच्चे स्कूल कम आने लगते हैं। उनका मन खेलने या पढ़ाई- लिखाई में नहीं लगता। इस प्रकार से इसके कई दुष्परिणाम होते हैं। इन सबको रोकने के लिए ही कृमि की गोली खिलाई जाती है,जिससे सभी बच्चे स्वस्थ्य रहें। डा गौतम, भारती यादव एवं सुमन सिदार ने घर-घर जाकर निरीक्षण किया और पालकों को इस कार्यक्रम के महत्व और जरूरत से अवगत कराते हुए उसका लाभ प्राप्त करने प्रोत्साहित किया।

सही पोषण मिले तो देश रोशन बने

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू के डा एलआर गौतम ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य कहे जाते हैं। इसलिए देश के विकास के लिए उनका तंदरुस्त व सेहतमंद होना जरूरी है। ऐसे में सही पोषण तो देश रोशन का संदेश प्रसारित करते हुए लगातार इस दिशा में प्रयास किया जा रहा है। सीएमएचओ डा बीबी बोर्डे के मार्गदर्शन में अभियान के माध्यम से खासकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों व पहाड़ी कोरवा आदिवासियों के पोषण पर विशेष फोकस किया जा रहा है, जिनके लिए इस अभियान में पूरी तरह शामिल होना और भी जरूरी हो जाता है। इसमें स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम व आंगनबाड़ी के कर्मी सक्रिय होकर कार्यरत हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local