कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। घर में पति की हत्या कर लाश को कार में डालकर काफी प्वाइंट के जंगल में 150 फीट गहरे खाई में फेंक दिए जाने का दो साल पुराना मामला अब जाकर सामने आया। इस घटना में नाबालिग पुत्र ने भी अपने मां का साथ दिया। जिस कार में शव रख लाश को ठिकाने लगाया गया, उसके चालक ने यह राज पुलिस के सामने खोल दिया। उसका कहना है कि पिकनिक जाने के लिए सामान लोड करने का झांसा देकर धोखे से लाश को गाड़ी में डाल दिया गया था। मौके पर पहुंचने के बाद उसे इसकी भनक लगी, पर जान से मारने की धमकी दिए जाने पर वह अब तक मुंह बंद रखा।

पूर्व में पथर्रीपारा में रहने वाली सुशीला निषाद 32 वर्ष एक निजी अस्पताल में काम करती थी। इस दौरान वहां काम करने वाले विमल उर्फ सूर्या वाल्मिकी 35 वर्ष के साथ प्यार हो गया। चार बच्चे होने के बाद भी पहले पति को छोड़ कर उससे शादी कर ली। बच्चे उसके साथ ही रहते थे। बताया जा रहा है कि शादी के कुछ महीनों बाद सूर्या व उसके बीच विवाद होने लगा। सुशील की माने तो आए दिन शराब पीकर सूर्या उसके साथ मारपीट किया करता था। इससे वह व उसके बच्चे तंग आ गए थे। करीब दो साल पहले आठ नवंबर 2019 की रात को अन्य दिनों की तरह शराब के नशे में सूर्या पहुंचा और मारपीट करने लगा। यह बात उसके बड़े पुत्र (उस वक्त 16 वर्ष) को रास नहीं आई और सूर्या के साथ वह हाथापाई करने लगा। इस बीच पुत्र उसका हाथ पकड़ कर रखा और सुशीला गला घोंट कर हत्या कर दी। अपना गुनाह छिपाने मां बेटे ने मिल कर योजना बनाई और दूसरे दिन सुबह एक कार चालक ललित कुमार घोसले को घर बुलाई और काफी प्वाइंट पिकनिक मनाने जाने का झांसा दी। गाड़ी में सामान लोड करने में वक्त लगेगा, इसलिए थोड़ी देर बाद आने बोल कर ललित को वापस भेज दी। इस बीच वह अपने पुत्र के साथ मिल कर चटाई में शव में लपेट कर कार की डिक्की में लोड कर दी। चालक ने पुलिस को बताया कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि कार में शव है और वह काफी प्वाइंट चला गया। वहां भी बाथरूम जाने का बहाना कर सुशीला ने ललित को दूर जाने कहा। इस बार उसे शंका हुआ और उसने निगरानी की, तो देखा कि कार से शव निकाल कर खाई में सुशीला व उसका बेटा फेंक रहे थे। यह देख उसके होश उड़ गए और वह इसका विरोध किया, तो मां बेटे ने उसे भी हत्या के मामले में फंसा देने की धमकी दी। इस वजह से वह दो साल तक किसी से कुछ नहीं कहा। बहरहाल पुलिस ने सुशीला व उसके नाबालिग पुत्र को हत्या कर साक्ष्‌य छिपाने के मामले में गिरफ्तार कर ली है।

पुलिस को मिला केवल नरकंकाल

रामपुर पुलिस चौकी पहुंच कर चालक ललित कुमार ने हत्या की यह कहानी सुनाई तो पुलिस कर्मी भी हक्के बक्के रह गए। पहले तो अधिकारियों को उसकी बातों पर यकीन करना मुश्किल हो रहा था, पर जैसे जैसे मामले की जांच आगे बढ़ी, तो पूरा मामला आईने की तरह साफ हो गया। 150 फीट नीचे गहरे खाई में उतर कर शव को ढूंढना मुश्किल था। इसके बावजूद पुलिस ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए रस्से के सहारे किसी तरह नीचे उतरे, लगातार दो दिन तलाश की गई। इस काम में खुद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर भी लगे रहे। पुलिस की मेहनत रंग लाई और शनिवार को मृतक का नरकंकाल ढूंढ निकाला गया।

पर्स व बेल्ट से स्वजनों ने की शिनाख्त

पुलिस ने घटनास्थल से नरकंकाल के अलावा मृतक के लोहे का कड़ा, पर्स, बेल्ट भी बरामद किया है। इसकी पहचान मृतक के भाई विनोद कुमार जुगेल वाल्मिकी एवं मां शांति बाई जुगेल वाल्मिकी ने की है। इसके साथ ही नरकंकाल लापता सूर्या वाल्मिकी की होने की पुष्टि हो गई है। बावजूद इसके नरकंकाल को परीक्षण के लिए मेडिकल कालेज रायपुर भेजने की तैयारी की जा रही है।

ब्लेकमेलिंग से परेशान हो खोला राज

हत्या का राज चालक ललित कुमार के सामने खुलने के बाद सुशीला और उसके बीच नजदीकियां बढ़ गई। बताया जा रहा है कि सुशीला उससे रूपये भी ऐंठ रही थी। इससे वजह काफी परेशान था। कई बार ऐसी भी नौबत आई, जब सुशीला ने उसे भी दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसा देने की धमकी दिया करती थी। इससे निजात पाने वह पुलिस की शरण में गया और अंधे कत्ल का यह राज खोल दिया। पुलिस ने ललित को सरकारी गवाह बनाया है।

घटना के बाद बदल ली थी मकान

हत्या की घटना को अंजाम देने के बाद सुशीला पथर्रीपारा का मकान छोड़ रामपुर स्थित हाउसिंग बोर्ड कालोनी के एक मकान को किराए पर ले ली थी। पुलिस ने वहीं से उसे और उसके पुत्र को गिरफ्तार करने की कार्रवाई की है। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि सुशीला की संदिग्ध गतिविधियों की वजह से वह संदेह के दायरे में थी।

खुद दर्ज कराई थी गुम होने की सूचना

हत्या की यह घटना हमेशा के लिए राज बन कर रह जाए, इसके लिए सुशीला ने हर संभव कोशिश किया। उसने 21 मई 2020 को रामपुर पुलिस चौकी पहुंच कर पति सूर्या के आठ नवंबर की रात से लापता होने की सूचना भी दे दी। उस वक्त पुलिस को सफाई दी थी कि वह अपने स्तर पर पति की तलाश कर रही थी, पर कहीं कुछ पता नहीं चलने पर वह थक हार कर अब जाकर इसकी सूचना दे रही। पुलिस ने इस मामले में गुम इंसान दर्ज किया था, चूंकि बालिग व्यक्ति के गुम इंसान का मामला था इसलिए पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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