कोरबा। अगहन माह के गुरुवार को लक्ष्मी की आराधना को समृद्धि दायिनी माना जाता है। सूर्योदय से पूर्व भोर में की जाने वाली पूजा में आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। लक्ष्मी स्वच्छ साफ-सुथरे घरों पर रीझती है। इस आशय से गुरुवारी पूजा को स्वच्छता का प्रतीक भी माना जाता है। इस वर्ष अगहन माह में 4 गुरुवार पड़ रहे हैं। आराधना को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा।

2 नवंबर से अगहन माह की शुरूआत हो चुकी है। इस बार 9 नवंबर को पहला गुरुवार पड़ रहा है। लक्ष्मीपूजा में व्रती महिलाएं अभी से लग गई हैं। ज्योतिषाचार्य मूलचंद शास्त्री की मानें तो त्योहारों की केवल धार्मिक मान्यताएं ही नहीं है बल्कि वे विज्ञान सम्मत भी है।

स्वच्छता से स्वास्थ्य लाभ को बढ़ावा मिलता है। ठंड के महीने में अलभोर में उठ कर नित्यक्रिया स्नान के पश्चात पूजा करने का विधान है। इस पूजा में स्वच्छता का विशेष महत्व है। घर को स्वच्छ रखने का संकल्प लेकर गुरुवारी पूजा को करने से समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

लक्ष्मी देवी को घर में आमंत्रित करने के लिए चावल के माड़ अथवा छूही मिट्टी से लक्ष्मी पांव व कमल आदि की आकृतियां बनाई जाती है, ताकि लक्ष्मी घर के दरवाजे से लेकर पूजा स्थल तक पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पूजा की तैयारी कर ली है। पूजन के लिए आवश्यक सामग्रियों की खरीदी की जा चुकी है।

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