कोरबा(नईदुनिया प्रतिनिधि)। लंबी दूरी की सफर से बचने के लिए हसदेव तट पर बसे दर्जन भर से अधिक गांव के लोगों को आज भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। तट पर बसे डोंगाघाट, धनगांव, पंडरीपानी, पोड़ी खोहा, गढतरहा, सरई सिंगार आदि दर्जन भर से अधिक गांव के लोगों को कटघोरा पहुंचने के लिए नाव से आवागमन करने पर 8 किलोमीटर दूरी तय करनी पडती है। दूसरी ओर अजगरबहार से दर्री होते हुए मुख्य मार्ग में 52 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। दोनों मार्ग में 44 किलोमीटर का अंतर है। दूरी कम करने के लिए सेतु निगम से झोरा घाट में 15.50 करोड़ की लागत से पुल स्वीकृत है, लेकिन निविदा प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी कार्य अब तक शुरू नहीं हुई है।

हसदेव नदी तट पर बसे अधिकांश गांव को प्रधानमंत्री सड़क से जोड़ा जा चुका है, फिर भी पुल की कमी के कारण ग्रामीण आज भी नदी को पार करने के लिए नाव का सहारा लेते हैं। दर असल क्षेत्रवासियों के लिए नजदीकी शहर कटघोरा है। वर्षो से इन गांवों के रहवासियों की निर्भरता छुरी, कटघोरा बाजारों में रही है। बांगो डैम में पुल के बाद सीधे दर्री डैम पर पुल बना। तट पर बसे गांव के रहवासियों को पैदल चल कर अजगरबहार आना पडता है। यहां से सड़क मार्ग से कटघोरा आने पर उन्हे 52 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए 46 रूपये बस खर्च देना पडता है। इसके विपरीत डोंगाघाट से नाव चढकर घमोटा से छुरी होते हुए कटघोरा पहुंचने में महज 8 से 10 किलोमीटर दूरी तय करने के बाद झोरा से छुरी पैदल पहुंचते हैं और यहां से बस से कटघोरा पहुंचने पर मात्र 10 रुपये खर्च होता है। क्षेत्र में अधिकांशतः पिछड़े आदिवासियों का निवास है, जिनकी आर्थिक दशा सुदृढ़ नहीं है। स्याहीमुड़ी, एकलव्य व केंद्रीय विद्यालयों में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को इसी मार्ग पर आवागमन करना पड़ता है। ऐसे में काम दूरी पड़ने के कारण उन्हें नाव का विकल्प लेना आसान होता है। अधिक समस्या बारिश के दिनों में होती है। नदी में पानी का बहाव अधिक होने के बावजूद लोग जोखिम उठाकर नाव से ही आना-जाना करते हैं। पुल बनने से यात्रा खर्च बचने के अलावा समय की भी बचत होगी।

यात्री वाहन की भी सुविधा नही

मार्ग में आवागमन के लिए यात्री वाहन की सुविधा नही होने से लोगों को सायकल, मोटरसायकल जैसे निजी साधन अथवा पैदल यात्रा करना पड़ता है। दैनिक उपयोगिता के सामान लाने में भी लोगों को काफी समस्यों का सामाना करना पड़ता है। पुल बन जाने से ना केवल क्षेत्र का विकास होगा, बल्कि आसपास के गांवों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। क्षेत्र में हाई व हायर सेकेंडी स्कूल तो हैं ,लेकिना महाविद्यालय नहीं है। कटघोरा कालेज की दूरी कोरबा के बजाय निकट होगी। इससे क्षेत्र में उच्च शिक्षा का स्तर भी बढ़ेगा। इसके अलावा कटघोरा दर्री का भी व्यवसायिक विकास होगा।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

झोरा घाट पिकनिक स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। प्रतिदिन यह दूर दराज से लोग वनभोज के लिए आते हैं। निकट में ऐतिहासिक कोसगाईगढ़ है। पहाड़ के उपर प्रतिवर्ष चैत्र और क्वांर नवरात्रि में दर्शनार्थियों का आना- जाना लगा रहता है। पुल निर्माण से एतिहासिक स्थल महत्व बढ़ेगा। पुरातात्वि की शोध की संभावनाएं अवसर के रूप में परिवर्तित होगी। सतरेंगा को पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह इसी मार्ग से होकर जाता है। पुल बनने से पर्यटन स्थलों की दूरी घट जाएगी।कटघोरा छुरी से कछार, गुरसियां, पाथा, बांगो आदि गांवों की दूरी कम हो जाएगी।

झोरा घाट पुल निर्माण के लिए निविदा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी हैं। निर्माण कार्य 15 दिन के भीतर झोरा और कोरियाघाट में शुरू हो जाएगी। 480 मीटर लंबे और 8.4 मीटर चौड़ पुल की लागत 15.30 करोड़ निर्धारित है। वर्ष 2022 तक कार्य पूर्ण हो जाएगा।

एके जैन, सहायक कार्यपालन अभियंता, सेतु निगम

Posted By: Nai Dunia News Network

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