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कोरबा । नईदुनिया प्रतिनिधि

छोटे नालों में पहली बार जल संसाधन का मेजर डिपार्टमेंट बोल्डर नाला का निर्माण करेगा। इसके पहले माइनर से छोटे चेक डैम का निर्माण होता था। इसके लिए एक करोड़ 40 लाख की स्वीकृति मिली है। बड़े पत्थरों से निर्माण करने का उद्देश्य चेक डैम को बरसाती जल प्रवाह सेध्वस्त होने से बचाना है। जल संसाधन और रोजगार गारंटी के तहत होने वाले इस कार्य के लिए कटबितला, पता़ढ़ी, बेला, बासीन और चाकामार से निकलने वाले छोटे नाला को इसके लिए चिन्हित किया गया है। चेक डैम के अस्तित्व में आने से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

अब तक छोटे नालों में बनाए गए चेक डैम के ढह जाने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने अब बोल्डर यानी बड़े पत्थरों से बनाने का निर्णय लिया है। अब तक छोटे नालों में चेक डैम का निर्माण माइनर डिपार्टमेंट से ही होता था, जबकि माइनर में बड़ी नदियों पर ही एनीकट बनाने का काम होता है। बोल्डर यानी बड़े पत्थरों से बने चेक डैम पर बारिश के दौरान जल प्रवाह का असर पत्थरों पर नहीं होगा। जल संसाधन की ओर कार्य की शुरुआत हाल ही में कटबितला में की गई, जिसमें अपेक्षित प्रगति नहीं है। बारिश नहीं होने से अभी नालों में पानी का बहाव कम है। जिन स्थानों को चेक डैम के लिए चिन्हित किया गया है, वहां अधिकांश क्षेत्रों में धान पᆬसल ली जाती है। असिंचित क्षेत्र होने के कारण किसानों को अपेक्षित पैदावार नहीं मिलता। चेक डैम निर्माण से लगभग 1500 हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जा सकेगा। सिंचाई सुविधा से चार हजार से भी अधिक किसान लाभान्वित होंगे। जिन नालों में अभी निर्माण होना है, उसमें पहले भी चेक डैम तैयार किया जा चुका था। माइनर से बने सीमेंट के चेक डैम जल प्रवाह के कारण बह चुके हैं। निर्माण के लिए सामग्री भी रोजगार गारंटी से स्वीकृत होगी।

हाथियों के लिए पानी की सुविधा

निर्माण के लिए करतला और कोरबा ब्लॉक के ही नालों का चयन किया गया है। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि जंगली जीव खासकर हाथियों के लिए पानी सुविधा होगी। इसके अलावा वन क्षेत्रों में रोपे जा रहे बांस व अन्य नर्सरी के लिए भी पानी की आपूर्ति होगी। हाथी कॉरिडोर के तहत चारागाह का विकास होगा। गर्मी के समय पानी की तलाश में बस्ती तक भटकने वाले हाथियों से ग्रामीणों को निजात मिलेगी।

गोठान के लिए होगी जल आपूर्ति

चेक डैम निर्माण का मुख्य उद्देश्य न केवल जल संरक्षण और सिंचाई रकबा को बढ़ावा देना है, बल्कि हाल ही में चल रहे नरवा गरवा घुरवा व बाड़ी योजना के तहत गोठान में पानी की आपूर्ति होगी। निर्माण के लिए यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्रीष्म के दौरान जल उपलब्ध रहे। किसानों के लिए न केवल निस्तारी जल की सुविधा होगी, बल्कि रबी और खरीपᆬ पᆬसल के लिए भी किसानों को पानी मिलेगा।

ध्वस्त चेक डैम सुधारने राशि नहीं

माइनर के तहत अब तक 123 चेक डैम का निर्माण किया जा चुका है। विभाग की मानें तो जल प्रवाह के कारण 38 चेक डैम ध्वस्त हो चुके हैं। पोड़ी-उपरोड़ा और करतला ब्लॉक के जोगी, केराझरिया, धवन नाला में बने चेक डैम में अब तक सुधार नहीं हुआ है। चेक डैम में समय-समय पर मरम्मत की आवश्यकता होती है, किंतु विभागीय उदासीनता के कारण योजना का लाभ स्थानीय किसानों को नहीं मिल रहा है।

छोटे नालों में बोल्डर चेक डैम का निर्माण किया जाएगा। खेती के लिए जल संरक्षण के अलावा गोठान के लिए भी जलापूर्ति होगी। इसके लिए जिले के अलग-अलग पांच नालों का चिन्हांकन किया गया है।

- एलएस चंद्राकर, अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन